आई आई कानपुर के मणींद्र अग्रवाल के द्वारा दिए गए एक साक्षात्कार के आधार पर -
05 फरवरी 2022 को दैनिक जागरण में प्रकाशित :"आई आई कानपुर के मणींद्र अग्रवाल ने एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि कोरोना की पहली लहर की जब शुरुआत हुई तो भारत सरकार के विज्ञान एवं
प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने एक माडल चुनने के लिए 10 सदस्यीय कमेटी
बनाई थी, जो कोरोना के वर्तमान और भविष्य में प्रसार का सटीक आकलन कर सके।
उस कमेटी में मैं भी सदस्य था। कमेटी के सामने देश के कई गणितज्ञों ने करीब
35 माडल प्रस्तुत किए। इनमें से दो माडलों का चयन हुआ, लेकिन वह अपेक्षाओं
की कसौटी पर खरे नहीं उतरे। तब मैैंने अगस्त 2020 में एसएआइआर (सस्पेक्टेड
एसिंप्टमैटिक इंफेक्टेड रिकवर) दो माडल तैयार किया। उसके आधार पर यह
भविष्यवाणी की गई कि कोरोना की पहली लहर सितंबर में चरम पर होगी और आकलन
सही निकला। डीएसटी को यह माडल अच्छा लगा। इसके बाद उस माडल की कुछ कमियों
को दूर करके दिसंबर 2020 में सूत्र (सिंप्टमैटिक अनडिटेक्टेड टेस्टेड
पाजिटिव रिकवर्ड एप्रोच) माडल तैयार किया।
देश की जनसंख्या को इन चार वर्गों में विभाजित करके डेटा का आकलन किया जाता
है। इसमें संक्रमण के लक्षण वाले लोगों की संख्या, ऐसे मामले जिनमें
संक्रमण का पता न लगा हो, संक्रमित पाए गए लोगों की संख्या और ठीक हो चुके
लोगों की संख्या के आधार पर आकलन किया जाता है। यह माडल जनवरी 2021 में
फाइनल हुआ और उसकी मदद से अब दूसरी और तीसरी लहर के दौरान संक्रमण के
प्रसार की गति को सटीक रूप से मापा जा रहा है।हमारे सूत्र माडल के आधार पर भी लोगों को सचेत रहने और उसकी रोकथाम के लिए सरकारी इंतजाम दुरुस्त करने में मदद मिल रही है।
अगर सटीक डेटा मिले तो सूत्र माडल कई और बातों की भी जानकारी दे सकता
है।माडल का इस्तेमाल केवल आंकड़ों के आधार पर
होता है, लिहाजा टेस्ट व प्रभावित लोगों के सही आंकड़े उपलब्ध होने चाहिए।
कोरोना की पहली लहर और दूसरी लहर के दौरान सामने आए संक्रमित मामलों के
आधार पर तीसरी लहर का अनुमान लगाया था। जैसे-जैसे तीसरी लहर बढऩी शुरू हुई
और उसके आंकड़े सामने आने शुरू हुए तो तीसरी लहर चरम पर कब-कब और कहां
होगी? इसका आकलन किया गया। इसके मुताबिक इसी माह 23 से 25 जनवरी के बीच देश
में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर चरम पर होगी और फरवरी से संक्रमण के
मामले कम होने शुरू हो जाएंगे। फरवरी के अंत व मार्च की शुरुआत में कोरोना
संक्रमण कमोबेश खत्म होने के आसार हैं। चौथी लहर के बारे में अभी कुछ नहीं
कहा जा सकता, क्योंकि वायरस लगातार म्यूटेंट होता है।फरवरी के अंत व मार्च की शुरुआत में कोरोना संक्रमण कमोबेश खत्म होने के
आसार हैं। चौथी लहर के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि वायरस
लगातार म्यूटेंट होता है।"
इस साक्षात्कार में ध्यान देने वाली बातें - मणींद्र अग्रवाल जी के वक्तव्य के अनुशार - "मैैंने अगस्त 2020 में एसएआइआर (सस्पेक्टेड एसिंप्टमैटिक इंफेक्टेड रिकवर) दो माडल तैयार किया। उसके आधार पर यह भविष्यवाणी की गई कि कोरोना की पहली लहर सितंबर में चरम पर होगी और आकलन सही निकला।"
इसमें विशेष बात यह है कि भारत में कोरोना थोड़ा बहुत तो चल ही रहा था धीरे धीरे बढ़ रहा था किंतु जुलाई के पहले सप्ताह से कोरोना तेजी से बढ़ने लगा था 31 मई को 8782 संक्रमित मिले थे जबकि 30 जून को 18641 मामले आए थे इसके बाद 29 जुलाई को एक दिन में 50,294 संक्रमित आए थे |
ऐसी परिस्थिति में संक्रमण जब मई जून जुलाई तक क्रमशः बढ़ता ही जा रहा था तो अगस्त में भी बढ़ना ही था इसलिए उसी क्रम में आगे बढ़ता रहा था |बढ़ने की गति तीव्र थी इसलिए अभी कुछ सप्ताह तक तो बढ़ना ही था | इसी अगस्त में दो मॉडल तैयार किए गए ! जिनके आधार पर सितंबर में कोरोना का पीक होने की भविष्यवाणी की गई !जिसमें किसी तारीख की चर्चा नहीं है | इसमें वैज्ञानिक अनुसंधानों जैसा था क्या अपितु सब कुछ क्रमिक रूप से होता चला जा रहा था | इसमें आम लोगों के द्वारा लगाए जाने वाले अंदाजे से नया क्या था ? इसके बाद इसमें सुधार किया गया और माडल की कुछ कमियों को दूर करके दिसंबर 2020 में सूत्र माडल तैयार किया।तब तक पहली लहर पूरी हो चुकी थी |
कुछ विशेष पूर्वानुमानों के अखवारों एवं उनकी वेवसाइटों में प्रकाशित अंश !
26 फरवरी 2021 को डाउन टू अर्थ में प्रकाशित :भारत में संक्रमण की दूसरी लहर की संभावना नहीं है -प्रो मणींद्र अग्रवाल
1 अप्रैल 2021 को न्यूज -18 डॉट कॉम पर प्रकाशित :आईआईटी कानपुर के साइबर सिक्यॉरिटी हब के प्रोग्राम डायरेक्टर मणींद्र
अग्रवाल के अनुसार, महाराष्ट्र अगले दो हफ्ते में पीक पर होगा. मॉडल के
आधार पर महाराष्ट्र में रोजाना 45-50 हजार केस आ सकते हैं. इसी तरह पंजाब
रोजाना 3500 केसों के साथ पीक पर होगा. केरल में अप्रैल मध्य में केस
न्यूनतम स्तर पर होंगे. दिल्ली में भी अप्रैल-मई में संक्रमण के 5-6 हजार
नए केस रिपोर्ट हो सकते हैं. इसी तरह उत्तर प्रदेश अप्रैल के अंतिम हफ्ते
में रोज 6 हजार केस का आंकड़ा छू सकता है. पहली लहर के चरम में यूपी में
रोज करीब 7 हजार केस रेकॉर्ड किए गए थे. गोवा 300 केसों के साथ मई के पहले
हफ्ते में चरम पर होगा !
2 अप्रैल 2021 को दैनिक जागरण में प्रकाशित :मनिंद्र अग्रवाल ने कहा कि मई के अंत तक मामले बेहद कम हो जाएँगे !
9 अप्रैल 2021को जी न्यूज में प्रकाशित :आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल का दावा कि 20 से 25 अप्रैल के बीच यूपी में कोरोना वायरस पीक पर होगा. मई में मामला सही हो सकता है| प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल ने बताया कि मरीज और तारीख की ट्रैजेक्टरी के
अनुसार लखनऊ में 28 मार्च से कोरोना वायरस का ग्राफ उठना शुरू हुआ है, जो
17 मई को अपने निचली स्तर पहुँच जाएगा.कानपुर आईआईटी ने कोरोना पर रिसर्च करके सूत्र नाम का एक मॉडल तैयार किया है |
9 अप्रैल 2021 को अमर उजाला में प्रकाशित : आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवालका दावा, अप्रैल के बाद से देश में घटेंगे संक्रमित !प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल ने ये खुलासा गणितीय विश्लेषण के आधार पर किया
है। उन्होंने कहा है कि अप्रैल में जब इसकी लहर चरम पर होगी तब एक दिन में
80 से 90 हज़ार केस तक आ सकते हैं।अप्रैल अंत या तो मई के मध्य या अंत तक इसमें कमी आएगी।
26 अप्रैल 2021 को इंडिया डॉट कॉम में प्रकाशित :आईआईटी के वैज्ञानिकों ने अपने पूर्वानुमान में संशोधन
करते हुए गणितीय मॉडल के आधार पर अब कहा है कि भारत में कोविड-19 की दूसरी
लहर के दौरान एक्टिव 14 से 18 मई के बीच चरम पर पहुँचकर 38-48 लाख हो
सकती है और चार से आठ मई के बीच संक्रमण के दैनिक मामलों की संख्या 4.4 लाख तक के आंकड़े को छू सकती है |पूर्वानुमान में समयसीमा और मामलों की संख्या में सुधार किया गया है.
पिछले सप्ताह, अनुसंधानकर्ताओं ने पूर्वानुमान व्यक्त किया था कि महामारी
11 से 15 मई के बीच चरम पर पहुंच सकती है और उपचाराधीन मामलों की संख्या
33-35 लाख तक हो सकती है और मई के अंत तक इसमें तेजी से कमी आएगी | इस महीने के शुरू में, वैज्ञानिकों ने पूर्वानुमान व्यक्त किया था कि
देश में 15 अप्रैल तक उपचाराधीन मामलों की संख्या चरम पर होगी, लेकिन यह
बात सच साबित नहीं हुई.प्रोफेसर मनिंदर अग्रवाल ने सिसलिसलेवार ट्वीट में कहा, ”चरम पर पहुंचने का
समय : उपचाराधीन मामलों के लिए 14-18 मई और संक्रमण के दैनिक मामलों के
लिए 4-8 मई. चरम पर पहुंचने के आंकड़े: 38-48 लाख उपचाराधीन मामले और 3.4
से 4.4 लाख दैनिक नए मामले.” अग्रवाल ने यह भी उल्लेख किया कि यह स्पष्ट
नहीं है कि अंतिम आंकड़ा क्या होगा.
8
मई 2021को जी न्यूज में प्रकाशित : प्रद्मश्री से नवाजे जा चुके IIT
कानपुर के प्रो. माणिंद्रअग्रवाल ने जुलाई में दूसरी लहरके ख़त्म होने की भविष्यवाणी की है |
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11 मई 2021 को डाउन टू अर्थ में प्रकाशित : केंद्र सरकार का सूत्र मॉडल कोविड की दूसरी लहर आंकने में रहा
विफल, हर्ड इम्यूनिटी का दावा भी था गलत!डाउन टू अर्थ ने प्रोफेसर गौतम
मेनन से पूछा कि भारत में नोवल कोरोना वायरस की दूसरी लहर का अनुमान लगाने
में केंद्र का मॉडल ‘सूत्र क्यों विफल रहा।इसके उत्तर में प्रोफेसर गौतम मेनन ने कहा भारत में नोवल कोरोना वायरस बीमारी (कोविड-19) की दूसरी लहर का अनुमान लगाने में केंद्र सरकार का बनाया मॉडल ‘सूत्र’’ क्यों विफल रहा ? उन्होंने
कहा कि शोधकर्ताओं ने महामारी विज्ञान को लगातार कम करके आंका है और इसकी
बारीकियों और गहराइयों को गंभीरता से नहीं लिया है।गौतम मेनन : संक्रमण
की लहर के बारे में पहले ही अनुमान कर लेना असंभव होता है, क्योंकि यह
वास्तव में अचानक होने वाली एक घटना है। हालांकि, एक बार जब यह महसूस हो
गया कि लहर शुरू हो गई है और पिछली लहर की तुलना में मामलों की संख्या अधिक
तेजी से बढ़ रही है, तब मौजूदा स्थिति को समझने और विभिन्न परिस्थितियों
के मॉडल बनाने का जोरदार प्रयास होना चाहिए था। पूर्वानुमान के ऐसे मॉडल को
आने वाले नए आंकड़ों के हिसाब से व्यवस्थित किया जाना चाहिए था।मंत्रालय का मॉडल सूत्र बहुत अच्छे से नहीं तैयार किया गया,इसमें शामिल वैज्ञानिक लंबी अवधि की
पूर्वानुमान करने की कोशिश कर रहे हैं और लगता है कि मॉडल में बहुत ज्यादा
विश्वास है, जो न्यायसंगत नहीं है।मॉडल
लंबे समय की भविष्यवाणियां नहीं कर सकते हैं, क्योंकि समय के साथ चीजें
बदल जाती हैं। सूत्र के वैज्ञानिकों ने मॉडलिंग से जुड़ी अनिश्चितताओं के
साथ बहुत सतही तरीके से व्यवहार किया है।अमूर्त कल्पना करने में मॉडलिंग का कोई मतलब नहीं बनता है।
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कोरोना महामारी की तीसरी लहर :
9 अप्रैल 2021 को अमर उजाला में प्रकाशित : "नहीं आएगी तीसरी वेव" प्रो. मणींद्र ने कहा कि यूपी में संक्रमितों की संख्या काफी कम है। मॉडल
के अनुसार यहां संक्रमण बढ़ने की संभावना भी काफी कम है। महाराष्ट्र में 10
अप्रैल से केस कम होने शुरू होंगे। उन्होंने कहा कि केस शून्य तो नहीं
होंगे, लेकिन संख्या काफी कम हो जाएगी। उन्होंने तीसरी वेव आने से भी इंकार
किया है। प्रो. मणींद्र का कहना है कि तीसरी वेव जब तक शुरू होगी, उस समय तक 70 फीसदी लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ चुकी होगी।
25 जून 2021 को वन इंडिया डॉट कॉम पर प्रकाशित :फैक्ट चेक: क्या IIT कानपुर मॉडल
के
अनुसार,
15
जुलाई
से
भारत
में
तीसरी
लहर
आ
सकती
है।
उनकी की भविष्यवाणी के मुताबिक 15 जुलाई तक भारत में कोरोना की तीसरी लहर आएगी?
18 दिसंबर 2021 को आजतक पर प्रकाशित : कोविड सुपरमाडल समिति ने तीसरी लहर की भविष्यवाणी की, जानें कितनी घातकहोगी
!समिति के प्रमुख विद्यासागर ने कहा कि ओमिक्रॉन के चलते देश में कोरोना
की तीसरी लहर आएगी लेकिन ये दूसरी लहर की तुलना में कम प्रभावी होगी.देश में तीसरी लहर आने पर बहुत खराब स्थिति हुई तो प्रतिदिन दो- लाख से अधिक मामले नहीं होंगे. उन्होंने कहा- "मैं इस बात पर जोर देता हूं कि ये अनुमान हैं, भविष्यवाणियाँ नहीं. हम भविष्यवाणियाँ कर सकते अगर हम जानते हैं कि भारतीय आबादी पर वायरस का बरताव कैसा है |
22 दिसंबर 2021 को दैनिक भास्कर डॉट कॉम पर प्रकाशित:तीसरी
कोविड लहर का सामना कर रहा भारत, फरवरी में चरम पर होगा संक्रमण !ओमिक्रॉन
के बढ़ते मामलों के बीच, भारत में दिसंबर के मध्य से कोविड-19 की तीसरी
लहर शुरू हो गई है और यह अगले साल फरवरी में अपने चरम पर पहुंच सकती
है।आईआईटी हैदराबाद के प्रोफेसर एम. विद्यासागर और आईआईटी कानपुर के मणींद्र अग्रवाल के अनुसार, दैनिक तौर पर मामले बढ़ने की उम्मीद है,गणित और
सांख्यिकी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर, सुभरा शंकर धर ने पेपर में लिखा है,
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत में कोविड-19 की तीसरी लहर दिसंबर
2021 के मध्य में शुरू होगी और मामले फरवरी 2022 की शुरुआत में चरम पर
होंगे।यह अनुमान आईआईटी हैदराबाद और कानपुर की एक संयुक्त टीम के नेतृत्व
में एक अलग अध्ययन सूत्र मॉडल पर आधारित है |
25दिसंबर 2021 को इंडिया डॉट कॉम पर प्रकाशित:आइआइटी
कानपुर की एक रिसर्च टीम ने बताया है कि 3 फरवरी 2022 को कोरोना की तीसरी
लहर आएगी. इस बीच डॉक्टरों ने दी चेतावनी है कि अगर अभी ओमिक्रॉन को नहीं
रोका तो आने वाले दिनों में फिर मचेगी तबाही.!शोधकर्ताओं
ने’ गॉजियन मिक्सचर मॉडल नाम के एक स्टेटिस्टिकल टूल का इस्तेमाल किया है.
इसकी स्टडी में बताया गया है कि कोरोना की भारत में प्रारंभिक अवलोकन तिथि 30 जनवरी 2020 है जब यहां कोविड-19 का पहला
आधिकारिक मामला सामने आया था. इसलिए 15 दिसंबर 2021 से एक बार फिर कोरोना
के केस फिर से बढ़ना शुरू हो रहे हैं और तीसरी लहर का पीक 3 फरवरी 2022 दिन
गुरुवार को हो सकता है|
8 जनवरी 2022 को नवभारत में प्रकाशित :अमेरिकी फर्म नोमूरा (Nomura) ने भारत में कोरोना की तीसरी लहर के दौरान
रोजाना 30 लाख केस दर्ज होने का डराने वाला अनुमान जताया है। वहीं अमेरिका
के एक हेल्थ एक्सपर्ट ने अपनी रिसर्च में कहा है कि भारत में कोरोना की
मौजूदा लहर का पीक अगले महीने यानी फरवरी में आएगा, उस दौरान देश में
रोजाना 5 लाख केस आएंगे। जबकि भारतीय विज्ञान संस्थान ने रोजाना 10 लाख केस
आने का अनुमान जताया है। और आईआईटी कानपुर की स्टडी है कि जनवरी में ही
पीक आ जाएगा और हर दिन करीब 4-8 लाख केस आएंगे।फायनेंशियल सर्विसिज फर्म नोमूरा ने शुक्रवार को एक नोट में भारत में
ओमीक्रोन के चलते तीसरी लहर से जुड़े अनुमान जारी किए। नोमूरा के मुताबिक,
अगर भारत में ओमीक्रोन अमेरिका की तरह फैलता है तो पीक के दौरान डेली 30
लाख केस सामने आ सकते हैं। अपनी चेतावनी में फर्म ने कहा कि ओमीक्रोन की
वजह से भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा सकती है।अगर भारत में ओमीक्रोन संक्रमण दक्षिण अफ्रीका के रास्ते पर चला तो डेली
7,40,000 मामले आने का अनुमान लगाया गया है। वाशिंगटन स्थित इंस्टीट्यूट
फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इव्योलूशन के डायरेक्टर डॉ क्रिस्टोफर मुर्रे ने
कहा है कि, "भारत ओमीक्रोन वेव में प्रवेश कर रहा है, जैसा कि दुनिया के कई
देश कर रहे हैं, और हमें अनुमान है कि जब इसका पीक आएगा तो पिछले साल
डेल्टा वेरिएंट के मुकाबले इसके ज्यादा केस आएंगे।"भारतीय विज्ञान संस्थान और भारतीय सांख्यिकी संस्थान बेंगलुरु के
वैज्ञानिकों ने कहा है कि कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले जनवरी
के तीसरे और चौथे हफ्ते में सबसे अधिक होंगे और फिर मार्च की शुरूआत
होते-होते कम होने लगेंगे। इस संस्था ने कहा है कि रोजाना 3 लाख, 6 लाख या
फिर 10 लाख तक मामले सामने आ सकते हैं।भारत में इस लहर की पीक कब आएगी इसे लेकर IIT कानपुर ने भी एक स्टडी की है।
कानपुर IIT के प्रोफेसर डॉक्टर मनिंद्र अग्रवाल ने कहा है कि अनुमान के
अनुसार जनवरी के आखिरी सप्ताह या फिर फरवरी के शुरुआत में तीसरी लहर का पीक
हो सकता है।
https://navbharattimes.indiatimes.com/video/news/opinions-of-world-experts-on-the-peak-of-coronavirus-third-wave/videoshow/88779391.cms कोरोना महामारी की चौथी लहर :
27 फरवरी 2022 को हिंदुस्तान पर प्रकाशित: इससे पहले आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत में कोविड की चौथी लहर 22 जून के आस पास आएगी जो 24 अक्टूबर तक चलेगी |
28 फरवरी 2022 को दैनिक जागरण में प्रकाशित:भारतीय
प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) कानपुर के गणित और सांख्यिकीय विभाग के शोधकर्ताओं
ने गासियन वितरण प्रणाली के आधार पर आंकलन करके चौथी लहर आने का
पूर्वानुमान बताया है। डा.
शलभ के मुताबिक सांख्यिकीय गणना के आधार पर सामने आया है कि भारत में
कोविड 19 की चौथी लहर 22 जून 2022 से शुरू होने के आसार हैं। यही नहीं चौथी लहर 23 अगस्त को अपने
चरम पर पहुंच सकती है और 24 अक्टूबर को समाप्त हो सकती है।
15 अप्रैल 2022 को आजतक में प्रकाशित:जून में आएगी कोरोना की चौथी लहर! कानपुर IIT ने किया था दावा, नए वैरिएंट XE ने बढ़ाया डर!IIT
कानपुर के गणित और सांख्यिकी विभाग के सबरा प्रसाद राजेश भाई, सुभरा शंकर
धर और शलभ के नेतृत्व में यह स्टडी की गई इस स्टडी से पता चलता है कि चौथी
लहरचौथी लहर का पता लगाने के लिए सांख्यिकीय मॉडल का उपयोग किया गया था,
जिसमें पाया गया कि संभावित नई लहर 4 महीने तक चलेगी !
16 अप्रैल 2022 को नवभारत में प्रकाशित:IIT कानपुर के प्रफेसर राजेश रंजन ने अपने SIR मॉडल के आधार पर दावा किया है कि देश में चौथी लहर आने की संभावना नहीं है।आईआईटी
कानपुर के प्रोफेसर ने कहा है कि भारत में कोरोना की चौथी लहर आने की
संभावना नहीं है। SIR मॉडल के आधार पर IIT प्रोफेसर राजेश रंजन ने यह जरूर
कहा कि स्थानीय स्तर पर केस बढ़ सकते हैं। जहाँ भी ऐसा होगा, वहाँ कुछ
दिनों तक केस बढ़ेंगे। इसके बाद गिरावट शुरू हो जाएगी। इधर, बायोमेडिकल वैज्ञानिक डॉ. गगनदीप कांग ने कहा,
‘यह पता नहीं चला है कि किस वेरिएंट की वजह से केसों में उछाल है।
आईआईटी कानपुर के प्रो. मणींद्र अग्रवाल के वक्तव्य :
26 अप्रैल 2021 को ABP न्यूज पर प्रकाशित : 14 से 18 मई के बीच आएगा कोरोना का पीक, 48 लाख हो सकते हैं एक्टिव केस !आईआईटी कानपुर के मणींद्र अग्रवाल ने रविवार
को अपने ट्वीट में बताया कि एक्टिव मामलों की पीक टाइमिंग 14-18 मई और नए
मामलों के लिए 4-8 मई होगी. पीक टाइमिंग में एक्टिव केस 38-48 लाख होंगे
जबकि नए मामले 3.4-4.4 लाख होंगे. इन्हीं मणींद्र अग्रवाल ने 1
अप्रैल को इस मॉडल में 15-20 अप्रैल के बीच एक्टिव केस के पीक का अनुमान
लगाया था जिसमें एक्टिव केस की संख्या 10 लाख होने की संभावना थी. यह
आंकाड़ा पिछले साल सितंबर के पीक के बराबर था. हालाकि इन आंकड़ों को बाद
में पिछले हफ्ते संशोधित किया गया था जिसमें 33-35 लाख एक्टिव केस के साथ
11-15 मई के बीच पीक पर पहुँचने संभावना का अनुमान लगाया गया था. पीक
टाइमिंग और संख्या में बदलाव का पैरामीटर्स का बदलना बताया है.https://www.abplive.com/news/india/experts-claim-peak-of-corona-will-come-14-to-18-may-there-may-be-48-lakh-active-cases-1905897
8
मई 2021को जी न्यूज पर प्रकाशित:प्रद्मश्री से नवाजे जा चुके IIT
कानपुर के प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने तीसरी लहर अक्टूबर 2021 में आने की भविष्य वाणी की है।
19 जुलाई 2021 को वेबदुनियाँ पर प्रकाशित: IIT
कानपुर के प्रो. माणिंद्र अग्रवाल ने तीसरी लहर अक्टूबर -नवंबर 2021 में आने की बात कही है । इसका प्रभाव दूसरी लहर से कम होगा |
2-अगस्त-2021 को आजतक पर प्रकाशित:तीसरी लहर भारत में कोरोना की तीसरी लहर इसी महीने यानी अगस्त में ही आ
सकती है. वहीं अक्टूबर में तीसरी लहर चरम पर होगी ,कोरोना को लेकर यह ताजा भविष्यवाणी शोधकर्ताओं ने गणित के मॉडल के आधार पर की है. इसमें आईआईटी हैदराबाद और कानपुर के मधुकुमल्ली विद्यासागर और मणींद्र अग्रवाल शामिल थे |
23
अगस्त 2021 को न्यूज नेशन पर प्रकाशित:नहीं आएगी Corona की तीसरी लहर, अक्टूबर तक कई राज्य कोरोना मुक्त
हो जाएँगे | कानपुर आईआईटी के वरिष्ठ वैज्ञानिक और पद्मश्री पुरस्कार विजेता प्रो
मणींद्र अग्रवाल ने दावाकिया
है कि बच्चों के लिए घातक करार दी जा रही कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की
अब आशंका नहीं के बराबर है. इसके लिए वह तेज गति से हो रहे टीकाकरण को
जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. तीसरी लहर की आशंका को निर्मूल साबित करता यह दावा
प्रो अग्रवाल के गणितीय मॉडल पर आधारित है |
30अगस्त2021को प्रभात खबर में प्रकाशित :आईआईटी-कानपुर के वैज्ञानिक मानिंद्र अग्रवाल का. कहना है भारत में कोरोना वायरस की तीसरी लहर अक्टूबर अंत या नवंबर पहले
सप्ताह तक तीसरी लहर पीक पर पहुँचने की संभावना जताई है। वायरस का अगर कोई नया वैरिएंट नहीं आया तो इसकी तीव्रता खतरनाक नहीं होगी.
8 सितंबर 2021 को अमरउजाला में प्रकाशित :आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल का कहना है कि अब यदि कोरोना
का कोई नया वेरिएंट नहीं आया, तो देश में तीसरी लहर नहीं आएगी। उन्होंने
कहा कि अगर डेल्टा वेरिएंट ही रहा और कोई नया वेरिएंट नहीं आया तो यह मान
लेना चाहिए कि हमने कोरोना के खिलाफ यह लड़ाई जीत ली है।https://www.amarujala.com/india-news/corona-virus-take-care-know-whether-the-danger-of-third-wave-of-infection-is-averted-or-not?pageId=1
4 दिसंबर 2021को अमरउजाला में प्रकाशित :आईआईटी के प्रोफेसर मणींद्र का दावा: आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर
मणीन्द्र अग्रवाल ने अपनी स्टडी के आधार पर दावा किया है कि तीसरी लहर
जनवरी में शुरू हो जाएगी। फरवरी में इसका पीक रहेगा!जिस समय यह तीसरी लहर पीक पर होगी उस समय रोजाना एक लाख से डेढ़ लाख के बीच संक्रमित मरीजों के संभावना देखने को मिल रही है।
22 दिसंबर 2021 को दैनिक भास्कर में प्रकाशित: तीसरी कोविड लहर का सामना कर रहा भारत, फरवरी में चरम पर होगा संक्रमण !ओमिक्रॉन
के बढ़ते मामलों के बीच, भारत में दिसंबर के मध्य से कोविड-19 की तीसरी
लहर शुरू हो गई है और यह अगले साल फरवरी में अपने चरम पर पहुंच सकती है।आईआईटी हैदराबाद के प्रोफेसर एम. विद्यासागर और आईआईटी कानपुर के मणींद्र अग्रवाल के अनुसार, दैनिक तौर पर मामले बढ़ने की उम्मीद है,गणित
और सांख्यिकी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर, सुभरा शंकर धर ने पेपर में लिखा
है, रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत में कोविड-19 की तीसरी लहर
दिसंबर 2021 के मध्य में शुरू होगी और मामले फरवरी 2022 की शुरुआत में चरम
पर होंगे।यह अनुमान आईआईटी हैदराबाद और कानपुर की एक संयुक्त टीम के नेतृत्व में एक अलग अध्ययन सूत्र मॉडल पर आधारित है |
1 जनवरी 2022 को न्यूज -18 में प्रकाशित :Omicron को लेकर IIT कानपुर के प्रोफेसर का दावा- फरवरी में पीक पर होगी कोरोना की तीसरीलहर, आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर ने क्यों किया ये दावा ! उन्होंने दावा किया है कि फरवरी में ओमिक्रोन का पीक होगा, लेकिन मरीजों की संख्या न तो अधिक होगी और न ही मरीजों को हॉस्पिटल में भर्ती होने की नौबत आएगी। उसके बाद फरवरी के बाद ओमिक्रोन की लहर धीर-धीरे कम होने लगेगी।https://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/coronavirus-peak-could-be-in-february-iit-kanpur-professor-claims-on-omicron-variant-has-a-good-news-3930089.html 3 जनवरी 22 को टीवी-9 में प्रकाशित :आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक मणींद्र अग्रवाल का दावा- अप्रैल तक ख़त्म हो जाएगी तीसरी लहर,
चुनावी रैलियों को लेकर दी चेतावनी!दूसरी की तरह घातक नहीं होगी और ये
अप्रैल तक ख़त्म हो जाएगी. हालांकि
उन्होंने चुनावी रैलियों को लेकर चिंता जाहिर की है और कहा है कि ये
संक्रमण को तेजी से फैलाने में मददगार साबित हो सकती हैं.यदि रैलियां होती हैं, तो संक्रमण समय से पहले गति पकड़ सकता है। मणींद्र अग्रवाल
ने कहा कि इन रैलियों में अक्सर कोविड गाइडलाइंस का पालन नहीं होता नज़र आता
जो कि चिंता की बात है |(इसमें दोनों बातें कह दी गई हैं )
7
जनवरी 2022 को आजतक में प्रकाशित :डॉक्टर मनिंद्र अग्रवाल ने कहा है कि दिल्ली की स्थिति बहुत
ज्यादा अच्छी नहीं है लेकिन सुधार हो रहा है. उन्होंने कहा कि दिल्ली में
15 जनवरी के आसपास तीसरी लहर का पीक हो सकता है. इस दौरान 35 से 70 हजार केस रोजाना सामने आएँगे !प्रोफेसर अग्रवाल ने बताया कि साउथ अफ्रीका के डेटा पर आधारित हमारे पहले के अनुमान और इस अनुमान में अंतर है. उन्होंने कहा कि साउथ अफ्रीका का डेटा भारत से काफी अलग है. समय के साथ हम अनुमानों को अधिक सटीक बनाएँगे. उन्होंने कहा कि भारत के लिए भविष्यवाणी करना अधिक कठिन है. हमारा अनुमान है कि जनवरी के आखिरी सप्ताह या फिर फरवरी के शुरुआत में तीसरी लहर का पीक हो सकता है. इस दौरान 4 से 8 लाख केस प्रतिदिनआएँगे |
10 जनवरी 2022को नवभारत में प्रकाशित :कोरोना थर्ड वेव पर भविष्यवाणी!भारत में पीक कब आएगा ?IIT कानपुर के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल का कहना है कि पूरे
भारत के लिए फिलहाल डेटा नहीं है लेकिन हम अनुमान लगा रहे हैं कि इस महीने
के आखिर या अगले महीने की शुरुआत तक पीक आ सकता है। उन्होंने कहा कि इस
समय पैरामीटर वैल्यूज लगातार बदल रहे हैं, ऐसे में सटीक रूप से नहीं कहा जा
सकता !
10 जनवरी 2022 को ABP में प्रकाशित : मणींद्र अग्रवाल की माने तो उत्तर प्रदेश में जिस तरह से केस बढ़
रहे है वो आने वाले कुछ दिनों में स्थिति को और खतरनाक बना सकते हैं.
ओमिक्रोन बहुत तेजी से खतरनाक हो रहा है | जिस तरह से केस बढ़ रहे हैं, अनुमान के मुताबिक देश में पीक के वक्त
प्रतिदिन 8 से 9 लाख केस मिलने की संभावना है| जिन लोगों ने वैक्सीन लगवा भी
ली है उन्हें भी यह संक्रमित कर रहा है. ऐसे में लोगों को सावधानी और
सतर्कता बरतनी होगी. प्रो मणींद्र अग्रवाल के मुताबिक दिल्ली और मुंबई में
पीक 15 से 16 जनवरी तक पहुँचने की संभावना है |
13 जनवरी 2022 को पंजाब केसरी में प्रकाशित : प्रोफेसर मणींद्र की माने तो फरवरी में अपने चरम पर होगी कोरोना की तीसरी लहर, एक दिन में आ सकते हैं करीब आठ लाख मामले !
16 जनवरी 2022 को जी न्यूज में प्रकाशित :प्रोफेसर मणीन्द्र अग्रवाल का
दावा है कि मुंबई और दिल्ली में कोरोना पीक पर है. जनवरी के अंतिम दिन तक
यह पीक जारी रहेगा. फिर धीरे-धीरे कोरोना केस कम होने लगेंगे. मुंबई में 15
जनवरी के बाद और दिल्ली में अगले सप्ताह से कोविड संक्रमण के केस घटने
लगेंगे.IIT कानपुर के प्रोफेसर मणीन्द्र अग्रवाल ने गणितीय मॉडल के आधार पर
बताया है कि कोरोना अभी एक महीने और कहर बरपाएगा. जनवरी के आखिरी सप्ताह
में कोरोना पीक पर होगा. 15 फरवरी से नए केस की संख्या घटने लगेगी.
उन्होंने यह भी दावा किया है कि मार्च तक तीसरी लहर खत्म हो जाएगी |
17 जनवरी 2022 को दैनिक जागरण में प्रकाशित :कोरोना की तीसरी लहर दो दिन बाद 19 जनवरी को ही चरम पर
होगी। इसके साथ ही देश में 23 जनवरी को यह लहर चरम पर हो सकती है। इसके कुछ
दिनों में ही संक्रमण की रफ्तार तेजी से घटनी भी शुरू हो जाएगी और मार्च
में खत्म हो सकती है।इसके तहत उत्तर प्रदेश में कोरोना की तीसरी लहर दो दिन बाद 19 जनवरी को ही
चरम पर होगी। इसके साथ ही देश में 23 जनवरी को यह लहर चरम पर हो सकती है।
21जनवरी 2022 को नवभारत में प्रकाशित :23 जनवरी से पीक पर होगा कोरोना, आईआईटी प्रफेसर पद्मश्री मणींद्र अग्रवाल
ने गणितीय मॉडल सूत्र के आधार पर बताया है कि कोरोना की तीसरी लहर 23 जनवरी
से पीक पर होगी। इसका असर देशभर में देखने को मिलेगा। सटीक भविष्यवाणी तो
नहीं की जा सकती है। लेकिन आकड़ों के आधार पर अनुमान है कि 15 फरवरी के बाद
कोरोना के 15 से 20 हजार केस आएंगे। वहीं होली तक तीसरी लहर से निजात मिल
सकती है। https://navbharattimes.indiatimes.com/state/uttar-pradesh/ballia/dengue-is-only-on-tv-said-up-health-minister/videoshow/95325128.cms
22 जनवरी 2022 को ABP न्यूज पर प्रकाशित: कोरोना के केस बढ़ रहे हैं लेकिन ये मुसीबत जल्द खत्म होने के आसार हैं.
कोरोना की तीसरी लहर में सबसे ज्यादा केस कल आने का दावा किया गया है. यानी
इसके बाद कोरोना केसों में कमी आनी शुरू हो जाएगी. पहले ये अनुमान फरवरी
के लिए था. सवाल है कि क्या अनुमान से भी तेजी से फैली है कोरोना की तीसरी
लहर?प्रोफेसर मणींद्र ने फरवरी में कोरोना का पीक आने का दावा किया था. लेकिन
तेजी से फैलते कोरोना के बाद उन्हें अपनी पिछली भविष्यवाणी में सुधार करना
पड़ा. पद्मश्री से सम्मानित प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल गणितीय मॉडल के आधार
पर भविष्यवाणी करते हैं. अगर ये बात सच साबित होती है तो ये देश के लिए गुड
न्यूज साबित होगी. बता दें कि पूरे देश में तीसरी लहर के दौरान 21 जनवरी
को रिकार्ड 3.47 लाख नए कोरोना के मामले आए थे. हालांकि 22 जनवरी को ये आँकड़ा घटकर 3.35 लाख ही रहा. लेकिन प्रोफेसर की बातों को कोरोना की
वर्तमान स्थिति को देखते हुए काफी अहम माना जा रहा है |
29 जनवरी 2022 को अमर उजाला में प्रकाशित : 25 फरवरी के बाद देश में संक्रमित दस हजार से कम बचेंगे !
02 अप्रैल 2022 को जनमत न्यूज में प्रकाशित: आईआईटी कानपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका दावा है कि अगर चौथी लहर आती है तो वह भी तीसरी लहर की तरह ही होगी यानि कम समय के लिए और कम घातक होगी। इस दौरान सिर्फ सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि अभी कोरोना की चौथी लहर कब आएगी, इस बारे में कुछ कहना मुश्किल है। हालांकि जब तक नए वेरिएंट का एक केस भी नहीं आता तब तक चौथी लहर पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता |
13अप्रैल 2022 को प्रभात खबर में प्रकाशित:आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर का दावा, कोरोना की चौथी लहर होगी बेहद कमजोर है | अगर म्यूटेंट में बदलाव होता है और कोई नया वायरस आता है, उस वक्त क्या स्थिति रहती है, इस पर अभी टिप्पणी नहीं की जा सकती है |
18 अप्रैल 2022 को जी न्यूज में प्रकाशित:आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मणीन्द्र अग्रवाल ने
चौथी लहर को लेकर एक दावा किया है. कि चौथी लहर की आशंका
बहुत कम है. अगर चौथी लहर आई भी, तो यह घातक नहीं होगी |
19
अप्रैल 2022 को आजतक में प्रकाशित : प्रो मणींद्र अग्रवाल गणितीय सूत्र मॉडल के आधार पर भविष्यवाणी
करते हैं. उन्होंने आजतक से बातचीत में कहा कि कोरोना की चौथी लहर आने की
संभावना कम है |
10 मई 22 को न्यूज 18 पर प्रकाशित :प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल ने नई स्टडी के बाद दावा किया है कि बहुत मुमकिन है कि भारत को चौथी लहर देखनी ही न पड़े |
23 जून 2022 को दैनिक जागरण में प्रकाशित : IIT कानपुर के प्रोफेसर का दावा- कोरोना केस बढ़ेंगे !कोरोना के बढ़ते केसों ने लोगों के माथे पर तनाव की लकीरें खींच दी हैं।
आईआईटी प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने अपने गणितीय सूत्र मॉडल से भी यह कहा है
कि कोरोना संक्रमण की रफ्तार जुलाई में बढ़ेगी। देश में 22 से25 हजार केस
रोजाना आ सकते हैं। यह केस अधिकतर दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और
केरल राज्यों में बढ़ेंगे।
25 जून 2022 को दैनिक जागरण में प्रकाशित: कोरोना महामारी की चौथी लहर पर आई आई टी कानपुर के दो वैज्ञानिकों के अलग अलग वक्तव्य !आईआईटी प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने चौथी लहर की आशंका से इनकार किया है तो वहीं दूसरी ओर
प्रोफेसर सुभ्रा शंकर धर कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले चौथी लहर आने का
संकेत दे रहे हैं।चौथी लहराने के संकेत मानते हुए प्रोफ़ेसर का कहना है हालांकि सही आकलन एक सप्ताह बाद संक्रमण के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा।
चौथी लहर के अनुमान का खंडन
05 मार्च 2022 को इंडिया टीवी में प्रकाशित: जून में कोरोना की चौथी लहर आएगी? जानिए विशेषज्ञों ने अध्ययन में क्यों उठाए सवाल !महामारी
विशेषज्ञ और वाशिंटन और नयी दिल्ली स्थित सेंटर फॉर डीसीज डायनेमिक्स,
इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी के निदेशक रमणन लक्ष्मीनारायण का रुख है कि संभव है
कि नई छोटी लहरें आ सकती हैं कि लेकिन आईआईटी कानपुर का पूर्वानुमान स्पष्ट
नहीं है।अमेरिका
के मिशिगन विश्वविद्यालय में वैश्विक स्वास्थ्य के प्रोफेसर मुखर्जी ने
‘पीटीआई-भाषा’ से कहा,‘‘मैं पूर्वानुमान पर विश्वास नहीं करता। मेरे अनुभव
के मुताबिक पूर्वानुमान मॉडल अल्पकालिक यानी अगले दो-चार हफ्ते के
पूर्वानुमान के लिए अच्छा है। लंबे समय के लिए यह भरोसेमंद नहीं है। क्या
कोई दिवाली के समय ओमीक्रोन का पूर्वानुमान लगा सकता था? हमें अतीत के आधार
पर ज्ञान के प्रति कुछ विनम्रता रखनी चाहिए।’’
8 मार्च 2022 को वेव दुनियाँ में प्रकाशित :चौथी लहर के पूर्वानुमान पर विशेषज्ञों ने उठाए सवाल !यह मॉडल अल्पकाल के लिए ही अच्छा है |
8
मार्च 2022को टीवी -9 पर प्रकाशित :अमेरिकी विश्व विद्यालय के प्रोफेसर भ्रमर मुखर्जी ने उठाए
सवाल !कहा की आई आई टी कानपुर द्वारालगाया गया पूर्वानुमान आंकड़ा ज्योतिष
है।
20मार्च 2022को पत्रिका डॉट कॉम पर प्रकाशित :कोरोना की चौथी लहर की भविष्यवाणी करने के लिए कोई वैज्ञानिक, महामारी
विज्ञान कारण नहीं है, लेकिन कोई भी भविष्यवाणी नहीं कर सकता कि ऐसा नहीं
होगा। मैं कह सकता हूं कि संभावना बहुत कम है।” ये बातें जानेमाने
विषाणु विज्ञानी (वायरोलॉजिस्ट) और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद
(आईसीएमआर) के विषाणु विज्ञान में आधुनिक अनुसंधान केंद्र के पूर्व निदेशक डॉ टी जैकब जॉन ने कही हैं | उन्होंने कहा, “मुझे समझ में नहीं आता कि मनुष्य में डर को कैसे और किन
उद्देश्यों के लिए पैदा करने की जरूरत है। इसलिए मैं गणितीय मॉडलिंग के
आधार पर एक कोविड-19 लहर की भविष्यवाणी करने में विश्वास नहीं करता।मैं चौथी लहर की भविष्यवाणी से बिल्कुल सहमत नहीं हूं, लेकिन मैं स्पष्ट
रूप से यह नहीं कह रहा हूं कि चौथी लहर की संभावना नहीं है, इसके लिए हमें
इंतज़ार करना होगा और देखना होगा।”
7 अप्रैल 2022 को दैनिकजागरण में प्रकाशित :गणित और विज्ञान के आईने में कोरोना की चौथी लहर को लेकर बेहद भ्रामक सूचनाएं आ रही सामने !गणित माडल से भविष्यवाणी करने वालों का कहना है कि कोरोना की चौथी लहर कभी भी आ सकती है?चौथी लहर के बारे में विभिन्न स्रोतों से मिलने वाली सूचनाएं तीसरी लहर से
पहले आने वाली सूचनाओं जैसी ही विरोधाभाषी हैं। इस कारण भी इनसे भ्रम पैदा
हो रहा है। इस मामले में विज्ञान और गणित तक में विभेद है। आइआइटी कानपुर
के प्रोफेसरों का गणितीय माडल कहता है कि देश में कोरोना की चौथी लहर अवश्य
आएगी। दो महीने बाद जून में इसका असर दिख सकता है, तीन महीने बाद पीक आएगा
तथा सितंबर अंत तक यह तेजी से सिमट जाएगी।दूसरी तरफ देश के कई विषाणु विज्ञानी यह दावा कर चुके हैं कि चौथी लहर की कोई आशंका नहीं है।राजधानी दिल्ली के एक वरिष्ठ महामारी विज्ञानी का विचार है कि वायरस में
हजार से अधिक उत्परिवर्तन हो चुके हैं और आगे भी होंगे। यह तय है कि यह
म्यूटेशन चौथी लहर का कारण बनेगा, एक और विशेषज्ञ डा. चंद्रकांत लहरिया के
अनुसार ओमिक्रान का नया वेरिएंट कोरोना की चौथी लहर लाएगा अवश्य।कुछ का कहना है कि इतनी आश्वस्ति से कुछ कहना कठिन है। हमें कुछ और समय
इंतजार करना चाहिए, आंकड़े बताएंगे कि नया वेरिएंट लहर पैदा कर पाने में
सक्षम है कि नहीं,
15 अप्रैल 2022 को आजतक पर प्रकाशित :वैज्ञानिक
मूल्य पर जांचना जरूरी: नीति आयोग !इस साल जुलाई में COVID-19 की चौथी लहर
की भविष्यवाणी करने वाले IIT-कानपुर की स्टडी पर नीति आयोग ने कहा था !वह इस तरह की स्टडी को बड़े सम्मान के साथ देखती है, लेकिन अभी यह जांचना बाकी है कि इस स्पेशल रिपोर्ट का वैज्ञानिक मूल्य है या नहीं.नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वी के पॉल ने कहा था, IIT-कानपुर की स्टडी विख्यात लोगों द्वारा दिया गया मूल्यवान इनपुट है. लहर आने का सारा अनुमान डेटा और आंकड़ों पर आधारित है और हमने समय-समय पर अलग-अलग अनुमान भी देखे हैं. हमने कई बार यह अनुमान इतने अलग देखे हैं कि केवल अनुमानों के आधार पर निर्णय लेना समाज के लिए असुरक्षित होगा. सरकार इन अनुमानों को उचित सम्मान के साथ देखती है क्योंकि ये प्रतिष्ठित लोगों द्वारा की हुई रिसर्च है |
2 मई 2022 को दैनिक जागरण में प्रकाशित :कोरोना
से जुड़ी भविष्यवाणी पर लगे रोक : सतीश महाना!कोरोना महामारी को लेकर
तरह-तरह की भविष्यवाणी की जा रही हैं। कोरोना बीमारी है, जबकि डाक्टरों से
इतर तमाम विशेषज्ञ हो गए हैं। कई ज्योतिष के जानकार तक इसे लेकर तरह-तरह के
दावे कर रहे हैं। हद तो यह है कि कोरोना की चौथी व पांचवीं लहर आने तक के
दावे अभी से किए जा रहे हैं। कोरोना को लेकर इस तरह की भविष्यवाणी पर पूरी
तरह से रोक लगनी चाहिए। ये बातें रविवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए)
के आठ दिवसीय कालेज आफ जनरल प्रैक्टिसनर्स (सीजीपी) के 39वें रिफ्रेशन
कोर्स का उद्घाटन करते हुए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहीं।
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27 मई 2022 को जी न्यूज पर प्रकाशित :- 2020 में कोरोना से ही नहीं, इस वजह से भी लाखों ने गंवाई जान; चौंका देगी ये रिपोर्ट !2020 में सड़क हादसे - 3 लाख 66 हजार 138, 2019 में सड़क हादसे - 4 लाख 49 हजार 2020 में सड़क हादसों में मौंतों की संख्या - 1 लाख 31 हजार 714,2019 में सड़क हादसों में मौंतों की संख्या - 1 लाख 51 हजार 113
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