मौसम संबंधी प्राकृतिक घटनाओं का कोरोना महामारी से संबंध था या नहीं !1008 Prachin
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मौसम में बड़े बदलाव हो रहे हैं -
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के द्वारा कहा जा रहा है कि 40 साल के डेटा की छानबीन की कई. जिससे पता लगा है कि मॉनसून के आने और उसके जाने की तारीख में हुए बदलाव हुए हैं | मॉनसून की विदाई अब देरी से हो रही है. आदि आदि !मॉनसून की वापसी पहले 1 सितंबर से शुरू हो जाती थी, जो 17 सितंबर के करीब विदा होता है. लेकिन अब इसमें देरी देखी जा रही है. इस बार की बात करें तो मॉनसून की विदाई 6 अक्टूबर को कही गई और अब 26 अक्टूबर तक देश से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के पूरी तरह विदा होने के संकेत मिले हैं.|
22 जुलाई 21 -एक साथ 40 देशों में मौसम का प्रचंड रूप देखकर वैज्ञानिकों को जलवायु परिवर्तन का डर सताने लगा है | एशिया, यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका, चीन और रूस तक मौसम का प्रचंड रूप देखा जा सकता है. जो लोग यह मान रहे थे कि जलवायु परिवर्तन भविष्य का खतरा है, वो अब दिन पर दिन बदलते मौसम को देखकर हैरान हैं.दुनिया के कई देशों में पिछले कुछ हफ्तों में मौसम के बदलते मिजाज को देखा गया है. यूरोप से लेकर एशिया और नॉर्थ अमेरिका से लेकर रूस तक कहीं बाढ़ है, कहीं गर्म हवाएँ हैं तो कहीं पर सूखे की स्थिति है. यूरोप के 40 देश, नॉर्थ अमेरिका, एशिया और अफ्रीका में कहीं बाढ़, कहीं तूफान, कहीं हीट वेव, कहीं जंगलों में लगी आग तो कहीं सूखे की स्थिति है. रूस, चीन, अमेरिका और न्यूजीलैंड में लोग गर्मी, बाढ़ और जंगलों में लगी आग से परेशान हैं |पश्चिमी यूरोप में भारी बारिश हो रही है कहा जा रहा है कि एक सदी में पहली बार ऐसी बाढ़ आई है. बेल्जियम, जर्मनी, लक्जमबर्ग और नीदरलैंड्स में14और15जुलाई को इतनी अधिक बारिश हो गई है जितनी दो माह में होती है. नॉर्थ यूरोप में गर्मी से हालात बिगड़ते जा रहे हैं. फिनलैंड जहां गर्मी कभी नहीं पड़ती, वहां पर लोग पसीना पोंछने को मजबूर हो रहे हैं. देश के कई हिस्सों में तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा हो गया है| रूस में साइबेरिया का तापमान इतना बढ़ गया है कि216 ये ज्यादा जंगलों में आग लगी हुई है | वहीं पश्चिमी-उत्तरी अमेरिका में अत्यधिक गर्मी ने हालात खराब कर दिए हैं | कैलिफोर्निया, उटा और पश्चिमी कनाडा में सर्वाधिक तापमान रिकॉर्ड किया गया है. कैलिफोर्निया की डेथ वैली में पिछले दिनों ट्रेम्प्रेचर 54.4 डिग्री सेंटीग्रेट तक पहुंच गया था. यह दूसरा मौका था जब इस हिस्से में इस कदर तापमान रिकॉर्ड किया गया. इसी तरह से एशिया के कई देशों जैसे कि चीन, भारत और इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों में बाढ़ की स्थिति है तो कुछ हिस्सों में बारिश का इंतजार है |
अग्नि -वायुतत्व
ऑस्ट्रेलिया में आग लगने की भयंकर घटनाएँ घटित होते देखी जाती रही हैं | जो लंबे समय तक चलती रहीं |
विशेषकर भारत वर्ष में 2016 अप्रैल मई में आग लगने की भीषण दुर्घटनाएँ : अप्रैल मई जून आदि के महीनों में गर्मी तो हर वर्ष होती है किंतु 2016 के अप्रैल मई में आधे भारत में गरमी से संबंधित अचानक अलग प्रकार की घटनाएँ घटित होने लगीं ! जमीन के अंदर का जलस्तर तेजी से नीचे जाने लगा बहुत इलाके पीने के पानी के लिए तरसने लगे | पानी की कमी के कारण ही पहली बार पानी भरकर दिल्ली से लातूर एक ट्रेन भेजी गई थी |गर्मी का असर केवल जमीन के अंदर ही नहीं था अपितु प्राकृतिक वातावरण में इतनी अधिक ज्वलन शीलता विद्यमान थी कि आग लगने की घटनाएँ बहुत अधिक घट रही थीं | यह स्थिति उत्तराखंड के जंगलों में तो 2 फरवरी 2016 से ही प्रारंभ हो गई थी जो क्रमशः धीरे धीरे बढ़ती चली जा रही थी 10 अप्रैल 2016 के बाद ऐसी घटनाओं में बहुत तेजी आ गई थी ! ऐसा होने के पीछे का कारण किसी को समझ में नहीं आ रहा था |इस वर्ष आग लगने की घटनाएँ इतनी अधिक घटित हो रही थीं इस बिषय में संबंधित वैज्ञानिक कुछ कहने की स्थिति में नहीं थे उन्हें खुद कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था | अंत में आग लगने की घटनाओं से हैरान परेशान होकर 28 अप्रैल 2016 को बिहार सरकार के राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने ग्रामीण इलाकों में सुबह नौ बजे से शाम छह बजे तक खाना न पकाने की सलाह दी थी . इतना ही नहीं अपितु इस बाबत जारी एडवाइजरी में इस दौरान पूजा करने, हवन करने, गेहूँ का भूसा और डंठल जलाने पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई थी | इस बिषय में जब वैज्ञानिकों से पूछा गया कि इसी वर्ष ऐसा क्यों हो रहा है और यदि ऐसा होना ही था तो इसका पूर्वानुमान क्यों नहीं लगाया जा सका ?तो उन्होंने कहा कि इस बिषय में हमें स्वयं ही कुछ नहीं पता है कि इस वर्ष ऐसा क्यों हुआ !ये तो रिसर्च का बिषय है इसलिए ऐसे बिषयों पर अनुसंधान की आवश्यकता है |
तापमान-
05 फरवरी 2020 :इतिहास की सबसे गर्म जनवरी रिकॉर्ड की गई ! कुल मिलाकर सर्दी के सीजन सर्दी बहुत कम हुई एवं गर्मी के सीजन में गर्मी कम हुई !
यूरोप में जनवरी का तापमान औसत से 3 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया, जबकि पूर्वोत्तर यूरोप के कई हिस्सों में औसत से 6 डिग्री सेल्सियस अधिक रिकॉर्ड किया गया !जनवरी माह का वैश्विक तापमान अपने चरम पर पहुंच गया था।विश्व मौसम विज्ञान संगठन द्वारा किये विश्लेषण के अनुसार 2019 को मानव इतिहास के दूसरा सबसे गर्म वर्ष के रूप में दर्ज किया गया था। आंकड़ों के अनुसार 2019 के वार्षिक वैश्विक तापमान में औसत (1850 से 1900 के औसत तापमान) से 1.1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो चुकी है। जबकि 2016 का नाम अभी भी रिकॉर्ड में सबसे गर्म साल के रूप में दर्ज है। आंकड़ें दिखाते हैं कि 2010 से 2019 के बीच पिछले पांच साल रिकॉर्ड के सबसे गर्म वर्ष रहे हैं।
21अप्रैल 2020कोरोना ने बदला मौसम का मिजाज़! भारत में सबसे ठंडा अप्रैल, ब्रिटेन में चल रही लू !कोरोना महामारी के बीच ब्रिटेन में गर्मी ने पिछले 361 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. वहाँ अप्रैल में भीषण गर्मी और लू चल रही है |
22 अप्रैल 2020 कोरोना, सूखा और तूफान से अमेरिका खस्ताहाल, ट्रंप पर बड़ी आफत !
14 मई 2020-सेंटर
ऑफ़ साइंस ऐंड एनवायर्नमेन्ट में जलवायु मामलों पर नज़र रखने वाले तरुण
गोपालकृष्णण ने बीबीसी को बताया कि केवल उत्तर भारत या पूर्वी भारत में ही
नहीं बल्कि दक्षिण भारत में मौसम बीते सालों की अपेक्षा इस साल अलग ही है
|
बारिश-बाढ़ और भूकंप, प्रकृति के कहर से चीन का बुरा हाल !चीन
में भारी बारिश के बाद आई बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हैं। वहीं, रविवार
को तंगशान में आए भूकंप ने लोगों को पिछले हादसे की याद दिलाकर और डरा
दिया। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 5.1 मापी गई है।
19 सितंबर 2020-जिस सितंबर में मौसम करवट लेने लगता है और जाड़े की सुगबुगाहट होने लगती है, इस बार दिल्ली वासी उमस भरी गर्मी झेलने को विवश हैं। सितंबर के मध्य में भी मई-जून जैसी तपिश झेलनी पड़ रही है।तेज धूप की चुभन और उमस पसीना पोंछने पर मजबूर कर रही है,
सूरज की रोशनी घटी है-5 मई 2020 :वैज्ञानिकों ने यह खुलासा किया है कि कोरोना के बीच पाँच गुणा तेजी से सूरज की रोशनी घटी है |
पृथ्वी तत्व -
कोरोना महामारी के समय एक डेढ़ वर्ष में केवल भारत में ही एक हजार से अधिक भूकंप आए हैं ऐसा क्यों हुआ क्या इनसे महामारी का कोई संबंध है इस संबंध को खोजना अनुसंधानों की जिम्मेदारी है | इन भूकंपों का महामारी से कोई संबंध नहीं है तो इसी समय इतने अधिक भूकंपों के आने का कारण क्या है |
1मई 2020-दिल्ली-एनसीआर
में डेढ़ महीने में 10 बार भूकंपआया | संपूर्ण भारत वर्ष में एक साल में 950 बार से अधिक बार भूकंप आए |
30 मई 2020-दिल्ली
में फिर टूटा कोरोना का रिकॉर्ड, 24 घंटे में 1163 नए केस, 18 लोगों की
मौत नई दिल्ली, 30 मई 2020, अपडेटेड 22:25 IST दिल्ली में हर रोज कोरोना का
रिकॉर्ड टूट रहा है. पिछले 24 घंटे में कोरोना के 1163 नए मामले सामने आए
हैं, जो एक दिन में सबसे ज्यादा है |
17\18जुलाई को बहुत भूकंप आए हैं उसके प्रभाव से कोरोना संक्रमितों की संख्या अचानक बढ़ जाने से कहा गया -
19 Jul 2020--भारत में शुरू हुआ कोरोना का कम्युनिटी स्प्रेड, हालात बहुत खराब : आईएमए आईएमए
का कहना है कि भारत में कोरोना का कम्युनिटी स्प्रेड शुरू हो चुका है,
जिसके मतलब है कि आगे हालात और ज्यादा खराब हो सकते हैं।एएनआई से बात करते
हुए आईएमए (हॉस्पिटल बोर्ड ऑफ इंडिया) के अध्यक्ष डॉ वीके मोंगा ने कहा,
'यह अब घातक रफ्तार से बढ़ रहा है। हर दिन मामलों की संख्या लगभग 30,000 से
अधिक आ रही है। यह देश के लिए वास्तव में एक खराब स्थिति है। कोरोना वायरस
अब ग्रामीण क्षेत्रों में फैल रहा है, जो की एक बुरा संकेत है। इससे पता
चलता है कि देश में कोरोना का कम्यूनिटी स्प्रेड शुरू हो चुका है।
विशेष बात -पिछले एक वर्ष में 38,816 बार आ चुके हैं भूकंप- " पूरी दुनिया में
भूकंप के झटके एक नजर में- आज यानि 23 नवम्बर को पूरी दुनिया में कुल 95
स्थानों पर भूकंप आ चुके हैं। पिछले एक सप्ताह में 700 जगहों पर भूकंप आये।
पिछले एक महीने में 3105 भूकंप पूरी दुनिया में आये। पिछले एक साल में
38,816 बार धरती अलग-अलग जगहों पर हिल चुकी है। इस सप्ताह सबसे ज्यादा
तीव्रता का भूकंप इसाबेल में आया, जिसकी तीव्रता 7 थी। इस महीने
अफगानिस्तान के बडकशन में 7.5 तीव्रता का भूकंप आया।
जल में कोरोना -
19-1-2020- ऑस्ट्रेलिया मसूलधार बारिश और बाढ़ झेल रहा है।मौसम विभाग के मुताबिक यह 100 साल में सबसे अधिक होने वाली बारिश है | पूर्वी ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन और क्वींसलैंड में भारी तबाही हुई है।
सूखा वर्षा बाढ़ जैसी भयानक हिंसक घटनाएँ पिछले कुछ वर्षों से विश्व के अनेकों देशों प्रदेशों में घटित होते देखी जा रही हैं | भारत में भी असम केरल कश्मीर बिहार महाराष्ट्र आदि प्रदेशों में समय समय पर घटित होती देखी जाती रही हैं | अगस्त 2018 में केरल में भीषण बाढ़ आई ! 2020 के अप्रैल में इतनी बारिश हुई जितनी पहले कभी नहीं हुई थी। मई की बारिश ने भी चौका दिया है।गरमी की ऋतु में मई जून तक वर्षा होती रही |ऐसी बहुत सारी घटनाएँ घटित होती रही हैं |
जल में कोरोना संक्रमण :
20 अप्रैल 2020-कोरोना वायरस ने फ्रांस में
लगातार कोहराम मचा रखा है. कोरोना से निपटने के लिए यहां लगातार प्रयास किए
जा रहे हैं. इसके तहत जब शोध हो रहा था तब गैर पीने योग्य पानी में नए
कोरोना वायरस के 'माइनसक्यूल' सूक्ष्म निशान पाए गए !अब फ्रांस की राजधानी पेरिस में पानी में कोविड पाया
गया है.यहां के एक अधिकारी सेलिया ब्लाउज के मुताबिक गैर पीने योग्य
पानी में कोरोना के बेहद ही बारीक निशान मिले हैं|
16 अप्रैल 2021हवा या जमीन से ज्यादा गंगा के बहते पानी से कोरोना
संक्रमण फैलने का खतरा, वैज्ञानिकों ने एक बड़े खतरे की चेतावनी दी है |
20अप्रैल 2020-नदी
के पानी में कोरोना के लक्षण !पेरिस की सीन नदी और अवर्क नहर के पानी में
कोरोना कोरोना वायरस का संक्रमण पाया गया है!
आकाश तत्व
26 Apr 2020-वैज्ञानिकों का दावा: अपने आप ठीक हुआ ओजोन परत पर बना सबसे बड़ा छेद ! दुनिया इस समय कोविड-19 महामारी से लड़ रही है। वहीं एक अच्छी खबर यह है कि पृथ्वी के बाहरी वातावरण की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार ओजोन परत पर बना सबसे बड़ा छेद स्वत: ही ठीक हो गया है। वैज्ञानिकों ने पुष्टि है कि आर्कटिक के ऊपर बना दस लाख वर्ग किलोमीटर की परिधि वाला छेद बंद हो गया है। इसके बारे में वैज्ञानिकों को अप्रैल महीने की शुरुआत में पता चला था।
वायु तत्व -19 जून 2020 ऑस्ट्रेलिया में 100 साल का सबसे भीषण तूफान आया है |इस प्रकार के हिंसक आँधी तूफ़ान चक्रवात आदि पिछले कुछ वर्षों से विश्व के अनेकों देशों में घटित होते देखे जाते रहे हैं | विशेषरूप से भारत में भी ऐसी आपदाएँ अक्सर घटित होते देखी जाती रही हैं |
2018 के अप्रैल और मई में पूर्वोत्तर भारत के हिंसक आँधी तूफान आए | ऐसी आँधी तूफानों की घटनाएँ बार बार घटित हो रही थीं | 2 मई की रात्रि में आए तूफ़ान से काफी जन धन हानि हुई थी | इसी समय ऐसी ही कई और हिंसक घटनाएँ घटित हुईं |
वायु प्रदूषण
8 अप्रैल 2020-अधिक वायु प्रदूषण क्षेत्र में रहने वाले लोगों पर कोरोना से
मरने का अधिक खतरा: शोध!अधिक वायु प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहने से
कोविड-19 के कारण मौत होने का अधिक जोखिम है। ऐसा अमेरिका में किए गए एक
अध्ययन में दावा किया गया है। हार्वर्ड टी एच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के
शोधकर्ताओं ने कहा कि शोध में सबसे पहले लंबी अवधि तक हवा में रहने वाले
सूक्ष्म प्रदूषक कण (पीएम2.5) और अमेरिका में कोविड-19 से मौत के खतरा के
बीच के संबंध का जिक्र किया गया है।
26 अप्रैल 2020 -वायु प्रदूषण के कणों पर कोरोना वायरस का चला पता, ज्यादा
प्रदूषित इलाके में देखा गया उच्च संक्रमण !पिछले अध्ययनों से पता चला है
कि वायु प्रदूषण के कण रोगाणुओं को पनाह देते हैं और इसके जरिये बर्ड फ्लू,
खसरा और अन्य बीमारियों के संक्रमण की संभावना रहती है। वायु प्रदूषण के
कणों की संभावित भूमिका व्यापक प्रश्न से जुड़ी है कि कोरोना वायरस कैसे
फैलता है?
29 अप्रैल 2022 विशेषज्ञ कोरोना की पहली लहर के बाद ही यह दावा कर चुके हैं कि खासकर दिल्ली में कोरोना वायरस के मामले बढ़ने के पीछे यहां के वायु प्रदूषण की भी भूमिका है। इसके साथ वायु प्रदूषण ऊपर से कोरोना, जानलेवा साबित होते हैैं। जानकरों का कहना है कि दिल्ली में इस साल अप्रैल का औसतन प्रदूषण मार्च की तुलना में 19 प्रतिश ज्यादा और फरवरी से 11 प्रतिशत ज्यादा रहा था। स्वीडन के वैज्ञानिकों ने अध्ययन में कहा था कि 20 अप्रैल को प्रदूषण और कोरोना के लिंक पर छपी स्टडी के मुताबिक प्रदूषण स्तर बढ़ने पर कोरोना के मामले भी बढ़ने लगते हैं।
वायु प्रदूषण का खंडन :
सन 2020 के अक्टूबर नवंबर दिसंबर में वायु प्रदूषण तो बहुत बढ़ता जा रहा था किंतु कोरोना संक्रमितों की संख्या दिनोंदिन कम होती जा रही थी | फरवरी 2021 के बाद वायु प्रदूषण क्रमशः कम होता जा रहा था अप्रैल मई तक वर्षा ही होती रही थी इसके बाद भी मार्च अप्रैल 2021 में कोरोना सबसे अधिक हिंसक होता चला गया था | वायुप्रदूषण -पिछले कुछ वर्षों से निरंतर बढ़ते देखा रहा है |
विनम्र निवेदन -ऐसा यहाँ ध्यान देने लायक विशेष बात यह है कि वायु प्रदूषण बढ़ने से यदि कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ती है तो सन 2020 के अक्टूबर नवंबर दिसंबर में वायु प्रदूषण तो बहुत बढ़ता जा रहा था किंतु कोरोना संक्रमितों की संख्या दिनोंदिन कम होती जा रही थी | फरवरी 2021 के बाद वायु प्रदूषण क्रमशः कम होता जा रहा था अप्रैल मई तक वर्षा ही होती रही थी इसके बाद भी मार्च अप्रैल 2021 में कोरोना सबसे अधिक हिंसक होता चला गया था | ऐसा क्यों देखने को मिला ?
दूसरी बात वायु प्रदूषण बढ़ने से कोरोना बढ़ता है यदि ये बात विश्वास करने योग्य है तो सन 2020 के अक्टूबर नवंबर दिसंबर में वायु प्रदूषण तो बहुत बढ़ता जा रहा था किंतु कोरोना संक्रमितों की संख्या दिनों दिन कम होती चली जा रही थी ऐसा क्यों हुआ ? इसके दो ही कारण हो सकते हैं पहली बात तो वायु प्रदूषण बढ़ने से कोरोना पर कोई प्रभाव ही न पड़ता हो अर्थात कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ती ही न हो | दूसरी बात जिसे वैज्ञानिक लोग वायु प्रदूषण समझ रहे हैं वह वायु प्रदूषण हो ही न !वैज्ञानिक स्वतः स्वीकार कर रहे हैं कि पिछले कुछ वर्षों से सूरज की रोशनी पाँच गुणा तेजी से घटी है |ऐसी स्थिति में सूरज की किरणों की मंदता को हम भ्रमवश तो वायुप्रदूषण नहीं समझ रहे हैं |
प्राकृतिक घटनाओं के साथ ऐसा क्यों हो रहा है क्या इनसे महामारी का कोई संबंध है इस संबंध को खोजना अनुसंधानों की जिम्मेदारी है | यदि ऐसी प्राकृतिक घटनाओं का महामारी से कोई संबंध नहीं है तो इसी समय इतने अधिक ऐसी ऋतु विपरीत घटनाओं के घटित होने का कारण क्या है |इस संबंध को खोजने की वैज्ञानिकों की जिम्मेदारी है | इनघटनाओं के तुरंत बाद महामारी प्रारंभ हुई है इसलिए ये विशेष महत्त्व रखती हैं | इसके विषय में पूर्वानुमान लगाना तो दूर आज तक यही नहीं पता लगाया जा सका कि वायु प्रदूषण बढ़ने के लिए जिम्मेदार वास्तविक कारण क्या हैं?दीपावली के पटाखों को वायु प्रदूषण बढ़ने के लिए जिम्मेदार बताने वाले यह नहीं सोचते कि चीन में तो दीवाली नहीं मनती वहाँ क्यों बढ़ा हुआ है वायु प्रदूषण | इसके साथ ही इस बात का भी पता लगाया जाना चाहिए कि विगत कुछ वर्षों में क्रमिक रूप से बढ़ते जा रहे वायु प्रदूषण का कोरोना महामारी से कोई संबंध था या नहीं इसका भी पता लगाया जाना चाहिए |
जलवायु परिवर्तन
14 मई 2020-कोरोना वायरस: इस बार मई के महीने में भी गर्मी नहीं, क्या हैं कारण !क्या
ये जलवायु परिवर्तन है?सेंटर ऑफ़ साइंस ऐंड एनवायर्नमेन्ट में जलवायु
मामलों पर नज़र रखने वाले तरुण गोपालकृष्णण ने बीबीसी को बताया कि केवल
उत्तर भारत या पूर्वी भारत में ही नहीं बल्कि दक्षिण भारत में मौसम बीते
सालों की अपेक्षा इस साल अलग ही है.|
वैज्ञानिकों पर भड़के ट्रंप
29 दिसंबर 2017-ट्रंप
ने ग्लोबल वार्मिंग का बनाया मजाक, कहा- बर्फीली हवाओं से दिलाएगा राहत
!अमेरिका का पूर्वी क्षेत्र इन दिनों कड़ाके की सर्दी से गुजर रहा है। सर्द
हवाओं ने आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है, पर अमेरिका के
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मौके का इस्तेमाल ग्लोबल वार्मिंग पर
तंज कसने के लिए किया। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि धरती के बढ़ते
तापमान से शायद कड़ाके की सर्दी से निपटने में मदद मिल सके।
29 जनवरी 2019-ट्रंप ने 'ग्लोबल वार्मिंग' का फिर उड़ाया मजाक,!कोरोना को लेकर अपने देश के वैज्ञानिकों पर भड़के ट्रंप, कही ये बात
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मई 2020-डोनाल्ड ट्रंप ने इस हफ्ते दो बार कहा कि हमारे देश के
वैज्ञानिकों की बात बेसिर पैर की है. उनकी बातों में कोई सबूत नहीं है.|
5 मई 2020 दुनिया के प्रमुख वैज्ञानिक इस बात से सहमत हैं कि जलवायु परिवर्तन मानव-प्रेरित है और चेतावनी देता है कि तापमान में प्राकृतिक उतार-चढ़ाव मानव गतिविधि द्वारा बढ़ाए जा रहे हैं। इसे जलवायु परिवर्तन या ग्लोबल वार्मिंग के रूप में जाना जाता है। मानव गतिविधियों ने कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में वृद्धि की है, जिससे तापमान बढ़ रहा है। चरम मौसम और पिघलने वाली ध्रुवीय बर्फ संभावित प्रभावों में से हैं। पृथ्वी का औसत तापमान लगभग 15C है लेकिन अतीत में बहुत अधिक और कम रहा है।जलवायु में प्राकृतिक उतार-चढ़ाव आते हैं लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि तापमान अब कईगुना अधिक तेजी से बढ़ रहा है।
समयविज्ञान ! दो शब्द विश्व के सबसे प्राचीन गणितविज्ञान की ऐसी सक्षम विधा सनातनधर्मियों के पास है| जिसके द्वारा प्रकृति और जीवन में घटित होने वाली घटनाओं के न केवल कारणों को गणित के आधार पर समझा जाता रहा है,प्रत्युत उनके विषय में पूर्वानुमान भी लगा लिया जाता रहा है| सनातनधर्मियों को यह विज्ञान परंपरा से प्राप्त हुआ है| इसके आधार पर अभी भी समाज में घटित होने वाली घटनाओं को तो समझा जा ही सकता है | उसके साथ ही साथ समस्त प्राकृतिक वातावरण में समय समय पर होते रहने वाले परिवर्तनों को भी समझा जा सकता है और उनके विषय में महीनों वर्षों पहले पूर्वानुमान भी लगाया जा सकता है | सनातन धर्म के प्राचीन वैज्ञानिकऋषि मुनि इसीविज्ञान के द्वारा भूकंप आँधी तूफ़ान वर्षा बाढ़ चक्रवात बज्रपात जैसी घटनाओं के विषय में आगे से आगे पूर्वानुमान लगा लिया करते थे |ऐसा वर्णन सनातन धर्म के अनेकों ग्रंथों में अभी भी मिलता है |उसी प्राचीन ज्ञान विज्ञान के आधार पर मैं पिछले चार दशकों से अनुसंधान करता आ रहा हूँ | उससे आँधी तूफ़ान वर्षा बाढ़ चक्रवात जैसी घटनाओं के विषय में मेरे द...
दो शब्द वर्तमान समय में उन्नत विज्ञान के द्वारा मनुष्यजीवन की कठिनाइयों को कम करने के लिए अत्यंत प्रभावी प्रयत्न किए जा रहे हैं |अनुसंधान पूर्वक सुख सुविधाओं के लिए काफी महत्वपूर्ण संसाधन खोज लिए गए हैं, किंतु जिन मनुष्यों को सुखी करने के लिए ऐसी खोजें की गई हैं| प्राकृतिक आपदाओं या महामारियों से उन मनुष्यों को ही यदि सुरक्षित नहीं रखा जा सकेगा तो उन सुख सुविधाओं का क्या होगा | जो मनुष्यजीवन की कठिनाइयाँ कम करके उन्हें सुख सुविधा संपन्न बनाए जाने के लिए खोजी गई हैं | विगत कुछ दशकों में भारत परिश्रम तो को पड़ोसी देशों के साथ तीन युद्ध लड़ने पड़े हैं| उन तीनों युद्धों में जितने देशवासियों की मृत्यु हुई थी |उससे बहुत अधिक लोग केवल कोरोना महामारी में ही मृत्यु को प्राप्त हो गए हैं |ऐसे कई लोग जब संक्रमित हुए तब हमारी उनसे बात हुई | उस अवस्था में भी उन्हें यह विश्वास था कि अत्यंत उन्नत विज्ञान की मदद से वैज्ञानिक लोग महामारी से हमें सुरक्षित बचा लेंगे |...
महामारी के अनुसंधान में मौसम के भूमिका ! महामारी को ठीक ठीक प्रकार से समझने एवं उसका अनुमान पूर्वानुमान लगाने के लिए मौसम को ठीक ठीक प्रकार से समझना आवश्यक होता है| मौसम से अभिप्राय तापमान के बढ़ने तथा कम होने का कारण प्रभाव एवं इसके विषय में पूर्वानुमान पता होना चाहिए ! दूसरी बात वर्षा होने न होने तथा बहुत कम या बहुत अधिक होने एवं समय पर होने न होने का कारण पता होना होना चाहिए | ऐसी घटनाओं के विषय में अनुमान पूर्वानुमान आदि पता होने चाहिए ! वायु प्रदूषण बढ़ने का निश्चित कारण पता होने चाहिए एवं इसके बढ़ने और घटने के विषय में अनुमान पूर्वानुमान आदि पता होने चाहिए ! मौसमसंबंधी घटनाओं को प्रभावित करने वाले जलवायुपरिवर्तन होने के निश्चित कारण पता होने चाहिए कि ऐसा होता क्यों है और जलवायु परिवर्तन होने के विषय में अनुमान पूर्वानुमान आदि पता होने चाहिए | मौसम संबंधी घटनाओं के घटित होने का निश्...
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