दूसरी लहर

 दूसरी लहर के विषय में -

कोरोना सर्दी में ज़्यादा क़हर बरपाएगा: दुनिया जहान !कोलंबिया यूनिवर्सिटी के इनवॉयरमेंटल हेल्थ साइंसेज़ डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर मिकेला मार्टिनेज़ का जो बदलते मौसम के साथ किसी वायरस के स्वरूप में आने वाले बदलावों का वैज्ञानिक अध्ययन करती हैं.मिकेला मार्टिनेज़ का मानना है कि कोरोना भी सर्दी में बढ़ेगा."कोरोना वायरस 

18अक्टूबर 2020 को डाउन टू अर्थ में प्रकाशित: भारत में इस सर्दी में कोरोना वायरस की दूसरी लहर से इनकार नहीं कर सकते!ऐसा हो सकता है और हम अब भी वायरस के बारे में सीख रहे हैं-डॉ.वी.के.पॉल ,सदस्य नीति आयोग !
19 अक्टूबर 2020 आज तक में प्रकाशित - 2 साल तक कोरोना से राहत नहीं! WHO एक्सपर्ट ने दी ये 3 बातें अपनाने की सलाह!विश्व स्वास्थ्य संगठन की चीफ साइंटिस्ट सौम्या विश्वनाथन को लगता है कि कोरोना वायरस अभी रहेगा. दक्षिणी भारत वाणिज्य और उद्योग मंडल द्वारा आयोजित एक परिचर्चा में स्वामीनाथन ने कहा, 'हमें अनुशासित व्यवहार के लिए दो साल तक खुद को मानसिक रूप से प्रबल कर लेना चाहिए,see https://www.aajtak.in/lifestyle/news/photo/be-prepared-for-2-years-of-disciplined-behaviour-to-avoid-corona-virus-says-who-expert-1147784-2020-10-19-2
20अक्टूबर 2020 को जनसत्ता में प्रकाशित :- COVID-19 पर केंद्र का डेटा गलत? 30% भारतीय हैं संक्रमित, फरवरी 2021 तक आधी आबादी को सकता है इन्फेक्शन- एक्सपर्ट ने किया आगाह !त्यौहारों और सर्दी की दस्तक के साथ और वैश्विक महामारी कोरोना वायरस भारत में और भयावह रूप ले सकती है। सर्दी की दस्तक से पहले दिल्ली और आसपास के इलाकों में हवा का स्तर खराब होने लगा है।ऐसा इसलिए क्योंकि, एक सरकारी कमेटी के सदस्य ने सोमवार को आगाह करते हुए कहा है कि फरवरी 2021 तक 50 फीसदी भारतीय कोरोना से संक्रमित हो सकते हैं। समाचार एजेंसी ‘Reuters’ को Indian Institute for Technology, कानपुर में प्रोफेसर और कमेटी के सदस्य मनिंद्र अग्रवाल ने बताया, “हमारा गणितज्ञ मॉडल के अनुमान के मुताबिक, मौजूदा समय में देश की 30 फीसदी आबादी संक्रमित है, जबकि फरवरी 2021 तक 50 फीसदी लोग संक्रमित हो चुके होंगे।” कमेटी सदस्य का अनुमान केंद्र सरकार के Coronavirus Serological Surveys से काफी अधिक है, क्योंकि उसमें सितंबर तक देश की 14 प्रतिशत आबादी को संक्रमित बताया गया थाhttps://www.jansatta.com/national/covid-19-30-indians-infected-and-half-of-population-may-be-infected-by-february-2021-warns-iit-professor-manindra-agrawal/1549640/

19-दिसंबर - 2020 को न्यूज स्ट्रक डॉट.कॉम में प्रकाशित:- प्रसिद्ध वायरोलॉजिस्ट डॉ.शहीद जमील ने कहा कि मुझे दूसरी लहर की संभावना नहीं लगती है | 
07 फरवरी 2021 को नव भारत टाइम्स में प्रकाशित :ब्लूमबर्ग के वैक्सीन कैलकुलेटर के मुताबिक, उसकी गणना बताती है कि कोरोना वायरस के खात्मे में अभी सात साल का समय और लग सकता है। इस गणना में टीकाकरण की रफ्तार को आधार बनाया गया है।यानी जिस तेजी से दुनियाभर में टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, उसके मुताबिक सभी देशों को अपनी 75 फीसदी आबादी को टीका लगाने में सात साल का वक्त लग जाएगा।see more...https://navbharattimes.indiatimes.com/world//coronavirus-is-here-to-stay-as-vaccine-calculator-predicts-long-time-to-reach-herd-immunity/articleshow/80730745.cms
26 फरवरी 2021 को डाउन टू अर्थ में प्रकाशित:-भारत में संक्रमण की दूसरी लहर की संभावना नहीं है -प्रो मणींद्र अग्रवाल IIT कानपुर
8 मार्च 2021को डाउन टू अर्थ में प्रकाशित: -"भारत में कोविड-19 महामारी के अंतिम दौर में हैं -केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री" -डॉ.हर्ष बर्द्धन !
25 मार्च 2021 को न्यूज़ 18 में प्रकाशित: एसबीआई ने रिपोर्ट जारी कर कहा कि देश में दूसरी लहर अप्रैल महीने के आखिर में अपने चरम पर होगी और यह लहर 100 दिन लंबी चलेगी, जो कि 15 फरवरी से शुरू हो चुकी है।https://hindi.news18.com/news/nation/coronavirus-indias-current-covid-wave-could-peak-in-2nd-half-of-april-may-last-up-to-100-days-sbi-report-3535292.html
30मार्च 2021को डाउन टू अर्थ में प्रकाशित :भारत में हालात बद से बदतर हो रहे हैं देश के किसी भी हिस्से को लापरवाह नहीं होना चाहिए रुझान बताते हैं कि वायरस अभी भी बहुत सक्रिय है और हमारे रक्षा तंत्र को भेद सकता है --डॉ.वी.के.पॉल ,सदस्य नीति आयोग
2अप्रैल 2021को दैनिक जागरण में प्रकाशित :वैज्ञानिकों का अनुमान, देश में अप्रैल के मध्य में चरम पर पहुँच जाएगी कोरोनामहामारी की दूसरी लहर!मनिंद्र अग्रवाल ने कहा कि मई के अंत तक मामले बेहद कम हो जाएँगे ।
06 अप्रैल 2021 को जी न्यूज़ में प्रकाशित:अगले 30 दिन बेहद क्रिटिकल, स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय का कोरोना पर बड़ा बयान ! केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अगले चार हफ्ते हमारे लिए बहुत क्रिटिकल हैं. अभी देश के कई हिस्सों में खतरनाक स्थिति बनी हुई है | 
9 अप्रैल 2021 को अमर उजाला में प्रकाशित : आई आईटी  कानपुर के प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि यूपी में संक्रमितों की संख्या काफी कम है। मॉडल के अनुसार यहां संक्रमण बढ़ने की संभावना भी काफी कम है। महाराष्ट्र में 10 अप्रैल से केस कम होने शुरू होंगे। उन्होंने कहा कि केस शून्य तो नहीं होंगे, लेकिन संख्या काफी कम हो जाएगी।
16अप्रैल 2021 को दैनिकजागरण में प्रकाशित:केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि कोरोना वायरस और कितना खतरनाक होगा और कब तक चलेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। घर के घर कोविड ग्रस्त हैं और आने वाले 15 दिन या 1 महीने में क्या होगा यह कहना मुश्किल है। उन्‍होंने कहा कि लोगों को सर्वश्रेष्ठ के लिए सोचना चाहिए, लेकिन सबसे खराब के लिए तैयार रहना चाहिए। इस महामारी से निपटने के लिए दीर्घकालिक प्रबंधों की जरूरत है।https://www.jagrantv.com/hi-show/covid-19-update-long-term-arrangements-needed-to-combat-covid-19-says-nitin-gadkari-watch-video-rc1017640  
16 अप्रैल 2021 को अमरउजाला में प्रकाशित: तूफान अभी बाकी: विशेषज्ञों ने चेताया-भारत में रोज निकल सकते हैं पाँच लाख नए केस!कोरोना की दूसरी लहर को लेकर महामारी रोग विशेषज्ञों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। विशेषज्ञों ने कहा कि कोरोना महामारी का भयानक प्रकोप अगले महीने दिखेगा। अभी तो इसका पीक आना बाकी है।यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में बॉयोस्टैटिस्टिक्स और महामारी रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर भ्रमर मुखर्जी नेकहा कि भारत में कोरोना की स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने कहा कि संक्रमण के मामलों का बढ़ना अभी कम नहीं होगा। प्रोफेसर भ्रमर मुखर्जी ने कहा कि यहां हर रोज 5 लाख तक नए केस निकलेंगे। इसके साथ ही तीन से चारहजार लोगों के जान गँवाने जैसी खबरें मिल सकती हैं। वहीं विषाणु वैज्ञानिक डॉ. रवि ने बताया कि वैक्सीन कोई  जादूगर की छड़ी नहीं है, जो एक बार घुमाई और सब ठीक हो गया। हालांकिउन्होंने कहा कि कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना बेहद जरूरी है। साथ ही वैक्सीनेशन भी आवश्यक है।
17अप्रैल 2021 को ABPन्यूज़ में प्रकाशित: लांसेंट जर्नल  में प्रकाशित‘भारत की दूसरी कोरोना लहर के प्रबंधन के लिए जरूरी कदम’शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जल्द ही देश में हर दिन औसतन 1750 मरीजों की मौत हो सकती है. रोजाना मौतों की यह संख्या बहुत तेजी से बढ़ते हुए जून के पहले सप्ताह में 2320 तक पहुँच सकती है |
 24 अप्रैल 2021 को अमरउजाला में प्रकाशित :दावा: अभी और बढ़ेगा कोरोना का तांडव, मई में रोजाना हो सकती है 5 हजार लोगों की मौत !एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में आने वाले दिनों में कोरोना वायरस का कहर और बढ़ेगा। मई में हर दिन 5,000 से ज्यादा लोगों की जान जाएगी यानी कि अप्रैल से लेकर अगस्त तक 300,000 से ज्यादा लोगों की मौत होगी। शिंगटन विश्वविद्यालय में इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (आईएचएमई) की ओर से कोविड-19 की आगामी स्थिति पर अध्ययन किया गया है। 15 अप्रैल को प्रकाशित इस अध्ययन में कोविड टीकाकरण अभियान के बावजूद दूसरी लहर के लंबे समय तक कहर बरपाने की आशंका जताई गई है। आईएचएमई के विशेषज्ञों ने अध्ययन में चेतावनी दी है कि भारत में आने वाले समय में कोरोना महामारी और विकराल रूप धारण कर सकती है। वाशिंगटन यूनिवर्सिटी की रिसर्च में कहा गया है कि भारत में मध्य मई तक कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर शीर्ष पर पहुँच सकती है |https://www.amarujala.com/india-news/covid-deaths-in-india-could-peak-by-mid-may-at-over-5-000-per-day-us-study
26 अप्रैल 2021 को इंडिया डॉट कॉम में प्रकाशित: आईआईटी के वैज्ञानिकों ने अपने गणितीय मॉडल के आधार पर अनुमान लगाया है कि भारत में महामारी की दूसरी लहर 14 से 18 मई के बीच चरम यानी पीक पर होगी. उस दौरान देश में सक्रिय मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 38 से 48 लाख तक पहुंच सकती है. उसके बाद मई के अंत तक मामलों में तेजी से कमी आएगी.नए पूर्वानुमान में समयसीमा और मामलों की संख्या में सुधार किया गया हैआईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों और हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने एप्लाइड दस ससेक्टिबल, अनडिटेक्ड, टेस्टड (पॉजिटिव) ऐंड रिमूव एप्रोच (फॉर्मूला) मॉडल के आधार पर ये अनुमान लगाया है कि कोरोना के मामलों में कमी आने से पहले मध्य मई तक उपचाराधीन मरीजों की तादाद में 10 लाख की बढ़ोतरी हो सकती है.पिछले हफ्ते, वैज्ञानिकों ने पूर्वानुमान लगाया था कि महामारी 11 से 15 मई के बीच चरम पर पहुँच सकती है और उपचाराधीन मामलों की संख्या 33-35 लाख तक हो सकती है. वहीं मई के अंत तक इसमें तेजी से कमी आएगी | 
 विशेष :-अप्रेल महीने के शुरू में, वैज्ञानिकों ने पूर्वानुमान लगाया था कि देश में 15 अप्रैल तक उपचाराधीन मामलों की संख्या चरम पर होगी, लेकिन यह बात सच साबित नहीं हुई. IIT-कानपुर में कंप्यूटर साइंस एंड टेक्नालजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर मनिंदर अग्रवाल ने कहा, ‘इस बार, मैंने पूर्वानुमान आंकड़े के लिए न्यूनतम और अधिकतम संगणना भी की है | 
 20 मई 2021 को दैनिकभास्कर में प्रकाशित : SUTRA मॉडल ने स्वीकार किया कि वह दूसरी लहर की प्रकृति की भविष्यवाणी करने में असमर्थ थी। https://www.bhaskarhindi.com/national/news/coronavirus-second-wave-to-end-in-july-third-wave-after-6-months-government-panel-249667
2 मई 2021-को दैनिक जागरण में प्रकाशित :"कोरोना की दूसरी लहर के पीक की सटीक भविष्यवाणी मुश्किल, भारतीय वैज्ञानिकों का दावा !"कोरोना वायरस मामलों की वृद्धि का पूर्वानुमान लगाने के लिए गणितीय मॉडल पर काम कर रहे वैज्ञानिकों के एक समूह ने कहा कि है वे देश में आई विनाशकारी दूसरी लहर के सटीक प्रक्षेपवक्र (ट्रेजेक्ट्री) का अनुमान नहीं लगा सकते है क्योंकि समय के साथ वायरस की गतिशीलता और इसकी संक्रामकता में काफी बदलाव आया है।इसके साथ ही भारत में आई कोरोना वायरस की दूसरी लहर की प्रकृति कैसी है, इसको लेकर कोई सटीक भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जारी और आइआइटी कानपुर के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल, एकीकृत रक्षा कर्मचारी उप प्रमुख माधुरी कानिटकर और आइआइटी हैदराबाद के प्रोफेसर एम. विद्यासागर द्वारा हस्ताक्षरित एक बयान में कहा गया है कि गणितीय मॉडल ने कोरोना वायरस की दूसरी लहर और अप्रैल के तीसरे हफ्ते में इसकी पीक की भविष्यवाणी की थी | उन्होंने उन रिपोर्टो को भी खारिज कर दिया है कि सूत्र मॉडल पर काम करने वाले वैज्ञानिकों ने मार्च में दूसरी लहर के बारे में चेतावनी दी थी, लेकिन उनकी चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया गया था।"  पिछले साल, सरकार ने मामलों के उछाल का पूर्वानुमान लगाने के लिए वैज्ञानिकों, गणितज्ञों और विशेषज्ञों का एक समूह बनाया था। उन्होंने कहा कि वायरस की प्रकृति बहुत तेजी से बदल रही है और ऐसे परिदृश्य में किसी भी भविष्यवाणी को लगातार पढ़ा जाना चाहिए, कभी-कभी दैनिक रूप से। उन्होंने कहा कि हम सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और हमारे इनपुट हमेशा सकारात्मक रूप से प्राप्त हुए हैं। जबकि हम पहले दूसरी लहर की सटीक प्रकृति का अनुमान नहीं लगा सकते थे, हम इसके भविष्य के अनुमान पर बेहतर अनुमान लगाने के अपने प्रयासों को जारी रखते हैं।    उन्होंने कहा कि सरकार ने दो अप्रैल को इसके इनपुट की मांग की थी जब उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि अप्रैल महीने के तीसरे सप्ताह के आसपास एक पीक आ जाएगी।इसके बाद 15 अप्रैल को भारत में 2,00,739 मामले दर्ज किए, जबकि 22 अप्रैल को 3,14,835 मामले दर्ज हुए। अपने पिछले सभी रिकार्डो को तोड़ते हुए देश ने एक मई को चार लाख से अधिक नए संक्रमणों के साथ दैनिक उच्च रिकार्ड तोड़ दिया। स्पष्ट रूप से इस उदाहरण में मॉडल की भविष्यवाणी गलत थी। ऐसे में कह सकते हैं कि दूसरी लहर को लेकर कोई सटीक भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है।https://www.jagran.com/news/national-could-not-predict-exact-nature-of-covid19-second-wave-in-india-group-of-scientists-working-on-mathematical-models-21609130.html

                        

2 मई 2021-को प्रकाशित: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की प्रेस रिलीज : 
 Posted On: 02 MAY 2021 12:05PM by PIB Delhi-हम वैज्ञानिक, जो कोविड-19 के प्रक्षेपवक्र को अंकित करने के लिए सूत्र मॉडल पर काम कर रहे हैं, हमारे गणितीय मॉडल की भविष्यवाणियों से संबंधित कुछ तथ्यों के बारे में स्पष्ट रूप से बताना चाहते हैं।खासकर जब से इनमें से कुछ भविष्यवाणियों को गलत ढंग सेसमझा और उद्धृत किया गयाहै, ऐसा करना जरूरी है। मीडिया के कुछ हिस्सों में आई हाल की रिपोर्ट से ऐसा लगता है कि सूत्र मॉडल पर काम करने वाले वैज्ञानिकों ने मार्च में दूसरी लहर के बारे में चेतायाथा, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। यह गलत है।राष्ट्रीय स्तर पर इस महामारी के खिलाफ प्रतिक्रिया को समन्वित करने वाले सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों में से एक ने 2 अप्रैल को बुलाई गई एक बैठक में हमसे इनपुट मांगे थे। हमने संकेत दिया कि सूत्रमॉडल ने अप्रैल के तीसरे सप्ताह तक दूसरी लहर के चरम पर पहुंचने की भविष्यवाणी की है और दैनिक मामलों की संख्या लगभग 1 लाख रहने की संभावना है। साफ तौर परइस मामले में सूत्र मॉडल की भविष्यवाणी नीचे दिए गए कारणों से गलत निकली।हम वायरस के प्रसार की भविष्यवाणी करने के लिए एक गणितीय मॉडल पर काम कर रहे हैं। यहां यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कोई भी गणितीय मॉडल केवल तभी कुछ निश्चितता के साथ भविष्य के बारे में भविष्यवाणी कर सकता है, जब वायरस का आयाम और इसकी प्रसार क्षमता समय के साथ पर्याप्त रूप से न बदले। गणितीय मॉडल बिना– दवा आधारितउपायों जैसे विभिन्न नीतिगत निर्णयों के अनुरूप वैकल्पिक परिदृश्यों की भविष्यवाणी करने की एक प्रक्रिया के बारे में भी बता सकते हैं। कोविड-19 के मामले में, यह बिल्कुल स्पष्ट है कि वायरस की प्रकृति बहुत तेजी से बदल रही है। ऐसीस्थिति में, कोविड-19 से जुड़ी किसी भी भविष्यवाणी में लगातार,कभी-कभी लगभग रोजाना,फेरबदल करके उसे दुरूस्त रखना चाहिए।हम सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और हमारे इनपुट को हमेशा सकारात्मक तरीके से लिया गया है। भले ही हम पूर्व में दूसरी लहर की सटीक प्रकृति का अनुमान नहीं लगा पाये, लेकिनहमने इस महामारी के भविष्य के प्रक्षेप वक्र का बेहतर तरीके से अनुमान लगाने के अपने प्रयासों को जारी रखा है।- मनिन्द्र अग्रवाल, प्रोफेसर, आईआईटी कानपुर;माधुरी कनिटकर, डिप्टी चीफ, इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ;एम. विद्यासागर, प्रोफेसर, आईआईटी हैदराबाद।https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1715501
    6 मई 2021को न्यूज-18 में प्रकाशित- बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ साइंस ने आशंका जताई है कि अगर देश में कोरोना से मरने वालों रफ्तार मौजूदा की ही तरह रही तो 11 जून तक देश में मौतों का आंकड़ा 4,04,000 से अधिक हो सकता है. वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन स्थित इंस्‍टीट्यूट फॉर हेल्थ मीट्रिक्स एंड इवैल्युएशन के मुताबिक जुलाई के आखिर तक कोरोना संक्रमण से मरने वालों की संख्या 10 लाख के पार पहुंच सकती है| https://hindi.news18.com/news/nation/coronavirus-pandemic-likely-to-be-increase-in-india-death-number-to-be-double-as-report-says-covid-19-3579198.html 

6 मई 2021को न्यूज 18 में प्रकाशित:  ब्राउन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ हेल्थ के डीन आशीष झा के अनुसार भारत के लिए अगले 4 से 6 हफ्ते बेहद कठिन रहने वाले हैं. उन्होंने कहा कि हमारे सामने चुनौती यह है कि कैसे भी इस लहर को सीमित किया जाए !  ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत जैसे घनी आबादी वाले देशों में कोरोना संक्रमण के मामलों को लेकर भविष्यवाणी करना आसान नहीं है. भारत में कोरोना टेस्टिंग और सोशल डिस्टेंसिंग को बढ़ाने की जरूरत है. अगले कुछ महीनों में भारत कोरोना संक्रमण से मरने वाले लोगों की संख्या के मामले में दुनिया का नंबर एक देश बन सकता है. https://hindi.news18.com/news/nation/coronavirus-pandemic-likely-to-be-increase-in-india-death-number-to-be-double-as-report-says-covid-19-3579198.html

08 मई 2021को जीन्यूज़ में प्रकाशित:  थर्ड कोविड वेव के आने की भविष्यवाणी भी हो चुकी है. यह बात कोई और नहीं बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के वैज्ञानिक सलाहकार विजय राघवन ने कही है. साइंटिफिक एडवाइजर की इस आशंका पर IIT कानपुर के प्रोफेसर माणिंद्र अग्रवाल ने भी अपनी मुहर लगा दी है.  IIT कानपुर के इस प्रोफेसर का दावा है कि जुलाई तक कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप काफी कम हो जाएगा. लेकिन उनका दूसरा दावा भारत के लिए चिंताजनक है. उन्होंने डेटा एनालिसिस करके बताया है कि अक्टूबर में कोरोना की तीसरी लहर देश में शुरू हो जाएगी.
08 मई 2021को दैनिकभास्कर में प्रकाशित:कोरोना की दूसरी लहर के पीक पर सरकारी आंकड़े फेल; एक्टिव केस 48 लाख होंगे तब आएगा दूसरा पीक!SBI की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि दूसरी लहर का पीक अप्रैल के अंत तक आ सकता है, लेकिन वैक्सीनेशन की रफ्तार घटने के कारण इस अनुमान में बदलाव हुआ है। अनुमान में होने वाले इस बदलाव को लेकर एक्सपर्ट कहते हैं कि हम संकट से निपटने के लिए कौन से कदम उठाते हैं, उस पर भी बहुत कुछ निर्भर करता है। इन कदमों के हिसाब से ही पीक आगे-पीछे भी हो सकता है।एक और मैथमेटिकल मॉडल की बात लेते हैं। इसे IIT कानपुर और IIT गोवा के वैज्ञानिकों ने दिया है। इसके मुताबिक दूसरी लहर के पीक के वक्त 38 से 48 लाख के बीच एक्टिव केस होंगे।सरकार को सलाह देने वाली वैज्ञानिकों की एक टीम ने 3 से 5 मई के बीच देश में कोरोना की दूसरी लहर का पीक आने का अनुमान लगाया था।हालांकि इस मॉडल को देने वाले वैज्ञानिकों में शामिल IIT कानपुर के प्रोफेसर मनींद्र अग्रवाल ने शुक्रवार को कहा कि देश में आने वाले कुल मामलों की संख्या जिस तरह हर रोज बढ़ रही है, उससे पीक का फेज शिफ्ट हो सकता है। इसके लिए वो अगले दो-तीन दिन इंतजार करने को कहते हैं। डॉक्टर एम विद्यासागर ने 30 अप्रैल को कहा था कि हमारा अनुमान है कि देश में अगले हफ्ते तक पीक आ जाएगा। हालांकि इससे पहले 2 अप्रैल को इसी टीम ने 10 मई के आसपास पीक आने का अनुमान लगाया था।अशोका यूनिवर्सिटी के बायोलॉजी के प्रोफेसर गौतम मेनन कहते हैं कि दूसरी लहर का पीक मई के दूसरे हफ्ते या फिर महीने के अंत तक आ जाएगा। वहीं, ब्राउन यूनिवर्सिटी स्कूल के डीन डॉ. आशीष के. झा कहते हैं कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर का पीक जून तक आ सकता है। हालांकि वो मानते हैं कि ये सब राज्यों से आने वाले आंकड़ों पर निर्भर करेगा।https://www.bhaskar.com/db-original/explainer/news/coronavirus-peak-prediction-india-updates-sbi-iit-scientists-covid-active-cases-may-cross-lakh-128476899.html?media=1


31 मई 2020 को अमर उजाला में प्रकाशित :विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने कोविड-19 संबंधी पूर्वानुमान के लिए गणितीय मॉडल तैयार करने की बनाई योजना!विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने कोरोना वायरस संक्रमण के फैलने के संबंध में पूर्वानुमान लगाने में मदद के लिए गणित का एक राष्ट्रीय सुपरमॉडल तैयार करने की योजना बनाई है, जिससे नीति निर्माताओं को सहायता मिल सकती है।डीएसटी के सचिव आशुतोष शर्मा ने शनिवार को बताया कि ऐसे 20 से अधिक समूह हैं जिनके पास गणित के विभिन्न मॉडल तैयार हैं। इन सभी मॉडल के सबसे अच्छे पहलुओं को चुनकर सुपरमॉडल तैयार करने की योजना है।शर्मा ने कहा कि कोविड-19 से निपटने के लिए विशेष निधि देने की पहल के तहत डीएसटी गणितीय मॉडल तैयार करने में शामिल 10 समूहों को पहले ही निधि मुहैया करा रहा है। इस पहल के तहत बंगलूरू स्थित जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (जेएनसीएएसआर) और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएस) देश में कोविड-19 मॉडल संबंधी सभी परियोजनाओं एवं कार्यक्रमों से जुड़ने और उनके साथ काम करने के लिए समन्वय स्थापित करेंगे।शर्मा ने कहा कि इससे विभिन्न मॉडल का आकलन करने के लिए मापदंड तैयार करने और अंतत: ‘कोविड-19 भारत राष्ट्रीय सुपरमॉडल’ पेश करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह सुपरमॉडल कोरोना वायरस के विभिन्न पहलुओं संबंधी पूर्वानुमान  लगाने में मदद कर सकता है, जिनका इस्तेमाल नीति निर्माता कर सकते हैं।https://www.amarujala.com/india-news/corona-pandemic-department-of-science-and-technology-plans-to-prepare-mathematical-model-for-forecasting-covid-19

    दूसरी लहर के पूर्वानुमान बताने का दावा कितना सही ?

02 मई 2021 को दैनिक जागरण में प्रकाशित: कोरोना की दूसरी लहर के पीक की सटीक भविष्यवाणी मुश्किल, भारतीय वैज्ञानिकों का दावा !विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी और आइआइटी कानपुर के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल, एकीकृत रक्षा कर्मचारी उप प्रमुख माधुरी कानिटकर और आइआइटी हैदराबाद के प्रोफेसर एम. विद्यासागर आदि वैज्ञानिकों के एक समूह ने कहा है कि भारत में आई कोरोना वायरस की दूसरी लहर की प्रकृति कैसी है, इसको लेकर कोई सटीक भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।यह समूह कोरोना वायरस मामलों की वृद्धि का पूर्वानुमान लगाने के लिए गणितीय मॉडल पर काम कर रहा है |इस समूह ने कहा कि है वे देश में आई विनाशकारी दूसरी लहर के सटीक प्रक्षेपवक्र (ट्रेजेक्ट्री) का अनुमान नहीं लगा सकते है क्योंकि समय के साथ वायरस की गतिशीलता और इसकी संक्रामकता में काफी बदलाव आया है।गणितीय मॉडल केवल तभी कुछ निश्चितता के साथ भविष्य के बारे में भविष्यवाणी कर सकता है, जब वायरस का आयाम और इसकी प्रसार क्षमता समय के साथ पर्याप्त रूप से न बदले। गणितीय मॉडल बिना – दवा आधारित उपायों जैसे विभिन्न नीतिगत निर्णयों के अनुरूप वैकल्पिक परिदृश्यों की भविष्यवाणी करने की एक प्रक्रिया के बारे में भी बता सकते हैं। कोविड-19 के मामले में, यह बिल्कुल स्पष्ट है कि वायरस की प्रकृति बहुत तेजी से बदल रही है। ऐसीस्थिति में, कोविड-19 से जुड़ी किसी भी भविष्यवाणी में लगातार,कभी-कभी लगभग रोजाना,फेरबदल करके उसे दुरुस्त रखना चाहिए।  https://www.jagran.com/news/national-could-not-predict-exact-nature-of-covid19-second-wave-in-india-group-of-scientists-working-on-mathematical-models-21609130.html

11मई 2021 को डाउन टू अर्थ में प्रकाशित:  हरियाणा की अशोका यूनिवर्सिटी में भौतिकी और जीव विज्ञान विभाग के प्रोफेसर गौतम मेनन ने कोरोना महामारी की दूसरी लहर जैसी आपदा के विषय में  कहा कि भारत में नोवल कोरोना वायरस की दूसरी लहर का अनुमान लगाने में केंद्र का मॉडल ‘सूत्र विफल रहा।मंत्रालय का मॉडल सूत्र बहुत अच्छे से नहीं तैयार किया गया,इसमें शामिल वैज्ञानिक लंबी अवधि की पूर्वानुमान करने की कोशिश कर रहे हैं मॉडल लंबे समय की भविष्यवाणियां नहीं कर सकते हैं, क्योंकि समय के साथ चीजें बदल जाती हैं। सूत्र के वैज्ञानिकों ने मॉडलिंग से जुड़ी अनिश्चितताओं के साथ बहुत सतही तरीके से व्यवहार किया है।अमूर्त कल्पना करने में मॉडलिंग का कोई मतलब नहीं बनता है। आपको देश के विभिन्न हिस्सों में मामलों में होने वाली बढ़ोतरी के प्रति सचेत रहना पड़ता है। आपको पता होना चाहिए कि कौन से वेरिएंट आ रहे हैं, उनके बारे में क्या-क्या पता है और वे कितने अधिक संक्रामक हैं।इसके अलावा महामारी को नियंत्रित करने के लिए अपनाए गए उपायों के कारण भी नतीजे बदल भी सकते हैं। अगर हर कोई घर में रहे और चार सप्ताह तक बाहर ना निकले तो बीमारी का विस्तार तुरंत थम जाएगा।चूंकि, वे लोग महामारी विज्ञान की पृष्ठभूमि से नहीं आते हैं, इसलिए वे इस क्षेत्र की लगातार कम करके आंकते और इसकी बारीकियों व गहराई के प्रति उचित सम्मान न देते हुए दिखाई दिए।ऐसे मॉडल को साक्ष्य-आधारित पूर्वानुमान करने के लिए सख्त परीक्षणों की जररूत होगी, जैसे मौसम पूर्वानुमान करने वाले लगातार करते हैं| 

13 मई 2021 को आजतक में प्रकाशित :डॉ. वीके पॉल की प्रेस कांफ्रेंस  -

प्रश्न : नीतिआयोग के सदस्य डॉ. वी.के. पॉल से पूछा गया "क्या सरकार दूसरी लहर की तीव्रता से अंजान थी?"  उत्तर :इस सवाल के जवाब में डॉ वी.के. पॉल ने कहा कि  ये आरोप गलत है कि सरकार को कोरोना की दूसरी लहर की जानकारी नहीं थी. हम लगातार लोगों को विभिन्न प्लेटफॉर्म्स से चेतावनी दे रहे थे !हम ये भी बता रहे थे कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर आएगी. देश में अभी सीरो पॉजिटिविटी 20 फीसदी है. 80 फीसदी आबादी अब भी संक्रमण का शिकार हो सकती है |हम इस मंच से बार-बार चेतावनी देते रहे हैं कि कोरोना की दूसरी लहर आएगी | 
प्रश्न :प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. वीके पॉल से पूछा गया कि क्या वायरस अपने उच्चतम स्तर यानी पीक पर पहुंच गया है. 
उत्तर :डॉ. वीके पॉल ने कहा कि ऐसा कोई मॉडलिंग सिस्टम नहीं है, जिससे ये अंदाजा लगाया जा सके !कोरोना वायरस के अबूझ व्यवहार की वजह से ये बहुत मुश्किल है. ये बात पूरी दुनिया जानती है.| उसके  बाद डॉ. पॉल ने बताया कि कोरोना फिर से खतरनाक रूप में सामने आ सकता है,. महामारी से जल्द निजात मिलने की कोई संभावना नहीं है. सरकार से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वायरस कहीं नहीं गया है और पीक के आगे भी आने की आशंका है. इसलिए तैयारियों को तेज किया जाना चाहिए !..... https://www.aajtak.in/science/photo/indian-govt-says-covid-19-peak-will-come-virus-emerge-again-tstr-1254782-2021-05-14-6

15 मई 2021 को ndtv में प्रकाशित :जिनेवा:विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आगाह किया है कि कोरोना वायरस की महामारी पिछले साल के मुकाबले इस साल और ज्यादा घातक साबित होगी. डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एदानोम गेब्रेससने कहा कि हम कोरोना वायरस की इस महामारी को पिछले साल के मुकाबले इस बार ज्यादा जानलेवा होता हुआ देख रहे हैं.... https://ndtv.in/india-news/corona-epidemic-will-be-more-deadly-this-year-who-director-general-tedros-adhanom-ghebreyesus-warns-2441970 

22 जून 2021 को डाउन टू अर्थ में प्रकाशित : कोविड-19 की दूसरी लहर के लिए दोषी कौन ? भारत में कहर बरपाने वाली कोविड-19 की दूसरी लहर के क्या कारण रहे ? हमने शुरुआती संकेतों को कैसे नजरअंदाज कर दिया? और हम अब भी सबक सीखने को तैयार क्यों नहीं हैं ?

23 जून 2021 को आजतक में प्रकाशित : कोरोना की पहली लहर के डेटा को कमतर आंकने की गलती, हुआ ये नुकसान।कोरोना वायरस की दोनों लहरें कई देशों और शहरों में एक साल के अंदर ही आईं. वैज्ञानिक इस बात का पता लगा रहे हैं कि क्या हमनें दोनों लहरों के अंतर को समझने में भूल कर दी |https://www.jagran.com/news/national-could-not-predict-exact-nature-of-covid19-second-wave-in-india-group-of-scientists-working-on-mathematical-models-21609130.html 

IIT

कुछ विशेष  पूर्वानुमानों के अखवारों एवं उनकी वेवसाइटों में प्रकाशित अंश !

26 फरवरी 2021 को  डाउन टू अर्थ में प्रकाशित :भारत में संक्रमण की दूसरी लहर की संभावना नहीं है -प्रो मणींद्र अग्रवाल 
1 अप्रैल 2021 को न्यूज -18 डॉट कॉम पर प्रकाशित :आईआईटी कानपुर के साइबर सिक्यॉरिटी हब के प्रोग्राम डायरेक्टर मणींद्र अग्रवाल के अनुसार, महाराष्ट्र अगले दो हफ्ते में पीक पर होगा. मॉडल के आधार पर महाराष्ट्र में रोजाना 45-50 हजार केस आ सकते हैं. इसी तरह पंजाब रोजाना 3500 केसों के साथ पीक पर होगा. केरल में अप्रैल मध्य में केस न्यूनतम स्तर पर होंगे. दिल्ली में भी अप्रैल-मई में संक्रमण के 5-6 हजार नए केस रिपोर्ट हो सकते हैं. इसी तरह उत्तर प्रदेश अप्रैल के अंतिम हफ्ते में रोज 6 हजार केस का आंकड़ा छू सकता है. पहली लहर के चरम में यूपी में रोज करीब 7 हजार केस रेकॉर्ड किए गए थे. गोवा 300 केसों के साथ मई के पहले हफ्ते में चरम पर होगा !
अप्रैल 2021 को दैनिक जागरण में प्रकाशित :मनिंद्र अग्रवाल ने कहा कि मई के अंत तक मामले बेहद कम हो जाएँगे !
प्रैल 2021को जी न्यूज में प्रकाशित :आईआईटी कानपुर  के प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल का दावा कि  20 से 25 अप्रैल के बीच यूपी में कोरोना वायरस पीक पर होगा. मई में मामला सही हो सकता है| प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल ने बताया कि मरीज और तारीख की ट्रैजेक्टरी के अनुसार लखनऊ में 28 मार्च से कोरोना वायरस का ग्राफ उठना शुरू हुआ है, जो 17 मई को अपने निचली स्तर पहुँच जाएगा.कानपुर आईआईटी ने कोरोना पर रिसर्च करके सूत्र नाम का एक मॉडल तैयार किया है |
9 अप्रैल 2021 को अमर उजाला में प्रकाशित : आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवालका दावा, अप्रैल के बाद से देश में घटेंगे संक्रमित !प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल ने ये खुलासा गणितीय विश्लेषण के आधार पर किया है। उन्होंने कहा है कि अप्रैल में जब इसकी लहर चरम पर होगी तब एक दिन में 80 से 90 हज़ार केस तक आ सकते हैं।अप्रैल अंत या तो मई के मध्य या अंत तक इसमें कमी आएगी।
26 अप्रैल 2021 को इंडिया डॉट कॉम में प्रकाशित :आईआईटी के वैज्ञानिकों ने अपने पूर्वानुमान में संशोधन करते हुए गणितीय मॉडल के आधार पर अब कहा है कि भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान एक्‍ट‍िव 14 से 18 मई के बीच चरम पर पहुँचकर 38-48 लाख हो सकती है और चार से आठ मई के बीच संक्रमण के दैनिक मामलों की संख्या 4.4 लाख तक के आंकड़े को छू सकती है |पूर्वानुमान में समयसीमा और मामलों की संख्या में सुधार किया गया है. पिछले सप्ताह, अनुसंधानकर्ताओं ने पूर्वानुमान व्यक्त किया था कि महामारी 11 से 15 मई के बीच चरम पर पहुंच सकती है और उपचाराधीन मामलों की संख्या 33-35 लाख तक हो सकती है और मई के अंत तक इसमें तेजी से कमी आएगी | इस महीने के शुरू में, वैज्ञानिकों ने पूर्वानुमान व्यक्त किया था कि देश में 15 अप्रैल तक उपचाराधीन मामलों की संख्या चरम पर होगी, लेकिन यह बात सच साबित नहीं हुई.प्रोफेसर मनिंदर अग्रवाल ने सिसलिसलेवार ट्वीट में कहा, ”चरम पर पहुंचने का समय : उपचाराधीन मामलों के लिए 14-18 मई और संक्रमण के दैनिक मामलों के लिए 4-8 मई. चरम पर पहुंचने के आंकड़े: 38-48 लाख उपचाराधीन मामले और 3.4 से 4.4 लाख दैनिक नए मामले.” अग्रवाल ने यह भी उल्लेख किया कि यह स्पष्ट नहीं है कि अंतिम आंकड़ा क्या होगा. 
8 मई 2021को जी न्यूज में प्रकाशित : प्रद्मश्री से नवाजे जा चुके IIT कानपुर के प्रो. माणिंद्र अग्रवाल ने जुलाई में दूसरी लहरके ख़त्म होने की भविष्यवाणी की है | 
___________________________________________________________________
11 मई 2021 को डाउन टू अर्थ में प्रकाशित : केंद्र सरकार का सूत्र मॉडल कोविड की दूसरी लहर आंकने में रहा विफल, हर्ड इम्यूनिटी का दावा भी था गलत!डाउन टू अर्थ ने प्रोफेसर गौतम मेनन से पूछा कि भारत में नोवल कोरोना वायरस की दूसरी लहर का अनुमान लगाने में केंद्र का मॉडल ‘सूत्र क्यों  विफल रहा।इसके उत्तर में प्रोफेसर गौतम मेनन ने कहा भारत में नोवल कोरोना वायरस बीमारी (कोविड-19) की दूसरी लहर का अनुमान लगाने में केंद्र सरकार का बनाया मॉडल ‘सूत्र’’ क्यों  विफल रहा उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं ने महामारी विज्ञान को लगातार कम करके आंका है और इसकी बारीकियों और गहराइयों को गंभीरता से नहीं लिया है।गौतम मेनन : संक्रमण की लहर के बारे में पहले ही अनुमान कर लेना असंभव होता है, क्योंकि यह वास्तव में अचानक होने वाली एक घटना है। हालांकि, एक बार जब यह महसूस हो गया कि लहर शुरू हो गई है और पिछली लहर की तुलना में मामलों की संख्या अधिक तेजी से बढ़ रही है, तब मौजूदा स्थिति को समझने और विभिन्न परिस्थितियों के मॉडल बनाने का जोरदार प्रयास होना चाहिए था। पूर्वानुमान के ऐसे मॉडल को आने वाले नए आंकड़ों के हिसाब से व्यवस्थित किया जाना चाहिए था।मंत्रालय का मॉडल सूत्र बहुत अच्छे से नहीं तैयार किया गया,इसमें शामिल वैज्ञानिक लंबी अवधि की पूर्वानुमान करने की कोशिश कर रहे हैं और लगता है कि मॉडल में बहुत ज्यादा विश्वास है, जो न्यायसंगत नहीं है।मॉडल लंबे समय की भविष्यवाणियां नहीं कर सकते हैं, क्योंकि समय के साथ चीजें बदल जाती हैं। सूत्र के वैज्ञानिकों ने मॉडलिंग से जुड़ी अनिश्चितताओं के साथ बहुत सतही तरीके से व्यवहार किया है।अमूर्त कल्पना करने में मॉडलिंग का कोई मतलब नहीं बनता है। 
__________________________________________________________________________
    आईआईटी कानपुर के प्रो. मणींद्र अग्रवाल के वक्तव्य : 
26 अप्रैल 2021 को ABP न्यूज पर प्रकाशित : 14 से 18 मई के बीच आएगा कोरोना का  पीक, 48 लाख हो सकते हैं एक्टिव केस !आईआईटी कानपुर के मणींद्र अग्रवाल ने रविवार को अपने ट्वीट में बताया कि एक्टिव मामलों की पीक टाइमिंग 14-18 मई और नए मामलों के लिए 4-8 मई होगी. पीक टाइमिंग में एक्टिव केस 38-48 लाख होंगे जबकि नए मामले 3.4-4.4 लाख होंगे. इन्हीं मणींद्र अग्रवाल ने 1 अप्रैल को इस मॉडल में 15-20 अप्रैल के बीच एक्टिव केस के पीक का अनुमान लगाया था जिसमें एक्टिव केस की संख्या 10 लाख होने की संभावना थी. यह आंकाड़ा पिछले साल सितंबर के पीक के बराबर था. हालाकि इन आंकड़ों को बाद में पिछले हफ्ते संशोधित किया गया था  जिसमें 33-35 लाख एक्टिव केस के साथ 11-15 मई के बीच पीक पर पहुँचने संभावना का अनुमान लगाया गया था. पीक टाइमिंग और संख्या में बदलाव का पैरामीटर्स का बदलना बताया है.https://www.abplive.com/news/india/experts-claim-peak-of-corona-will-come-14-to-18-may-there-may-be-48-lakh-active-cases-1905897   

    

Comments

Popular posts from this blog

विज्ञान खंड

महामारी मौसम के आधार पर ! 1008

मौसम संबंधी इन घटनाओं के नहीं बताए जा सके पूर्वानुमान !1008