वैज्ञानिकों के द्वारा किए गए पूर्वानुमान 1008

                                                    

                                                विज्ञान है या अंधविश्वास 

                                                             दो शब्द    

    ज्योतिष आयुर्वेद एवं वैदिक विषयों में बीते लाखों वर्षों से अनुसंधान होते आ रहे हैं अनुसंधानों के आधार बीते लाखों वर्षों से महामारी, मौसम, मानसून, तापमान, वर्षा, वायुप्रदूषण,भूकंप आदि विषयों में अनुसंधानों होते रहने के प्रमाण मिलते हैं |इसके बाद सदियों तक देश परतंत्र रहा उस समय प्राचीन ज्ञान विज्ञान के शास्त्रीय अनुसंधान ग्रंथ कुछ नष्ट कर दिए गए कुछ उठा ले जाए गए !जो नष्ट हुए वो तो समाप्त ही हो गए और जो जहाँ उठा ले जाए गए वहाँ उन्हें समझने वाले विद्वान नहीं थे इसलिए उनका विशेष सदुपयोग नहीं हो सका | 

      आक्रांताओं के उपद्रवों के बाद  जो शास्त्रीय वैज्ञानिक ग्रंथ बच भी गए वे या तो खंडित थे या फिर उस दारुण परतंत्रता काल में उनका छिप छिप के पठन पाठन करना पड़ा ,जिनसे सुयोग्य विद्वानों तक या तो उनकी पहुँच नहीं बन सकी इसलिए उन ग्रंथों का उस प्रकार से सदुपयोग नहीं हो सका जैसा कि होना चाहिए था | वैसे अनुसंधान नहीं किए जा सके जैसी कि आवश्यकता थी | 

     स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद ऐसे विषयों को संरक्षित करने एवं उन के विषय में अनुसंधान किए जाने की  विशेष आवश्यकता थी !इनसे संबंधित अनुसंधानों को आत्मीयता पूर्वक प्रोत्साहित करने की विशेष आवश्यकता थी ! सरकारी स्तर पर ऐसे अनुसंधानों के संबर्द्धन की विशेष आवश्यकता थी किंतु ऐसा कुछ विशेष किया नहीं जा सका !

     वर्तमान समय में ऐसे विषय जिन विश्व विद्यालयों में पढ़ाई भी जा रहे हैं वहाँ केवल पाठ्यक्रम को पढ़ाया जा रहा है उसी से संबंधित अनुसंधान हो रहे हैं |जिनसे ऐसी कुछ आशा नहीं की जानी चाहिए कि महामारी, मौसम, मानसून, तापमान, वर्षा, वायुप्रदूषण,भूकंप आदि विषयों में कोई वैज्ञानिक उपलब्धि प्राप्त कर सकते हैं | यदि ऐसा होना संभव होता तो ऐसी घटनाओं से संबंधित अनुमान पूर्वानुमान आदि लगाने की दृष्टि से उनके द्वारा कुछ किया जाता |वस्तुतः शास्त्रीय दृष्टि से ऐसे विषयों पर या तो अनुसंधान नहीं किए जा रहे हैं या फिर जो अनुसंधान हो भी रहे हैं वे इस उद्देश्य से नहीं किए जा रहे हैं या फिर उनके द्वारा ऐसा किया जाना संभव नहीं होगा | निजी तौर पर जो ऐसे अनुसंधान कर भी रहा है उन्हें वैज्ञानिक क्षेत्रों में तो कोई प्रोत्साहन मिल ही नहीं रहा है प्रत्युत संस्कृत विश्व विद्यालयों से भी उन्हें वो सहयोग नहीं मिल पा रहा है | कई स्थानों पर तो अंधविश्वास बताकर उनका उपहास भी उड़ाया जा रहा है | जो लोग कुछ सहृदय व्यवहार करते हैं वो ये कहते सुने जाते हैं कि ऐसे शास्त्रीय अनुसंधानों से जानकारियाँ तो सही मिलती हैं किंतु ये विषय विज्ञान नहीं हैं इसलिए ऐसे विषयों से संबंधित अनुसंधान को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता है | 

    वर्तमान समय में अक्सर पढ़े लिखे लोगों के मुख से अंधविश्वास जैसे शब्दों को कहते सुनते देखा जाता है | उनके द्वारा प्रयोग किए जाने वाले अंधविश्वास का मतलब ज्योतिष तंत्रमंत्र जादूटोना एवं परंपराओं से प्राप्त पुरातन धर्मकर्म रीतिरिवाज आदि का अनुपालन होता है | नदियों पहाड़ों बृक्षों तालाबों  कुओं के पूजन की पवित्र परंपराओं के पालन को अंधविश्वास बता दिया जाता है | 

    ऐसे ही प्राचीनकाल में अपनाए जाते रहे धर्म कर्म पुरातन परंपराओं सूर्य चंद्र आदि ग्रहणों के फल को वास्तु विज्ञान जैसे विषयों को अंधविश्वास बता बता कर उनका उपहास उड़ाया जाता है | इन सबके पीछे का आधारभूत कारण यह बताया जाता है कि ऐसी बातों का कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं दिखाई देता है | प्राचीन परंपराओं को अंध विश्वास मानने का कारण यदि यही है तो ऐसा तो वैज्ञानिक अनुसंधानों में भी होता है किंतु उन्हें सरकारी स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा होता है | उस प्रकार का सहयोग यदि शास्त्रीय अनुसंधान को भी मिले तो महामारी, मौसम, मानसून, तापमान, वर्षा, वायुप्रदूषण,भूकंप आदि विषयों में अनुसंधानों के परिणाम बहुत सकारात्मक हो सकते हैं |        

भूमिका 

   महामारी का सामना क्या हम इतने कमजोर विज्ञान के भरोसे कर रहे थे !हमें महामारी, मौसम, मानसून, तापमान, वर्षा वायु प्रदूषण,भूकंप आदि किसी के विषय में न कारण पता हैं न पूर्वानुमान !आखिर क्यों ?

   क्या अनुसंधान नहीं किए जा रहे हैं ! ऐसे अनुसंधानों पर क्या धन खर्च नहीं किया जा रहा है|क्या वह धन अतिरिक्त होता है जिसका कोई और उपयोग नहीं हो सकता है !क्या वह धन जनता के पास अतिरिक्त पड़ा हुआ होता है जो अपनी इच्छा से सरकारों को शृद्धा पूर्वक दे दिया करती है सरकारें जहाँ जैसे जितना चाहें खर्च करें !परिणाम स्वरूप उससे समाज को कुछ मिले या न मिले | 

    समाज का उद्देश्य केवल अनुसंधानों को चलाते रहना और उस पर धन खर्च करते रहना ही नहीं है अपितु us dhan ka उन अनुसंधानों से कुछ ऐसी अपेक्षा रखता है जो उनके जीवन से जुड़ी उन विषयों से संबंधित कठिनाइयों को कुछ कम करे जीवन को सरल बनावे एवं उनकी समस्याओं का कोई आसान समाधान खोजे| ऐसे अनुसंधान जनता की अपेक्षाओं पर  सौ प्रतिशत खरे न उतर पावें ऐसा हो सकता है किंतु दस प्रतिशत भी खरे न उतरें और कई कई दशक यूँ ही निरर्थक बीतते चले जा रहे हों किंतु महामारी,मौसम,मानसून,तापमान,वर्षा वायु प्रदूषण,भूकंप आदि विषयों के घटित होने का न निश्चित कारण बताया जा पा रहा हो और न ही पूर्वानुमान !जो बताए जा रहे हों वे घटनाओं के साथ मिलान करने में इतने बड़े पैमाने पर निरंतर गलत निकलते जा रहे हों तो चिंता होनी स्वाभाविक ही है | समाज को सोचना पड़ता है कि उन बातों पर विश्वास किया जाए कि न किया जाए !उनके आधार पर बनाए गए नियमों का पालन  किया जाए या न किया जाए !कई बार ऐसे नियमों का पालन न कर पाना जनता की अपनी मज़बूरी होती है तो सरकारें उन्हें मानने के लिए समाज को विवश करती हैं !

   महामारी या प्राकृतिकआपदा जैसे  बड़े संकटकाल में मध्यमवर्ग के लोग तो किसी प्रकार से अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति कर लिया करते हैं किंतु मजदूर वर्ग या मजबूर वर्ग के लिए धन के अभाव में अपनी आवश्यक आवश्यकताओं की पूर्ति करना अत्यंत कठिन होता है | ऐसी स्थिति में उन्हें  ऐसे प्रतिबंधों का सामना करना पड़े जिनसे उनकी दिनचर्या बुरी तरह बाधित होती हो ! उसके विषय में उन्हें बाद में पता लगे कि वे प्रतिबंध उन्हीं वैज्ञानिक अनुसंधानों के आधार पर लगाए गए थे जिनके आधार पर वैज्ञानिकों के द्वारा लगाए गए अनुमान पूर्वानुमान आदि गलत होते जा रहे थे तो यह न अच्छा होगा और न ही  लगेगा !

   कोविड काल दिल्ली मुंबई सूरत जैसे महानगरों से मजदूरों का पलायन हो या बिहार बंगाल आदि की चुनावी रैलियों में उमड़ी भीड़ या दीवाली धनतेरस की बाजारों में उमड़ी भीड़ या दिल्ली में किसान आंदोलन की भीड़ या हरिद्वार कुंभ में उमड़ी भीड़ या घनीबस्तियों के छोटे छोटे घरों या कार्यक्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों का सामूहिक रहन सहन जहाँ कोविडनियमों का पालन किसी भी रूप में संभव न रहा हो ! वहाँ संक्रमण का अधिक न बढ़ने से यह सोच माननी स्वाभाविक ही है कि ऐसे प्रतिबंधों की आवश्यकता कितनी थी | 

   प्राकृतिक आपदाएँ कभी कभी घटित होती हैं | इसी प्रकार से महामारियाँ इतने लंबे समय बाद आती हैं तब से अब तक प्राकृतिक आपदाओं या महामारियों के विषय में किए गए अनुसंधानों से प्राप्त अनुभवों का लाभ समाज को क्या हुआ ?

    महामारी,मौसम,मानसून,तापमान,वर्षा वायु प्रदूषण,भूकंप आदि ऐसे जिन विषयों में अनुसंधान हमेंशा चला करते हैं | उस वैज्ञानिक अनुसंधान प्रक्रिया से कुछ तो उपयोगी नए नए अनुभव भी मिलते ही होंगे उनका आगे कहीं उपयोग भी होता होगा उनसे आगे  और अधिक उपयोगी कुछ नए अनुभव भी मिलते होंगे !ऐसे अनुसंधान जनित विशिष्ट अनुभवों की यह श्रंखला इसी प्रकार से निरंतर चलती रहती है | 

    इसके द्वारा किसी ऐसे निष्कर्ष पर तो पहुँचा ही जा सकता है ! जो यह कहने लायक हो कि यह अनुसंधानों से प्राप्त हुआ है इससे समाज को इस इस प्रकार से लाभ होगा जो अनुसंधानों के बिना संभव न था |ऐसे अनुसंधान यदि न किए जा  रहे होते तो इस इस प्रकार से और अधिक नुक्सान हो सकता था ,तब तो अनुसंधानों की सार्थकता है अन्यथा पुनर्बिचार किया जाना आवश्यक है |  

                                      भारत का प्राचीनविज्ञान अंधविश्वास है क्या ?

      आधुनिक विज्ञान को आए अभी कुछ सौ वर्ष ही तो हुए हैं उसके पहले जो विज्ञान था जिसके आधार पर हम सभी के जीवन यापन की आवश्यकताओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही थी आज वो अंधविश्वास कैसे हो गया ! अंधविश्वास उस विज्ञान को बताया जा रहा है जो लाखों वर्षों से भारत वर्ष को गौरवान्वित करता रहा है जिसने प्राकृतिक घटनाओं को ठीक ठीक प्रकार से समझने के लिए  गणित जैसी वैज्ञानिक विधा को खोजा  है !जिसके द्वारा  सूर्य चंद्र ग्रहण जैसी प्राकृतिक घटनाओं गणित के द्वारा प्रत्यक्ष कर लिया है हजारों वर्ष पहले से लेकर हजारों वर्ष बाद तक की प्राकृतिक घटनाओं को समझने के लिए उनके घटित होने का कारण खोजने के लिए उन घटनाओं के विषय में अनुमान पूर्वानुमान आदि लगाने के लिए  गणितीय विधा विकसित कर ली है | जिसके आधार पर वर्तमान समय में घटित होने वाली घटनाओं के विषय में बहुत कुछ समझा जा सकता है | इसके साथ ही साथ आज के हजारों वर्ष पहले की घटनाओं के विषय में अनुमान पूर्वानुमान आदि लगाया जा सकता है| विशेष बात यह है कि अनुसंधान की इस प्रक्रिया में किसी उपग्रह रडार आदि किसी भी प्रत्यक्ष यंत्र की आवश्यकता नहीं है | केवल गणित के द्वारा ऐसा करके दिखा दिया जाता है | 

      किसी माला में 108 गुरियाँ होती हैं उस माला में जिस गुरिया में जो चिन्ह होता है वो माला फेरते समय अपने अपने क्रम से आता जाता है बाक़ी माला को रोककर केवल उसी गुरिया को ऊपर नीचे नहीं ले जाया जा सकता है वे सभी अपने अपने क्रम से ही ऊपर नीचे आएँगी जाएँगी | उन गुरियों में से जिस किसी चिन्ह वाली जो गुरिया  जिस गुरिया के आगे या पीछे होती है वो उसी क्रम में रहेगी |वो क्रम नहीं टूट सकता है | 

   इसी प्रकार से प्रकृति में घटित होने वाली प्रत्येक घटना समय रूपी धागे में पिरोई हुई है | इसलिए समय बीतने के साथ वे अपने अपने क्रम से घटित होती रहती हैं | सर्दी गर्मी वर्षा आदि प्रत्येक वर्ष अपने अपने क्रम से ही आते जाते देखी जाती हैं | प्रातः सायं दिन रात्रि शुक्ल पक्ष कृष्ण पक्ष  तथा सर्दी गर्मी वर्षा आदि की आवृत्ति का समय हमें पता है इसी लिए हम आगे से आगे यह जान लेते हैं कि किस घटना के बाद में कौन सी घटना घटित होगी | 

    कुछ घटनाओं का आपसी समयांतराल हमेंशा घटता बढ़ता रहता है | सर्दी गर्मी वर्षा की तरह उन घटनाओं की आवृत्तियाँ अपने अपने निर्धारित समय पर घटित होती हैं किंतु उनका आपसी समयांतराल भिन्न भिन्न होता है | उसके विषय में अनुमान पूर्वानुमान लगाना इतना आसान नहीं होता है इसलिए उसे गणितविज्ञान के द्वारा ही समझा जा सकता है उसे के द्वारा अनुमान पूर्वानुमान आदि लगाया जा सकता है जैसा कि ग्रहणों के समय में होता है | जिस प्रकार से सूर्य चंद्र ग्रहण जैसी प्राकृतिक घटनाओं के आपसी समयांतराल भिन्न भिन्न होने पर भी उनके विषय में अनुमान पूर्वानुमान आदि लगा लिया जाता है , जो एक एक सेकेंड का सही निकलता है| ऐसा गणित विज्ञान के द्वारा ही संभव हो पाया है | उसी गणित विज्ञान के द्वारा अनुसंधान पूर्वक  महामारी, मौसम, मानसून, तापमान, वर्षा वायु प्रदूषण,भूकंप आदि घटनाओं के विषय में भी अनुमान पूर्वानुमान आदि लगाए जा सकते हैं | इनका भी आपसी समयांतराल हर बार भिन्न भिन्न निकलता है किंतु गणित के द्वारा ग्रहणों की तरह  ही ऐसी प्राकृतिक घटनाओं के विषय में भी शोध पूर्वक अनुमान आदि लगाया जा सकता है | 

    इसी प्रकार से यदि महामारी और उसकी लहरों के आने जाने के विषय में सही सही अनुमान पूर्वानुमान आगे से आगे लगाया जा सकता है | तो वो अंधविश्वास कैसे हो सकता है | 

                प्राचीन विज्ञान के आधार पर महामारी के विषय में लगाए गए पूर्वानुमान 

                  आधुनिक विज्ञान के द्वारा महामारी के विषय में लगाए गए अनुमान !

                  आधुनिक विज्ञान के द्वारा महामारी के विषय में लगाए गए पूर्वानुमान !

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2 अप्रैल 2020 को आजतक में प्रकाशित : चीन के वैज्ञानिक का दावा- 4 हफ्तों में कम होंगे कोरोना वायरस के मामले ! चीन के सबसे बड़े कोरोना वायरस एक्सपर्ट ने दावा किया है कि अगले चार हफ्तों में पूरी दुनिया पहले जैसी हो जाएगी. कोरोना वायरस के नए मामलों में कमी आएगी. साथ ही ये भी भविष्यवाणी की है कि चीन में अब कोरोना वायरस का दूसरा हमला नहीं होगा. ये भविष्यवाणी की हैं डॉ. झॉन्ग नैनशैन ने. डॉ.झॉन्ग कोरोना वायरस को लेकर चीन की सरकार द्वार तैनात मुख्य टीम के प्रमुख भी हैं | https://www.aajtak.in/coronavirus/photo/china-top-coronavirus-expert-says-pandemic-will-decline-in-four-weeks-tstr-1046849-2020-04-02

17अप्रैल 2020 को न्यूज 18 में प्रकाशित :गृहमंत्रालय की ओर से किए गए एक आंतरिक सर्वेक्षण में पता चला है कि मई के पहले सप्ताह में कोरोना के मरीजों में काफी तेजी देखने को मिलेगी. हालांकि इसके बाद कोरोना मरीजों की संख्या धीरे-धीरे कम होने लगेगी | 

18 अप्रैल 2020 को नवभारत में प्रकाशित:भारत में मई के तीसरे हफ्ते तक ही जोर मारेगा कोरोना, उसके बाद मामले घटने के आसार हैं | इंडिया आउटब्रेक रिपोर्ट' में भारत में कोरोना की कुछ संभावनाओं का अनुमान लगाया गया है,  यह स्टडी ग्लोबल कंसल्टिंग फर्म प्रोटिविटी और टाइम्स नेटवर्क ने की है।https://navbharattimes.indiatimes.com/india/corona-will-continue-to-be-strong-in-india-till-the-third-week-of-may-after-that-cases-will-decrease/articleshow/75214143.cms

23 अप्रैल 2020 न्यूज 18 में प्रकाशित : विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ट्रेड्रोस ए गेब्रेयेसस ने वर्चुअल प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि, 'कई देशों में महामारी अभी शुरुआती चरण में है और जहां से महामारी की शुरुआत हुई थी वहां दोबारा मामले दिखने लगे हैं. हमें बहुत आगे जाना है और यह सुनिश्चित करें कि कोई गलती न हो. यह वायरस हमारे साथ लंबे समय तक रहेगा |https://hindi.news18.com/news/world/rest-of-world-who-warns-corona-virus-will-be-with-us-for-long-time-3042733.html 

25 अप्रैल 2020 को आजतक में प्रकाशित: सिंगापुर यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड डिजाइन के शोधकर्ताओं ने ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ड्रिवेन डाटा एनालिसिस के जरिए कोरोना समाप्त होने की भारत समेत 131 देशों के लिए एक अनुमानित तारीख तय की है उसके अनुशार भारत में कोरोनावायरस का असर 26 जुलाई तक पूरी तरह खत्म होने का अनुमान लगाया है. अनुमान के मुताबिक, भारत में 21 मई तक Covid-19 का संक्रमण करीब 97 फीसदी तक कम हो जाएगा और 1 जून तक 99 फीसदी केस कम हो जाएंगे. इसी तरह 26 जुलाई तक भारत कोरोना मुक्त हो जाएगा |https://www.aajtak.in/coronavirus/positive-news-on-corona-virus/story/india-coronavirus-pandemic-end-soon-predicts-sir-epidemic-model-singapore-university-of-technology-and-design-1058131-2020-04-25

25 अप्रैल 2020 को नवभारत में प्रकाशित:भारत में कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए बने टास्क फोर्स के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने उम्मीद जताई है कि 30 अप्रैल के बाद देश में कोरोना संक्रमण में गिरावट का दौर शुरू हो सकता है। उन्होंने अब तक के आंकड़ों के विश्लेषण के जरिए भविष्य के लिए प्रोजेक्शन ग्राफ पेश कर बताया कि 30 अप्रैल तक देश में कोरोना का संक्रमण अपने चरम पर होगा और उसके बाद इसमें गिरावट का दौर शुरू होगा। https://navbharattimes.indiatimes.com/india/coronavirus-cases-in-india-5-good-and-5-bad-news-in-india-fight-against-covid-19/articleshow/75371683.cms

26 अप्रैल 2020 को हिंदुस्तान में प्रकाशित : कानपुर आईआईटी में फिजिक्स विभाग के प्रोफेसर महेंद्र वर्मा ने अपने सहयोगियों सौम्यदीप चैटर्जी, असद अली, शाश्वत भट्टाचार्या और शादाब आलम की मदद से दुनिया भर के देशों के कोरोना पॉजिटिव मामलों और हुई मौतों के आधार पर गणितीय अध्ययन किया। उन्होंने आकलन के लिए वर्ल्ड मीटर वेबसाइट का सहारा लिया। इससे कई तरह के निष्कर्ष सामने आए हैं। जिसके आधार पर आईआईटी कानपुर ने खुलासा किया है कि भारत जल्द ही कोरोना संकट से उबरेगा | 

27 अप्रैल 2020 को ABP न्यूज में प्रकाशित :को इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च ने 21 मई से देश से कोरोना संकट खत्म होने की बात कही है ।

7 मई 2020 को  दैनिक जागरण में प्रकाशित: एम्‍स के डायरेक्‍टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि जांच नमूने की डाटा का अध्‍ययन करने के बाद यह कहा जा सकता है कि भारत में यह बीमारी जून-जुलाई के महीने में अपने चरम पर होगी।

9 मई 2020 को हिंदुस्तान में प्रकाशित :बिहार के सीनियर डॉक्टरों ने कहा, जून-जुलाई में कोरोना के मरीज बढ़ेंगे नहीं, घटने शुरू होंगे !वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. अजय कुमार ने कहा कि डॉ. रणदीप गुलेरिया के इस बयान का आधार क्या है,उन्होंने इसके लिए आंकड़े कहाँ से लाये, इसकी कोई जानकारी नही है।

9 मई 2020 को नवभारत में प्रकाशित: स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि कोरना का ग्राफ जल्द ही न केवल फ्लैट होगा बल्कि रिवर्स भी हो जाएगा। https://navbharattimes.indiatimes.com/india/harsh-vardhan-said-soon-corona-graph-would-be-reverse-too-now-all-test-kits-will-be-made-in-india/articleshow/75646327.cms

14 मई 2020 को आजतक में प्रकाशित: विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर माइकल रेयान ने चेतावनी दी है कि संभव है कोरोना वायरस हमारे साथ ही रहे उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि  COVID-19 हमारे आस-पास लंबे समय तक रह सकता है और यह भी हो सकता है कि कभी न जाए |https://www.aajtak.in/lifestyle/photo/who-warns-coronavirus-may-never-go-away-as-new-clusters-emerge-tlif-1067502-2020-05-14-1

27 मई 2020 को आजतक पर प्रकाशित : कांग्रेस नेता राहुल गांधी से हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आशीष झा ने बताया कि कोरोना वायरस  2021 तक रहने वाला है |https://www.aajtak.in/coronavirus/story/rahul-gandhi-covid19-crisis-health-experts-conversation-coronavirus-johan-giesecke-ashish-jha-1074345-2020-05-27  

1 जून  2020 को ABP न्यूज़ पर प्रकाशित : इटली के टॉप डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना वायरस धीरे-धीरे अपनी क्षमता खो रहा है, इसीलिए अब उतना जानलेवा नहीं रह गया है।जेनोआ के सैन मार्टिनो अस्पताल में संक्रामक रोग प्रमुख डॉक्टर मैट्टेओ बासेट्टी ने ये जानकारी न्यूज एजेंसी ANSA को दी कि बिना वैक्सीन के ही अब कोरोना खत्म हो जाएगा |SEE .. https://www.abplive.com/news/world/italy-top-doctors-claim-amid-corona-crisis-covid-19-virus-is-weakening-1416069  

3 जून 2020 को दैनिक भास्कर में प्रकाशित: खत्म हो रहा कोरोना? मरीजों की कमी से वैज्ञानिकों की बढ़ी चिंता, वैक्सीन ट्रायल के लिए  वॉलेंटियर नहीं मिल रहे !अमेरिका और यूरोप के वैज्ञानिकों का कहना है कि सख्ती से लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग लागू होने के बाद मामलों में कमी आई है। ऐसे में अब यहां वैक्सीन ट्रायल के लिए हॉटस्पॉट की कमी होती जा रही है। बताया जा रहा है कि इस कमी की वजह से वैक्सीन का ट्रायल प्रभावित हो सकता है।वैक्सीन तैयार कर रही ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का कहना है अगर ट्रायल के लिए पर्याप्त वॉलेंटियर नहीं मिले तो इसे रोकना पड़ सकता है | चीन से भी तीन दिन पहले ऐसी ही खबर मिली थी कि वहां भी पर्याप्त संख्या में वॉलेंटियर नहीं मिल रहे। https://www.bhaskar.com/happylife/news/corona-hotspots-not-available-for-vaccine-trials-now-preparing-for-testing-in-mexico-and-brazil-community-infection-centers-127370259.html

 6 जून 2020 को नवभारत में प्रकाशित : मध्य सितंबर के आसपास भारत में महामारी खत्म हो जाएगी : गणितीय मॉडल आधारित विश्लेषण !ऑनलाइन जर्नल एपीडेमीयोलॉजी इंटरनेशनल में प्रकाशित विश्लेषण के अनुशार: कोविड-19 महामारी मध्य सितंबर के आसपास भारत में खत्म हो सकती है.यह रिसर्च स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशालय (डीजएसएच) में उप निदेशक (जन स्वास्थ्य) डॉ अनिल कुमार और डीजीएचएस में उप सहायक निदेशक (कुष्ठ रोग) रूपाली रॉय के द्वारा किया गया  है.|https://navbharattimes.indiatimes.com/india/mathematical-model-based-analysis-will-end-in-india-around-mid-september/articleshow/76237321.cms 
15 जून 2020 को इंडियाडॉटकॉम पर प्रकाशित : पहली लहर में कोरोना नवंबर महीने में होगा अपने चरम पर, रिसर्च का दावा- ICU बेड्स और वेंटिलेटर्स की हो जाएगी कमी! इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च द्वारा गठित रिसर्च ग्रुप की स्टडी के मुताबिक नवंबर महीने में कोरोना अपने पीक पर होगा !
15 जून 2020 दैनिकजागरण में प्रकाशित: चेन्नई के वैज्ञानिक न्यूक्लियर और अर्थ साइंटिस्ट डॉ. केएल सुंदर कृष्णा का दावा है कि सूर्यग्रहणऔर कोरोना वायरस के बीच कनेक्शन है | इसीलिए पिछले साल 26 दिसंबर 2019 को लगने वाले सूर्यग्रहण से कोरोना प्रारंभ हुआ तथा और आने वाले 21 जून 2020 के सूर्यग्रहण के दिन लगने वाले ग्रहण से कोरोना वायरस समाप्त हो जाएगा ।
18 जुलाई 2020 को अमर उजाला में प्रकाशित : पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रो. के. श्रीनाथ रेड्डी ने कहा कि कोविड-19 के मामले मध्य सितंबर में चरम पर पहुंच सकते हैं | अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में हृदय रोग विभागाध्यक्ष रह चुके एवं हावर्ड में अभी अध्यापन कार्य से जुड़े हैं |  
1 अगस्त 2020 को जेनेवा में विश्व स्वास्थ्य संगठन की आपातकालीन समिति की बैठक के बाद चेतावनी दी गई कि कोरोना वायरस महामारी के "लम्बे" वक्त रहने की संभावना है | (लंबे का मतलब क्या समझा जाए कि कुछ वर्षों महीनों या दिनों तक चलेगी .) 
10 अक्टूबर 2020 को नवभारत पर प्रकाशित : नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने दिल्ली सरकार को इस स्तर पर तैयारी करने की सलाह दी है।डॉक्टर पॉल ने कहा कि सर्दियों में कोरोना के मामले बढ़ सकते हैं। इस वजह से उन्होंने दिल्ली सरकार को रोज 15 हजार नए मरीजों के अनुसार तैयारी करने की सलाह दी थी । 
19 अक्टूबर 2020 को आजतक पर प्रकाशित : भारत में सितंबर में आ चुका कोरोना का पीक, फरवरी तक मिल सकती है मुक्ति: समिति !  अगर लॉकडाउन ना होता तो भारत में जून तक 1.40 करोड़ से ज्यादा कोरोना संक्रमण के मामले हो गए होते. हैदराबाद IIT के प्रोफेसर एम. विद्यासागर ने 'भारत में कोविड-19 (Covid-19) महामारी की प्रगति: लॉकडाउन के प्रभाव और पूर्वानुमान' पर हुई एक स्टडीके बाद ऐसा दावा किया है |https://www.aajtak.in/lifestyle/news/photo/india-reached-corona-virus-peak-in-late-september-crisis-likely-to-end-by-february-tlif-1147681-2020-10-19 

दूसरी लहर के विषय में -

कोरोना सर्दी में ज़्यादा क़हर बरपाएगा: दुनिया जहान !कोलंबिया यूनिवर्सिटी के इनवॉयरमेंटल हेल्थ साइंसेज़ डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर मिकेला मार्टिनेज़ का जो बदलते मौसम के साथ किसी वायरस के स्वरूप में आने वाले बदलावों का वैज्ञानिक अध्ययन करती हैं.मिकेला मार्टिनेज़ का मानना है कि कोरोना भी सर्दी में बढ़ेगा."कोरोना वायरस 
18अक्टूबर 2020 को डाउन टू अर्थ में प्रकाशित: भारत में इस सर्दी में कोरोना वायरस की दूसरी लहर से इनकार नहीं कर सकते!ऐसा हो सकता है और हम अब भी वायरस के बारे में सीख रहे हैं-डॉ.वी.के.पॉल ,सदस्य नीति आयोग !
19 अक्टूबर 2020 आज तक में प्रकाशित - 2 साल तक कोरोना से राहत नहीं! WHO एक्सपर्ट ने दी ये 3 बातें अपनाने की सलाह!विश्व स्वास्थ्य संगठन की चीफ साइंटिस्ट सौम्या विश्वनाथन को लगता है कि कोरोना वायरस अभी रहेगा. दक्षिणी भारत वाणिज्य और उद्योग मंडल द्वारा आयोजित एक परिचर्चा में स्वामीनाथन ने कहा, 'हमें अनुशासित व्यवहार के लिए दो साल तक खुद को मानसिक रूप से प्रबल कर लेना चाहिए,see https://www.aajtak.in/lifestyle/news/photo/be-prepared-for-2-years-of-disciplined-behaviour-to-avoid-corona-virus-says-who-expert-1147784-2020-10-19-2
19-दिसंबर - 2020 को न्यूज स्ट्रक डॉट.कॉम में प्रकाशित:- प्रसिद्ध वायरोलॉजिस्ट डॉ.शहीद जमील ने कहा कि मुझे दूसरी लहर की संभावना नहीं लगती है | 
07 फरवरी 2021 को नव भारत टाइम्स में प्रकाशित :ब्लूमबर्ग के वैक्सीन कैलकुलेटर के मुताबिक, उसकी गणना बताती है कि कोरोना वायरस के खात्मे में अभी सात साल का समय और लग सकता है। इस गणना में टीकाकरण की रफ्तार को आधार बनाया गया है।यानी जिस तेजी से दुनियाभर में टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, उसके मुताबिक सभी देशों को अपनी 75 फीसदी आबादी को टीका लगाने में सात साल का वक्त लग जाएगा।see more...https://navbharattimes.indiatimes.com/world//coronavirus-is-here-to-stay-as-vaccine-calculator-predicts-long-time-to-reach-herd-immunity/articleshow/80730745.cms
26 फरवरी 2021 को डाउन टू अर्थ में प्रकाशित:-भारत में संक्रमण की दूसरी लहर की संभावना नहीं है -प्रो मणींद्र अग्रवाल IIT कानपुर
8 मार्च 2021को डाउन टू अर्थ में प्रकाशित: -"भारत में कोविड-19 महामारी के अंतिम दौर में हैं -केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री" -डॉ.हर्ष बर्द्धन !
25 मार्च 2021 को न्यूज़ 18 में प्रकाशित: एसबीआई ने रिपोर्ट जारी कर कहा कि देश में दूसरी लहर अप्रैल महीने के आखिर में अपने चरम पर होगी और यह लहर 100 दिन लंबी चलेगी, जो कि 15 फरवरी से शुरू हो चुकी है।https://hindi.news18.com/news/nation/coronavirus-indias-current-covid-wave-could-peak-in-2nd-half-of-april-may-last-up-to-100-days-sbi-report-3535292.html
30मार्च 2021को डाउन टू अर्थ में प्रकाशित :भारत में हालात बद से बदतर हो रहे हैं देश के किसी भी हिस्से को लापरवाह नहीं होना चाहिए रुझान बताते हैं कि वायरस अभी भी बहुत सक्रिय है और हमारे रक्षा तंत्र को भेद सकता है --डॉ.वी.के.पॉल ,सदस्य नीति आयोग
2अप्रैल 2021को दैनिक जागरण में प्रकाशित :वैज्ञानिकों का अनुमान, देश में अप्रैल के मध्य में चरम पर पहुँच जाएगी कोरोनामहामारी की दूसरी लहर!मनिंद्र अग्रवाल ने कहा कि मई के अंत तक मामले बेहद कम हो जाएँगे ।
06 अप्रैल 2021 को जी न्यूज़ में प्रकाशित:अगले 30 दिन बेहद क्रिटिकल, स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय का कोरोना पर बड़ा बयान ! केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अगले चार हफ्ते हमारे लिए बहुत क्रिटिकल हैं. अभी देश के कई हिस्सों में खतरनाक स्थिति बनी हुई है | 
9 अप्रैल 2021 को अमर उजाला में प्रकाशित : आई आईटी  कानपुर के प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि यूपी में संक्रमितों की संख्या काफी कम है। मॉडल के अनुसार यहां संक्रमण बढ़ने की संभावना भी काफी कम है। महाराष्ट्र में 10 अप्रैल से केस कम होने शुरू होंगे। उन्होंने कहा कि केस शून्य तो नहीं होंगे, लेकिन संख्या काफी कम हो जाएगी।
16अप्रैल 2021 को दैनिकजागरण में प्रकाशित:केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि कोरोना वायरस और कितना खतरनाक होगा और कब तक चलेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। घर के घर कोविड ग्रस्त हैं और आने वाले 15 दिन या 1 महीने में क्या होगा यह कहना मुश्किल है। उन्‍होंने कहा कि लोगों को सर्वश्रेष्ठ के लिए सोचना चाहिए, लेकिन सबसे खराब के लिए तैयार रहना चाहिए। इस महामारी से निपटने के लिए दीर्घकालिक प्रबंधों की जरूरत है।https://www.jagrantv.com/hi-show/covid-19-update-long-term-arrangements-needed-to-combat-covid-19-says-nitin-gadkari-watch-video-rc1017640  
16 अप्रैल 2021 को अमरउजाला में प्रकाशित: तूफान अभी बाकी: विशेषज्ञों ने चेताया-भारत में रोज निकल सकते हैं पाँच लाख नए केस!कोरोना की दूसरी लहर को लेकर महामारी रोग विशेषज्ञों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। विशेषज्ञों ने कहा कि कोरोना महामारी का भयानक प्रकोप अगले महीने दिखेगा। अभी तो इसका पीक आना बाकी है।यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में बॉयोस्टैटिस्टिक्स और महामारी रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर भ्रमर मुखर्जी नेकहा कि भारत में कोरोना की स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने कहा कि संक्रमण के मामलों का बढ़ना अभी कम नहीं होगा। प्रोफेसर भ्रमर मुखर्जी ने कहा कि यहां हर रोज 5 लाख तक नए केस निकलेंगे। इसके साथ ही तीन से चारहजार लोगों के जान गँवाने जैसी खबरें मिल सकती हैं। वहीं विषाणु वैज्ञानिक डॉ. रवि ने बताया कि वैक्सीन कोई  जादूगर की छड़ी नहीं है, जो एक बार घुमाई और सब ठीक हो गया। हालांकिउन्होंने कहा कि कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना बेहद जरूरी है। साथ ही वैक्सीनेशन भी आवश्यक है।
17अप्रैल 2021 को ABPन्यूज़ में प्रकाशित: लांसेंट जर्नल  में प्रकाशित‘भारत की दूसरी कोरोना लहर के प्रबंधन के लिए जरूरी कदम’शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जल्द ही देश में हर दिन औसतन 1750 मरीजों की मौत हो सकती है. रोजाना मौतों की यह संख्या बहुत तेजी से बढ़ते हुए जून के पहले सप्ताह में 2320 तक पहुँच सकती है |
 24 अप्रैल 2021 को अमरउजाला में प्रकाशित :दावा: अभी और बढ़ेगा कोरोना का तांडव, मई में रोजाना हो सकती है 5 हजार लोगों की मौत !एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में आने वाले दिनों में कोरोना वायरस का कहर और बढ़ेगा। मई में हर दिन 5,000 से ज्यादा लोगों की जान जाएगी यानी कि अप्रैल से लेकर अगस्त तक 300,000 से ज्यादा लोगों की मौत होगी। शिंगटन विश्वविद्यालय में इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (आईएचएमई) की ओर से कोविड-19 की आगामी स्थिति पर अध्ययन किया गया है। 15 अप्रैल को प्रकाशित इस अध्ययन में कोविड टीकाकरण अभियान के बावजूद दूसरी लहर के लंबे समय तक कहर बरपाने की आशंका जताई गई है। आईएचएमई के विशेषज्ञों ने अध्ययन में चेतावनी दी है कि भारत में आने वाले समय में कोरोना महामारी और विकराल रूप धारण कर सकती है। वाशिंगटन यूनिवर्सिटी की रिसर्च में कहा गया है कि भारत में मध्य मई तक कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर शीर्ष पर पहुँच सकती है |https://www.amarujala.com/india-news/covid-deaths-in-india-could-peak-by-mid-may-at-over-5-000-per-day-us-study
26 अप्रैल 2021 को इंडिया डॉट कॉम में प्रकाशित: आईआईटी के वैज्ञानिकों ने अपने गणितीय मॉडल के आधार पर अनुमान लगाया है कि भारत में महामारी की दूसरी लहर 14 से 18 मई के बीच चरम यानी पीक पर होगी. उस दौरान देश में सक्रिय मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 38 से 48 लाख तक पहुंच सकती है. उसके बाद मई के अंत तक मामलों में तेजी से कमी आएगी.नए पूर्वानुमान में समयसीमा और मामलों की संख्या में सुधार किया गया हैआईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों और हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने एप्लाइड दस ससेक्टिबल, अनडिटेक्ड, टेस्टड (पॉजिटिव) ऐंड रिमूव एप्रोच (फॉर्मूला) मॉडल के आधार पर ये अनुमान लगाया है कि कोरोना के मामलों में कमी आने से पहले मध्य मई तक उपचाराधीन मरीजों की तादाद में 10 लाख की बढ़ोतरी हो सकती है.पिछले हफ्ते, वैज्ञानिकों ने पूर्वानुमान लगाया था कि महामारी 11 से 15 मई के बीच चरम पर पहुँच सकती है और उपचाराधीन मामलों की संख्या 33-35 लाख तक हो सकती है. वहीं मई के अंत तक इसमें तेजी से कमी आएगी | 
 विशेष :-अप्रेल महीने के शुरू में, वैज्ञानिकों ने पूर्वानुमान लगाया था कि देश में 15 अप्रैल तक उपचाराधीन मामलों की संख्या चरम पर होगी, लेकिन यह बात सच साबित नहीं हुई. IIT-कानपुर में कंप्यूटर साइंस एंड टेक्नालजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर मनिंदर अग्रवाल ने कहा, ‘इस बार, मैंने पूर्वानुमान आंकड़े के लिए न्यूनतम और अधिकतम संगणना भी की है | 
2 मई 2021-को दैनिक जागरण में प्रकाशित :"भारत के वैज्ञानिकों के एक समूह ने कहा है कि भारत में आई कोरोना वायरस की दूसरी लहर की प्रकृति कैसी है, इसको लेकर कोई सटीक भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। कोरोना वायरस मामलों की वृद्धि का पूर्वानुमान लगाने के लिए गणितीय मॉडल पर काम कर रहे वैज्ञानिकों के एक समूह ने कहा कि है वे देश में आई विनाशकारी दूसरी लहर के सटीक प्रक्षेपवक्र (ट्रेजेक्ट्री) का अनुमान नहीं लगा सकते है क्योंकि समय के साथ वायरस की गतिशीलता और इसकी संक्रामकता में काफी बदलाव आया है।विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जारी और आइआइटी कानपुर के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल, एकीकृत रक्षा कर्मचारी उप प्रमुख माधुरी कानिटकर और आइआइटी हैदराबाद के प्रोफेसर एम. विद्यासागर द्वारा हस्ताक्षरित एक बयान में कहा गया है कि गणितीय मॉडल ने कोरोना वायरस की दूसरी लहर और अप्रैल के तीसरे हफ्ते में इसकी पीक की भविष्यवाणी की थी जिस दौरान लगभग एक लाख मामले रोज सामने आ रहे थे। उन्होंने उन रिपोर्टो को भी खारिज कर दिया है कि सूत्र मॉडल पर काम करने वाले वैज्ञानिकों ने मार्च में दूसरी लहर के बारे में चेतावनी दी थी, लेकिन उनकी चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया गया था।" https://www.jagran.com/news/national-could-not-predict-exact-nature-of-covid19-second-wave-in-india-group-of-scientists-working-on-mathematical-models-21609130.html
    6 मई 2021को न्यूज-18 में प्रकाशित- बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ साइंस ने आशंका जताई है कि अगर देश में कोरोना से मरने वालों रफ्तार मौजूदा की ही तरह रही तो 11 जून तक देश में मौतों का आंकड़ा 4,04,000 से अधिक हो सकता है. वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन स्थित इंस्‍टीट्यूट फॉर हेल्थ मीट्रिक्स एंड इवैल्युएशन के मुताबिक जुलाई के आखिर तक कोरोना संक्रमण से मरने वालों की संख्या 10 लाख के पार पहुंच सकती है| https://hindi.news18.com/news/nation/coronavirus-pandemic-likely-to-be-increase-in-india-death-number-to-be-double-as-report-says-covid-19-3579198.html 

6 मई 2021को न्यूज 18 में प्रकाशित:  ब्राउन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ हेल्थ के डीन आशीष झा के अनुसार भारत के लिए अगले 4 से 6 हफ्ते बेहद कठिन रहने वाले हैं. उन्होंने कहा कि हमारे सामने चुनौती यह है कि कैसे भी इस लहर को सीमित किया जाए !  ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत जैसे घनी आबादी वाले देशों में कोरोना संक्रमण के मामलों को लेकर भविष्यवाणी करना आसान नहीं है. भारत में कोरोना टेस्टिंग और सोशल डिस्टेंसिंग को बढ़ाने की जरूरत है. अगले कुछ महीनों में भारत कोरोना संक्रमण से मरने वाले लोगों की संख्या के मामले में दुनिया का नंबर एक देश बन सकता है. https://hindi.news18.com/news/nation/coronavirus-pandemic-likely-to-be-increase-in-india-death-number-to-be-double-as-report-says-covid-19-3579198.html

08 मई 2021को जीन्यूज़ में प्रकाशित:  थर्ड कोविड वेव के आने की भविष्यवाणी भी हो चुकी है. यह बात कोई और नहीं बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के वैज्ञानिक सलाहकार विजय राघवन ने कही है. साइंटिफिक एडवाइजर की इस आशंका पर IIT कानपुर के प्रोफेसर माणिंद्र अग्रवाल ने भी अपनी मुहर लगा दी है.  IIT कानपुर के इस प्रोफेसर का दावा है कि जुलाई तक कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप काफी कम हो जाएगा. लेकिन उनका दूसरा दावा भारत के लिए चिंताजनक है. उन्होंने डेटा एनालिसिस करके बताया है कि अक्टूबर में कोरोना की तीसरी लहर देश में शुरू हो जाएगी.
08 मई 2021को दैनिकभास्कर में प्रकाशित:कोरोना की दूसरी लहर के पीक पर सरकारी आंकड़े फेल; एक्टिव केस 48 लाख होंगे तब आएगा दूसरा पीक!SBI की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि दूसरी लहर का पीक अप्रैल के अंत तक आ सकता है, लेकिन वैक्सीनेशन की रफ्तार घटने के कारण इस अनुमान में बदलाव हुआ है। अनुमान में होने वाले इस बदलाव को लेकर एक्सपर्ट कहते हैं कि हम संकट से निपटने के लिए कौन से कदम उठाते हैं, उस पर भी बहुत कुछ निर्भर करता है। इन कदमों के हिसाब से ही पीक आगे-पीछे भी हो सकता है।एक और मैथमेटिकल मॉडल की बात लेते हैं। इसे IIT कानपुर और IIT गोवा के वैज्ञानिकों ने दिया है। इसके मुताबिक दूसरी लहर के पीक के वक्त 38 से 48 लाख के बीच एक्टिव केस होंगे।सरकार को सलाह देने वाली वैज्ञानिकों की एक टीम ने 3 से 5 मई के बीच देश में कोरोना की दूसरी लहर का पीक आने का अनुमान लगाया था।हालांकि इस मॉडल को देने वाले वैज्ञानिकों में शामिल IIT कानपुर के प्रोफेसर मनींद्र अग्रवाल ने शुक्रवार को कहा कि देश में आने वाले कुल मामलों की संख्या जिस तरह हर रोज बढ़ रही है, उससे पीक का फेज शिफ्ट हो सकता है। इसके लिए वो अगले दो-तीन दिन इंतजार करने को कहते हैं। डॉक्टर एम विद्यासागर ने 30 अप्रैल को कहा था कि हमारा अनुमान है कि देश में अगले हफ्ते तक पीक आ जाएगा। हालांकि इससे पहले 2 अप्रैल को इसी टीम ने 10 मई के आसपास पीक आने का अनुमान लगाया था।अशोका यूनिवर्सिटी के बायोलॉजी के प्रोफेसर गौतम मेनन कहते हैं कि दूसरी लहर का पीक मई के दूसरे हफ्ते या फिर महीने के अंत तक आ जाएगा। वहीं, ब्राउन यूनिवर्सिटी स्कूल के डीन डॉ. आशीष के. झा कहते हैं कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर का पीक जून तक आ सकता है। हालांकि वो मानते हैं कि ये सब राज्यों से आने वाले आंकड़ों पर निर्भर करेगा।https://www.bhaskar.com/db-original/explainer/news/coronavirus-peak-prediction-india-updates-sbi-iit-scientists-covid-active-cases-may-cross-lakh-128476899.html?media=1


31 मई 2020 को अमर उजाला में प्रकाशित :विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने कोविड-19 संबंधी पूर्वानुमान के लिए गणितीय मॉडल तैयार करने की बनाई योजना!विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने कोरोना वायरस संक्रमण के फैलने के संबंध में पूर्वानुमान लगाने में मदद के लिए गणित का एक राष्ट्रीय सुपरमॉडल तैयार करने की योजना बनाई है, जिससे नीति निर्माताओं को सहायता मिल सकती है।डीएसटी के सचिव आशुतोष शर्मा ने शनिवार को बताया कि ऐसे 20 से अधिक समूह हैं जिनके पास गणित के विभिन्न मॉडल तैयार हैं। इन सभी मॉडल के सबसे अच्छे पहलुओं को चुनकर सुपरमॉडल तैयार करने की योजना है।शर्मा ने कहा कि कोविड-19 से निपटने के लिए विशेष निधि देने की पहल के तहत डीएसटी गणितीय मॉडल तैयार करने में शामिल 10 समूहों को पहले ही निधि मुहैया करा रहा है। इस पहल के तहत बंगलूरू स्थित जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (जेएनसीएएसआर) और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएस) देश में कोविड-19 मॉडल संबंधी सभी परियोजनाओं एवं कार्यक्रमों से जुड़ने और उनके साथ काम करने के लिए समन्वय स्थापित करेंगे।शर्मा ने कहा कि इससे विभिन्न मॉडल का आकलन करने के लिए मापदंड तैयार करने और अंतत: ‘कोविड-19 भारत राष्ट्रीय सुपरमॉडल’ पेश करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह सुपरमॉडल कोरोना वायरस के विभिन्न पहलुओं संबंधी पूर्वानुमान  लगाने में मदद कर सकता है, जिनका इस्तेमाल नीति निर्माता कर सकते हैं।https://www.amarujala.com/india-news/corona-pandemic-department-of-science-and-technology-plans-to-prepare-mathematical-model-for-forecasting-covid-19

    दूसरी लहर के पूर्वानुमान बताने का दावा कितना सही ?

02 मई 2021 को दैनिक जागरण में प्रकाशित: कोरोना की दूसरी लहर के पीक की सटीक भविष्यवाणी मुश्किल, भारतीय वैज्ञानिकों का दावा !विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी और आइआइटी कानपुर के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल, एकीकृत रक्षा कर्मचारी उप प्रमुख माधुरी कानिटकर और आइआइटी हैदराबाद के प्रोफेसर एम. विद्यासागर आदि वैज्ञानिकों के एक समूह ने कहा है कि भारत में आई कोरोना वायरस की दूसरी लहर की प्रकृति कैसी है, इसको लेकर कोई सटीक भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।यह समूह कोरोना वायरस मामलों की वृद्धि का पूर्वानुमान लगाने के लिए गणितीय मॉडल पर काम कर रहा है |इस समूह ने कहा कि है वे देश में आई विनाशकारी दूसरी लहर के सटीक प्रक्षेपवक्र (ट्रेजेक्ट्री) का अनुमान नहीं लगा सकते है क्योंकि समय के साथ वायरस की गतिशीलता और इसकी संक्रामकता में काफी बदलाव आया है।गणितीय मॉडल केवल तभी कुछ निश्चितता के साथ भविष्य के बारे में भविष्यवाणी कर सकता है, जब वायरस का आयाम और इसकी प्रसार क्षमता समय के साथ पर्याप्त रूप से न बदले। गणितीय मॉडल बिना – दवा आधारित उपायों जैसे विभिन्न नीतिगत निर्णयों के अनुरूप वैकल्पिक परिदृश्यों की भविष्यवाणी करने की एक प्रक्रिया के बारे में भी बता सकते हैं। कोविड-19 के मामले में, यह बिल्कुल स्पष्ट है कि वायरस की प्रकृति बहुत तेजी से बदल रही है। ऐसीस्थिति में, कोविड-19 से जुड़ी किसी भी भविष्यवाणी में लगातार,कभी-कभी लगभग रोजाना,फेरबदल करके उसे दुरुस्त रखना चाहिए।  https://www.jagran.com/news/national-could-not-predict-exact-nature-of-covid19-second-wave-in-india-group-of-scientists-working-on-mathematical-models-21609130.html

11मई 2021 को डाउन टू अर्थ में प्रकाशित:  हरियाणा की अशोका यूनिवर्सिटी में भौतिकी और जीव विज्ञान विभाग के प्रोफेसर गौतम मेनन ने कोरोना महामारी की दूसरी लहर जैसी आपदा के विषय में  कहा कि भारत में नोवल कोरोना वायरस की दूसरी लहर का अनुमान लगाने में केंद्र का मॉडल ‘सूत्र विफल रहा।मंत्रालय का मॉडल सूत्र बहुत अच्छे से नहीं तैयार किया गया,इसमें शामिल वैज्ञानिक लंबी अवधि की पूर्वानुमान करने की कोशिश कर रहे हैं मॉडल लंबे समय की भविष्यवाणियां नहीं कर सकते हैं, क्योंकि समय के साथ चीजें बदल जाती हैं। सूत्र के वैज्ञानिकों ने मॉडलिंग से जुड़ी अनिश्चितताओं के साथ बहुत सतही तरीके से व्यवहार किया है।अमूर्त कल्पना करने में मॉडलिंग का कोई मतलब नहीं बनता है। आपको देश के विभिन्न हिस्सों में मामलों में होने वाली बढ़ोतरी के प्रति सचेत रहना पड़ता है। आपको पता होना चाहिए कि कौन से वेरिएंट आ रहे हैं, उनके बारे में क्या-क्या पता है और वे कितने अधिक संक्रामक हैं।इसके अलावा महामारी को नियंत्रित करने के लिए अपनाए गए उपायों के कारण भी नतीजे बदल भी सकते हैं। अगर हर कोई घर में रहे और चार सप्ताह तक बाहर ना निकले तो बीमारी का विस्तार तुरंत थम जाएगा।चूंकि, वे लोग महामारी विज्ञान की पृष्ठभूमि से नहीं आते हैं, इसलिए वे इस क्षेत्र की लगातार कम करके आंकते और इसकी बारीकियों व गहराई के प्रति उचित सम्मान न देते हुए दिखाई दिए।ऐसे मॉडल को साक्ष्य-आधारित पूर्वानुमान करने के लिए सख्त परीक्षणों की जररूत होगी, जैसे मौसम पूर्वानुमान करने वाले लगातार करते हैं| 

13 मई 2021 को आजतक में प्रकाशित :डॉ. वीके पॉल की प्रेस कांफ्रेंस  -

प्रश्न : नीतिआयोग के सदस्य डॉ. वी.के. पॉल से पूछा गया "क्या सरकार दूसरी लहर की तीव्रता से अंजान थी?"  उत्तर :इस सवाल के जवाब में डॉ वी.के. पॉल ने कहा कि  ये आरोप गलत है कि सरकार को कोरोना की दूसरी लहर की जानकारी नहीं थी. हम लगातार लोगों को विभिन्न प्लेटफॉर्म्स से चेतावनी दे रहे थे !हम ये भी बता रहे थे कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर आएगी. देश में अभी सीरो पॉजिटिविटी 20 फीसदी है. 80 फीसदी आबादी अब भी संक्रमण का शिकार हो सकती है |हम इस मंच से बार-बार चेतावनी देते रहे हैं कि कोरोना की दूसरी लहर आएगी | 
प्रश्न :प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. वीके पॉल से पूछा गया कि क्या वायरस अपने उच्चतम स्तर यानी पीक पर पहुंच गया है. 
उत्तर :डॉ. वीके पॉल ने कहा कि ऐसा कोई मॉडलिंग सिस्टम नहीं है, जिससे ये अंदाजा लगाया जा सके !कोरोना वायरस के अबूझ व्यवहार की वजह से ये बहुत मुश्किल है. ये बात पूरी दुनिया जानती है.| उसके  बाद डॉ. पॉल ने बताया कि कोरोना फिर से खतरनाक रूप में सामने आ सकता है,. महामारी से जल्द निजात मिलने की कोई संभावना नहीं है. सरकार से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वायरस कहीं नहीं गया है और पीक के आगे भी आने की आशंका है. इसलिए तैयारियों को तेज किया जाना चाहिए !..... https://www.aajtak.in/science/photo/indian-govt-says-covid-19-peak-will-come-virus-emerge-again-tstr-1254782-2021-05-14-6

15 मई 2021 को ndtv में प्रकाशित :जिनेवा:विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आगाह किया है कि कोरोना वायरस की महामारी पिछले साल के मुकाबले इस साल और ज्यादा घातक साबित होगी. डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एदानोम गेब्रेससने कहा कि हम कोरोना वायरस की इस महामारी को पिछले साल के मुकाबले इस बार ज्यादा जानलेवा होता हुआ देख रहे हैं.... https://ndtv.in/india-news/corona-epidemic-will-be-more-deadly-this-year-who-director-general-tedros-adhanom-ghebreyesus-warns-2441970 

22 जून 2021 को डाउन टू अर्थ में प्रकाशित : कोविड-19 की दूसरी लहर के लिए दोषी कौन ? भारत में कहर बरपाने वाली कोविड-19 की दूसरी लहर के क्या कारण रहे ? हमने शुरुआती संकेतों को कैसे नजरअंदाज कर दिया? और हम अब भी सबक सीखने को तैयार क्यों नहीं हैं ?

23 जून 2021 को आजतक में प्रकाशित : कोरोना की पहली लहर के डेटा को कमतर आंकने की गलती, हुआ ये नुकसान।कोरोना वायरस की दोनों लहरें कई देशों और शहरों में एक साल के अंदर ही आईं. वैज्ञानिक इस बात का पता लगा रहे हैं कि क्या हमनें दोनों लहरों के अंतर को समझने में भूल कर दी |https://www.jagran.com/news/national-could-not-predict-exact-nature-of-covid19-second-wave-in-india-group-of-scientists-working-on-mathematical-models-21609130.html 

तीसरी लहर के विषय में -

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9 अप्रैल 2021को अमर उजाला में प्रकाशित : नहीं आएगी तीसरी वेव !आई आईटी  कानपुर के प्रोफ़ेसर 
प्रो. मणींद्र ने कहा कि यूपी में संक्रमितों की संख्या काफी कम है। मॉडल के अनुसार यहां संक्रमण बढ़ने की संभावना भी काफी कम है। उन्होंने तीसरी वेव आने से भी इंकार किया है। प्रो. मणींद्र का कहना है कि तीसरी वेव जब तक शुरू होगी, उस समय तक 70 फीसदी लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ चुकी होगी।

15अप्रैल 2021को नवभारत में प्रकाशित : नितिन गडकरीने कहा कि 1 महीने के भीतर कितना खतरनाक हो जाएगा कोरोना, कोई नहीं जानता, तैयार रहें लोग !
1 मई 2021 को बी बी सी लंदन प्रकाशित : कोरोना की तीसरी लहर या किसी और महामारी के लिए भारत कितना है तैयार ?भारत में पिछले 14 महीनों में एक अदृश्य दुश्मन ने दो लाख से अधिक लोगों को मार डाला है और दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को बेबस कर दिया है.महामारी ने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को बेदम कर दिया है. लोग भयभीत और असुरक्षित हैं, ये राष्ट्र की सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण और गंभीर मामला है, क्योंकि ये शत्रु अब भी हर रोज़ घातक हमले किए जा रहा है.भारत के पाकिस्तान के साथ तीन बड़े युद्ध हुए और चीन के साथ एक. पिछले दो दशकों में भारत पर कई घातक चरमपंथी हमले हुए जिनमें सैकड़ों देशवासियों की जानें गईं.अब तक हुए छोटे-बड़े सभी युद्धों और चरमपंथी हमलों को मिलाकर भी इतने लोग नहीं मरे या अर्थव्यवस्था को इतनी क्षति नहीं पहुँची जितनी इस अदृश्य दुश्मन से पहुँच रही है और गंभीर बात ये है कि यह सब कुछ अभी थमा नहीं है | 

5-5-2021  को इंडिया डॉट कॉम पर प्रकाशित :   कोरोना की तीसरी लहर के बिषय में सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजय राघवन ने स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि कोरोना की तीसरी लहर को नहीं टाला जा सकता है.इसलिए  कोरोना की तीसरी लहर आएगी। इसे कोई नहीं रोक सकता है। हालांकि, यह कब आएगी और यह कैसे इफेक्ट करेगी, अभी कहना मुश्किल है।
7-5-2021  को ABP न्यूज में प्रकाशित :कोरोना की तीसरी लहर के बिषय में सरकार के प्रधानवैज्ञानिक सलाहकार के. विजय राघवन ने 5 मई को दिया अपना बयान  बदल दिया और कहा है -" अगर हम मजबूत उपाय करते हैं तो ऐसा संभव है कि देश में अगली लहर कहीं ना आए !"https://www.abplive.com/news/india/principal-scientific-advisor-to-centre-vijay-raghavan-says-if-we-take-strong-measures-the-third-wave-may-not-happen-in-all-the-places-or-indeed-anywhere-at-all-1911276 
8 -5-2021को जीन्यूज उत्तर प्रदेश की साईट में प्रकाशित : IIT कानपुर के इस प्रोफेसर का दावा है कि जुलाई तक कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप काफी कम हो जाएगा. लेकिन उनका दूसरा दावा भारत के लिए चिंताजनक है. उन्होंने डेटा एनालिसिस करके बताया है कि अक्टूबर में कोरोना की तीसरी लहर देश में शुरू हो जाएगी.
08 मई 2021भारत में कोरोना कहर के बीच में एक राहत की भी खबर है कि इस महीने कोरोना अपने पीक पर तो होगा, मगर जून में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सलाह देने वाली एक्सपर्ट्स की एक टीम ने सुझाव दिया है कि आने वाले कुछ दिनों में भारत में कोरोना वायरस अपने पीक पर होगा। मगर पिछले महीने इसी टीम का अनुमान गलत साबित हुआ था और कोरोना का कहर और बढ़ गया। हालांकि, इस टीम का हाल का अनुमान उन वैज्ञानिकों के सुझाव के करीब है, जिनका मानना है कि मई के मध्य तक भारत में कोरोना अपने पीक पर होगा। 

14 मई 2021 आज तक पर प्रकाशित : डॉ. वीके पॉल ने कहा कि ये आरोप गलत है कि सरकार को कोरोना की दूसरी लहर की जानकारी नहीं थी. हम लगातार लोगों को विभिन्न प्लेटफॉर्म्स से चेतावनी दे रहे थे !हम ये भी बता रहे थे कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर आएगी. देश में अभी सीरो पॉजिटिविटी 20 फीसदी है. 80 फीसदी आबादी अब भी संक्रमण का शिकार हो सकती है | https://www.aajtak.in/science/photo/indian-govt-says-covid-19-peak-will-come-virus-emerge-again-tstr-1254782-2021-05-14-6
14 मई 2021 आज तक पर प्रकाशित : एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. वीके पॉल से पूछा गया कि क्या वायरस अपने उच्चतम स्तर यानी पीक पर पहुंच गया है. तब उन्होंने कहा कि ऐसा कोई मॉडलिंग सिस्टम नहीं है, जिससे ये अंदाजा लगाया जा सके !कोरोना वायरस के अबूझ व्यवहार की वजह से ये बहुत मुश्किल है. ये बात पूरी दुनिया जानती है.| डॉ. पॉल ने बताया कि कोरोना वायरस का उच्चतम स्तर आना बाकी है. क्योंकि ये वायरस कभी भी अपना रौद्र रूप ले सकता है. बस इतनी सी बात हमें पता है |https://www.aajtak.in/science/photo/indian-govt-says-covid-19-peak-will-come-virus-emerge-again-tstr-1254782-2021-05-14-6 
14 मई 2021 आज तक पर प्रकाशित : नीतिआयोग के सदस्य डॉ. वी.के. पॉल से पूछा गया कि क्या कोरोना का पीक समाप्त हो  गया है ?इसके जवाब में डॉ. वी.के. पॉल ने कहा -महामारी से जल्द निजात मिलने की कोई संभावना नहीं है. सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वायरस कहीं नहीं गया है और पीक के आगे भी आने की आशंका है. नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. पॉल ने कहा कि कोरोना फिर से खतरनाक रूप में सामने आ सकता है, इसलिए तैयारियों को तेज किया जाना चाहिएhttps://www.aajtak.in/science/photo/indian-govt-says-covid-19-peak-will-come-virus-emerge-again-tstr-1254782-2021-05-14-6. 
14 मई 2021 को मनी कंट्रोल डॉट कॉम पर प्रकाशित:विश्व स्वास्थ संगठन के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा, 'महामारी का दूसरा साल पहले साल के मुकाबले बहुत ही जानलेवा होने की ओर बढ़ रहा है।'इसलिए अमीर देशों से गुजारिश है कि वे फिलहाल बच्चों को वैक्सीन देने के बजाय कोवैक्स के लिए डोज दान करें। इसकी वजह बताते हुए डब्लूएचओ चीफ टेड्रोस अधानोम ने 14 मई को कहा कि कोरोना महामारी का दूसरा साल पहले के मुकाबले बहुत ज्यादा जानलेवा होगा । https://hindi.moneycontrol.com/news/world/who-chief-urges-wealthy-nations-to-not-vaccinate-kids-instead-donate-vaccine-doses-to-poorer-countries-258987.html
2 जून 2021 में टाइम्स नाउ डिजिटल पर प्रकाशित :एसबीआई इकोरैप ने अंतरराष्ट्रीय अनुभवों का हवाला देते हुए मंगलवार को अपनी रिपोर्ट में कहा कि कोविड-19 की तीसरी लहर, दूसरी लहर की तरह ही घातक हो सकती है। एसबीआई का कहना है कि तीसरी लहर देश में 98 दिनों तक रह सकती है।
4-6-2021 को न्यूज नेशन में प्रकाशित :सितंबर-अक्टूबर तक कोरोना की तीसरी लहर आनी तय : नीति आयोग 
स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नीति आयोग के सदस्य वीके सारस्वत ने कहा कि भारत के महामारी विशेषज्ञों ने बहुत स्पष्ट संकेत दिए हैं कि कोविड-19 की तीसरी लहर अपरिहार्य है और इसके सितंबर-अक्टूबर से शुरू होने की आशंका है |https://www.newsnationtv.com/health/news/niti-ayog-clarifies-about-kids-vaccination-in-india-189125.html
9-6-2021 को हिंदुस्तान में प्रकाशित :भारतीय प्रौद्यौगिकी संस्थान (आईआईटी) के विशेषज्ञों ने कहा - "भारत में भी तीसरी लहर ज्यादा बड़ी नहीं होगी। यह पहली और दूसरी लहर की तुलना में बहुत कमजोर हो सकती है।" 
18 जून 2021 को जनतासेरिश्ताडॉटकॉम पर प्रकाशित: न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की ओर से कराए गए सर्वे में विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि कोरोना कम से कम एक साल और जन स्वास्थ्य के लिए चिंता की वजह बना रहेगा। दुनियाभर के 40 हेल्थकेयर स्पेशलिस्ट, डॉक्टर, साइंटिस्ट, वायरोलॉजिस्ट और महामारी विशेषज्ञों को इस सर्वे में शामिल किया गया था। 3-17 जून के बीच कराए गए इस सर्वे में जिन विशेषज्ञों ने माना कि तीसरी लहर आएगी, 85 फीसदी या 24 में से 21 ने कहा कि तीसरी लहर अक्टूबर तक आएगी। तीन अन्य ने इसके अगस्त में आने की भविष्यवाणी की तो 12 ने सितंबरमें शुरुआत की बात कही है। अन्य ने कहा कि तीसरी लहर नवंबर से फरवरी के बीच आ सकती है।https://jantaserishta.com/national/another-wave-of-corona-will-shake-the-country-third-wave-of-corona-may-knock-in-india-by-october-health-experts-warn-928135

19 जून 2021 को दैनिकभास्कर डॉट कॉम पर प्रकाशित:अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक रणदीपगुलेरिया ने चेतावनी दी कि यदि कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन नहीं किया गया और भीड़-भाड़ नहीं रोकी गई तो अगले छह से आठ सप्ताह में वायरल संक्रमण की अगली लहर देश में दस्तक दे सकती है।https://www.bhaskar.com/national/news/third-wave-in-6-8-weeks-if-covid-appropriate-behaviour-not-followed-says-aiims-chief-doctor-randeep-guleria-128613817.html 
  23 जून 2021 को हिंदुस्तान में प्रकाशित: कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर को लेकर आईआईटी कानपुर के दो वैज्ञानिकों के दावे अलग-अलग हैं। सर गणितीय मॉडल के आधार पर प्रो. राकेश रंजन दावा कर रहे हैं कि सितंबर-अक्तूबर में तीसरी लहर का पीक होगा और वह काफी खतरनाक साबित होगी, जबकि संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक पद्मश्री प्रो. मणींद्र अग्रवाल सूत्र गणितीय मॉडल के आधार पर तीसरी लहर को दूसरी लहर की अपेक्षा कमजोर मान रहे हैं।https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/story-different-claims-of-iit-scientists-regarding-the-third-wave-of-covid-19-4152949.html 
27जून 2021 को अमर उजाला में प्रकाशित : केंद्र सरकार के कोविड-19 वर्किंग ग्रुप के प्रमुख एनके अरोड़ा ने आज कहा कि देश में कोरोना की तीसरी लहर दिसंबर तक टल सकती है। डॉ. अरोड़ा ने कहा कि ICMR की स्टडी से पता चला है कि तीसरी लहर देश में देरी से आएगी।https://www.amarujala.com/india-news/covid-working-group-chairman-dr-nk-arora-says-icmr-has-come-up-with-a-study-which-says-corona-third-wave-is-likely-to-come-late 
 28 जून 2021 को न्यूज 18 पर प्रकाशित: कोरोना टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा है कि महामारी की अगली लहर का निश्चित समय नहीं बताया जा सकता. उन्होंने कहा कि किसी भी अगली लहर का कोई भी समय निश्चित करना तर्कसंगत नहीं होगा क्योंकि कोरोना का व्यवहार अनिश्चित है |   https://hindi.news18.com/news/nation/unfair-to-put-a-date-for-any-covid-wave-as-the-behaviour-of-coronavirus-is-unpredictable-says-vk-paul-3637407.html 
3 जुलाई 2021को नवभारत में प्रकाशित :IIT कानपुर की स्टडी में दावा- कोरोना की तीसरी लहर कमजोर रहेगी बशर्ते कोई नया म्यूटेंट न आए !दूसरी बात अगस्त का महीना काफी अहम है |https://navbharattimes.indiatimes.com/india/covid-19-third-wave-will-be-ripple-in-absence-of-faster-spreading-mutant-says-iit-kanpur-study/articleshow/84093418.cms  
5 जुलाई 2021 को  नवभारत में प्रकाशित: एसबीआई की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में कोरोना की तीसरी लहर अगस्त में आने की संभावना है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सितंबर में लहर का पीक हो सकता है। https://navbharattimes.indiatimes.com/india/coronavirus-third-wave-likely-in-august-will-reach-peak-in-september/articleshow/84143490.cms 
16 जुलाई 2021 को अमर उजाला में प्रकाशित -दुनिया कोरोना महामारी की तीसरी लहर को लेकर सहमी हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूूएचओ) के प्रमुख टेड्रॉस ए. गेब्रेयेसिस ने कहा है कि कोरोना की तीसरी लहर अभी शुरुआती दौर में हैं। दुनियाभर में डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित मरीजों की संख्या अभी गिनती में हैं। अभी इसे बेकाबू होनेसे रोकना संभव है, हमेशा की तरह इस बार भी अगर लापरवाही हुई तो पहले से भी भयावह नतीजे सामने होंगे। https://www.amarujala.com/world/the-third-wave-of-corona-is-still-in-its-early-stages-serious-consequences-if-not-stopped-in-time
विशेष बात :सूत्र ऐनालिसिस करने वाले वैज्ञानिकों की टीम में शामिल आईआईटी कानपुर के प्रफेसर मनिंदर अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने कोरोना की तीसरी लहर को लेकर तीन संभावित स्थितियों की भविष्यवाणी की है। 1. तीसरी लहर छोटी हो सकती है 2.तीसरी लहर कमजोर हो सकती है।3.वायरस का कोई तेजी से फैलने वाला म्यूटेंट आ जाता है तो तीसरी लहर पहली वाली लहर के जैसे ही होगी।    प्रफेसर अग्रवाल ने कहा, 'जो सबसे आशावादी अनुमान है, उसके मुताबिक अगस्त तक जीवन सामान्य ढर्रे पर आ जाएगा बशर्ते कि कोई नया म्यूटेंट न आए। दूसरा अनुमान यह है कि टीकाकरण 20 प्रतिशत कम प्रभावी होगा। तीसरी स्थिति निराशाजनक है जिसके मुताबिक अगस्त में एक नया म्यूटेंट सामने आ सकता है जो 25 प्रतिशत ज्यादा संक्रामक होगा।'सूत्र मॉडल के मुताबिक, अगर कोरोना वायरस का कोई ऐसा म्यूटेंट आ जाए जो बड़े पैमाने पर वैक्सीन को भी चकमा दे दे या जो ठीक हो चुके लोगों की इम्युनिटी को भी भेद सके तो ऊपर की तीनों संभावित परिस्थितियों का अनुमान अमान्य हो जाएगा।अग्रवाल द्वारा साझा किए गए ग्राफ के अनुसार तीसरी लहर अक्टूबर और नवंबर के बीच अपने चरम पर पहुँच सकती है। 
   विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने पिछले साल गणितीय मॉडल का उपयोग कर कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में वृद्धि का पूर्वानुमान लगाने के लिए समिति का गठन किया था। समिति में आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक अग्रवाल के अलावा आईआईटी हैदराबाद के वैज्ञानिक एम विद्यासागर और एकीकृत रक्षा स्टाफ उप प्रमुख (मेडिकल) लेफ्टिनेंट जनरल माधुरी कानितकर भी हैं। इस समिति को कोविड की दूसरी लहर की सटीक प्रकृति का अनुमान नहीं लगाने के लिए भी आलोचना का सामना करना पड़ा था।ये वही वैज्ञानिक मनींद्र अग्रवाल हैं जिन्होंने अप्रैल की शुरुआत में गणितीय मॉडल के माध्यम से अनुमान लगाया गया था कि देश में 15 अप्रैल तक संक्रमण की दर अपने चरम पर पहुंच जाएगी, लेकिन यह सत्य साबित नहीं हुई। अग्रवाल ने कहा कि मौजूदा चरण के लिए हमारे मॉडल के मापदंड लगातार बदल रहे हैं, इसलिए एकदम सटीक आकलन मुश्किल है।आईआईटी के विशेषज्ञों का मानना है कि तीसरी लहर दूसरी लहर से कमजोर होगी. एक्सपर्ट्स ने कहा कि तीसरी लहर कब आएगी इसको लेकर ठोस भविष्यवाणी नहीं की जा सकती. 
  वैज्ञानिक मनींद्र अग्रवाल ने बताया कि महामारी का पूर्वानुमान लगाने के लिए मॉडल में तीन मापदंडों का इस्तेमाल किया गया है। पहला बीटा या संपर्क, जिसकी गणना इस आधार पर की जाती है कि एक व्यक्ति ने कितने अन्य को संक्रमित किया। उन्होंने बताया कि दूसरा मापदंड है कि महामारी के प्रभाव क्षेत्र में कितनी आबादी आई, तीसरा मापदंड पुष्टि हुए और गैर पुष्टि हुए मामलों का संभावित अनुपात है। 
विशेषबात : आईआईटी कानपुर के द्वारा की गई इस रिसर्च का मतलब वह जनता क्या समझे जिसे मदद पहुँचाने के लिए ऐसे  रिसर्च किए जाते हैं और यदि उस जनता को कुछ समझ में ही नहीं आया तो ऐसे रिसर्च का मतलब क्या है और इस संपूर्ण वक्तव्य में कुछ निराधार तीर तुक्के जरूर दिखाई पड़ रहे हैं किंतु भविष्यवाणी जैसी कोई बात तो दूर दूर तक नहीं है | 
2 अगस्त 2021 को आजतक में प्रकाशित: हैदराबाद और कानपुर में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मेंमथुकुमल्ली विद्यासागर और मनिंद्र अग्रवाल के नेतृत्व में किए गए शोध में यह दावा किया गया है कि अक्टूबर में तीसरी लहर का पीक देखने को मिल सकता है. ब्लूमबर्ग के अनुसार विद्यासागर ने एक ईमेल में बताया कि केरल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के चलते स्थिति फिर गंभीर हो सकती है | 
23-अगस्त -2021 को न्यूज नेशन में प्रकाशित :- कानपुर आईआईटी के वरिष्ठ वैज्ञानिक और पद्मश्री पुरस्कार विजेता प्रो मणींद्र अग्रवाल ने दावा किया है कि बच्चों के लिए घातक करार दी जा रही कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की अब आशंका नहीं के बराबर है
 30-अगस्त 2021 को प्रभात खबर में प्रकाशित :गृहमंत्रालय की एक कमेटी ने कोरोना थर्ड वेव को खतरनाक बताया है जबकि आईआईटी-कानपुर के वैज्ञानिक मणिंद्रअग्रवाल ने कहा कि वायरस का अगर कोई नया वैरिएंट नहीं आया तो इसकी तीव्रता खतरनाक नहीं होगी. उन्होंने कहा -"भारत में कोविड-19 की तीसरी लहर अक्टूबर और नवंबर के बीच चरम पर हो सकती है। हालांकि इसकी तीव्रता दूसरी लहर की तुलना में काफी कम होगी।अगर तीसरी लहर आती है तो देश में प्रतिदिन एक लाख मामले सामने आएंगे। " ज्ञात रहे कि पिछले महीने, मॉडल के मुताबिक बताया गया था कि तीसरी लहर अक्टूबर और नवंबर के बीच में चरम पर होगी और रोजाना मामले प्रति दिन डेढ़ लाख से दो लाख के बीच होंगे !" 
विशेष बात :विद्यासागर की टीम के अनुमान गलत साबित हुए. उनका अनुमान था कि जून महीने के मध्य तक कोविड वेव पीक पर होगी उन्होंने तब ट्विटर पर लिखा था कि ऐसा गलत पैरामीटर्स के चलते हुआ | इसी साल मई में IIT हैदराबाद के एक प्रोफेसर विद्यासागर ने कहा था कि भारत के कोरोनावायरस का प्रकोप मैथेमेटिकल मॉडल के आधार पर कुछ दिनों में पीक पर हो सकता है. ब्लूमबर्ग के मुताबिक, उस वक्त विद्यासागर ने बताया था ‘हमारा मानना है कि कुछ दिनों के भीतर पीक आ जाएगा. मौजूदा अनुमानों के अनुसार जून के अंत तक प्रतिदिन 20,000 मामले दर्ज किए जा सकते हैं.’उन्होंने ने ही फिर भविष्यवाणी की है -  
14सितंबर 2021 को नवभारत में प्रकाशित :कोरोना की महामारी फिलहाल अभी खत्‍म होने नहीं जा रही है। यह कम से कम 6 और महीने रहेगी। पूरा दारोमदार वैक्‍सीनेशन पर है। महामारी से तभी मुक्ति मिलेगी जब 90 से 95 फीसदी लोगों का वैक्‍सीनेशन हो जाएगा। अभी यह दूर की कौड़ी है। ब्‍लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में एक्‍सपर्ट्स के हवाले से कोरोना महामारी के 6 महीने के आउटलुक पर यह बात कही है। उधर, बीएचयू के एक साइंटिस्‍ट ने दावा किया है कि अगले तीन महीने में कोरोना की तीसरी लहर देश में दस्‍तक दे देगी।https://navbharattimes.indiatimes.com/india/will-schools-be-closed-again-work-from-home-corona-will-not-go-for-6-months-third-wave-will-come-in-3-months-experts-claim/articleshow/86179538.cms 
23 सितंबर 2021 को आजतक में प्रकाशित:  कैसी हो सकती हैं भविष्य में कोरोना की लहरें?विश्व स्वास्थ्य संगठन और वैक्सीन एलायंस GAVI का आकलन है कि आने वाले कई वर्षों तक कोरोना वायरस कहींजाने वाला नहीं है. कम या ज्यादा प्रभावी रूप में ये अलग-अलग देशों और उनके अलग-अलग इलाकों में उभरता रहेगा. इससे निपटने के उपायों के साथ-साथ लोगों को इसके साथ जीने की आदत डालनी होगी. WHO की चीफ साइंटिस्ट डॉ. सौम्या स्वामीनाथन कहती हैं- 'हम ऐसे फेज की ओर बढ़ रहे हैं जिसे endemicity कहा जा सकता हैटॉप भारतीय वायरालॉजिस्ट डॉ. गगनदीप कांग कहती हैं कि तीसरी लहर अगर आती है तो दूसरी लहर जितनी मजबूत होगी ये अभी कहना उचित नहीं है. https://www.aajtak.in/coronavirus/story/corona-endemicity-covid-19-third-wave-india-and-world-ntc-1330626-2021-09-23
4 अक्टूबर2021 को नवभारत में प्रकाशित : आईसीएमआर के बलराम भार्गव, समीरन पांडा और संदीप मंडल और इंपीरियल कॉलेज लंदन से तीसरीलहर अगर आती है तो दूसरी लहर जितनी मजबूत होगी ये अभी कहना उचित नहीं है. मालन अरिनामिनपथी द्वारा गणितीय मॉडल ‘कोविड-19 महामारी के दौरान और भारत के अंदर जिम्मेदार यात्रा’ पर आधारित यह ‘ओपिनियन पीस’ (परामर्श) ‘जर्नल ऑफ ट्रैवल मेडिसिन’ में प्रकाशित किया गया है.-"कोरोना वायरस संक्रमण और कोरोना की तीसरी लहर का खतरा मंडरा रहा है. यदि किसी कारण से भीड़ होती है तो कुछ राज्‍यों में कोरोना की तीसरी लहर की स्थिति भयावह हो सकती है. विशेषज्ञों नेकहा है कि छुट्टियों की एक अवधि संभावित तीसरी लहर की आशंका को 103 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है और उस लहर में संक्रमण के मामले 43 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं | https://navbharattimes.indiatimes.com/india/mass-gatherings-can-create-horror-in-the-event-of-a-possible-third-wave-experts/articleshow/86758942.cms 
04 दिसंबर 2021 को अमर उजाला में प्रकाशित :आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मणीन्द्र अग्रवाल ने अपनी स्टडी के आधार पर दावा किया है कि तीसरी लहर जनवरी में शुरू हो जाएगी और फरवरी में इसका पीक रहेगा | 
18दिसंबर2021 को आजतक पर प्रकाशित : राष्ट्रीय COVID-19 सुपरमॉडल समिति ने कहा है कि देश में अभी हर दिन लगभग 7,500 कोरोना मामले आ रहे हैं लेकिन ये आंकड़ा ओमिक्रॉन के चलते बहुत जल्द बढ़ सकता है. समिति के प्रमुख विद्यासागर ने कहा कि ओमिक्रॉन के चलते देश में कोरोना की तीसरी लहर आएगी लेकिन ये दूसरी लहर की तुलना में कम प्रभावी होगी. उन्होंने  न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि कोरोना की तीसरी लहर अगले साल की शुरुआत में आने की संभावना है | 
18दिसंबर2021 को ABP न्यूज पर प्रकाशित :दवा कंपनी फाइजर (Pfizer) ने अनुमान लगाया है कि कोरोना महामारी 2024 तक खत्म नहीं होगी. फाइजर इंक (पीएफई.एन) ने शुक्रवार को पूर्वानुमान लगाया कि कोविड ​​​​महामारी 2024 तक पीछा नहीं छोड़ने जा रही है| कंपनी का अनुमान है कि 2024 तक इस बीमारी से संक्रमण का खतरा कम हो जाएगा.https://www.abplive.com/news/world/pfizer-forecast-covid-19-pandemic-could-extend-to-2024-pfizer-forecast-came-after-emergence-of-omicron-variant-2019292
22 दिसंबर 2021 को दैनिक भास्कर में प्रकाशित : तीसरी कोविड लहर का सामना कर रहा भारत, फरवरी में चरम पर होगा संक्रमण !ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों के बीच, भारत में दिसंबर के मध्य से कोविड-19 की तीसरी लहर शुरू हो गई है और यह अगले साल फरवरी में अपने चरम पर पहुंच सकती है।आईआईटी हैदराबाद के प्रोफेसर एम. विद्यासागर और आईआईटी कानपुर के मनिंदा अग्रवाल के अनुसार, दैनिक तौर पर मामले बढ़ने की उम्मीद है,गणित और सांख्यिकी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर, सुभरा शंकर धर ने पेपर में लिखा है, रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत में कोविड-19 की तीसरी लहर दिसंबर 2021 के मध्य में शुरू होगी और मामले फरवरी 2022 की शुरुआत में चरम पर होंगे।यह अनुमान आईआईटी हैदराबाद और कानपुर की एक संयुक्त टीम के नेतृत्व में एक अलग अध्ययन सूत्र मॉडल पर आधारित है|  
25दिसंबर 2021 को इंडिया डॉट कॉम पर प्रकाशित :आइआइटी कानपुर की एक रिसर्च टीम ने बताया है कि 3 फरवरी 2022 को कोरोना की तीसरी लहर आएगी. इस बीच डॉक्टरों ने दी चेतावनी है कि अगर अभी ओमिक्रॉन को नहीं रोका तो आने वाले दिनों में फिर मचेगी तबाही.!शोधकर्ताओं ने’ गॉजियन मिक्सचर मॉडल नाम के एक स्टेटिस्टिकल टूल का इस्तेमाल किया है. इसकी स्टडी में बताया गया है कि कोरोना की भारत में प्रारंभिक अवलोकन तिथि या (Initial Observation Date) 30 जनवरी 2020 है जब यहां कोविड-19 का पहला आधिकारिक मामला सामने आया था. इसलिए 15 दिसंबर 2021 से एक बार फिर कोरोना के केस फिर से बढ़ना शुरू हो रहे हैं और तीसरी लहर का पीक 3 फरवरी 2022 दिन गुरुवार को हो सकता है. रिसर्चर्स के मुताबिक, इस दिन कोरोना के सबसे अधिक केस दर्ज किए जा सकते हैं.
1 जनवरी 2022को आउट लुक डॉट कॉम पर प्रकाशित :फरवरी में पीक पर पहुँच सकता है ओमिक्रोन वेरिएंट, जानिए आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर ने क्यों किया ये दावा !उन्होंने दावा किया है कि फरवरी में ओमिक्रोन का पीक होगा, लेकिन मरीजों की संख्या न तो अधिक होगी और न ही मरीजों को हॉस्पिटल में भर्ती होने की नौबत आएगी। उसके बाद फरवरी के बाद ओमिक्रोन की लहर धीर-धीरे कम होने लगेगी।
9 जनवरी 2022 को बीबीसी लंदन में प्रकाशित:   कोरोना महामारी: 1-15 फरवरी के बीच आ सकता है तीसरी लहर का पीक- प्रेस रिव्यू !आईआईटी मद्रास के शुरुआती विश्लेषण में तीसरी लहर के 1 से 15 फ़रवरी के बीच पीक पर पहुँचने की आशंका जताई है | 
10 जनवरी 2022 को ABPन्यूज़ में प्रकाशित : मणींद्र अग्रवाल की माने तो उत्तर प्रदेश में जिस तरह से केस बढ़ रहे है वो आने वाले कुछ दिनों में स्थिति को और खतरनाक बना सकते हैं. ओमिक्रोन बहुत तेजी से खतरनाक हो रहा है | वो लोग भी संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं जो टीका लगवा चुके हैं | दिल्ली और मुंबई में पीक 15 से 16 जनवरी तक पहुँचने की संभावना है. पीक के दौरान मुंबई से अधिक केस दिल्ली में मिलेंगे.

13  जनवरी 2022 को पंजाब केशरी में प्रकाशित : फरवरी में अपने चरम पर होगी कोरोना की तीसरी लहर, एक दिन में आ सकते हैं करीब आठ लाख मामले !गणित और कंप्यूटर विज्ञान पर आधारित एक गणना और अनुमानों के मुताबिक भारत में कोरोना की तीसरी लहर अगले माह यानी फरवरी में अपने चरम पर होगी और इस दौरान एक दिन में कोरोना के चार से आठ लाख तक के मामले सामने आ सकते हैं। यह भी अनुमान लगाया गया है कि कोरोना की तीसरी लहर मार्च के मध्य में समाप्त होने की संभावना है। इस गणना को करने वाले आईआईटी कानपुर में गणित और कंप्यूटर विज्ञान के प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल ने बताया कि जिस मॉडल के तहत यह गणना की गई है वह दूसरों की तुलना में अधिक सटीक है।
14जनवरी 2022 को टीवी - 9 हिंदी डॉट कॉम में प्रकाशित : संयुक्तराष्ट्र रिपोर्ट का दावा :भारत में  तीसरी लहर में बरपेगा दूसरी लहर की तरह का कहर !कोविड-19 के अत्यधिक संक्रामक ओमिक्रॉन वेरिएंट के संक्रमण की नई लहरों के कारण मरने वालों की संख्या और आर्थिक नुकसान में फिर से वृद्धि होने की संभावना है.इंडिया टुडे के मुताबिक, मिशिगन विश्वविद्यालय की डेटा साइंटिस्ट और एपिडेमियोलॉजिस्ट प्रोफेसर भ्रमर मुखर्जी ने कहा है कि जनवरी के आखिर तक कोरोना की तीसरी लहर भारत में पीक पर होगी. जबकि फरवरी तक इसके समाप्त होने के आसार हैं | 
17 जनवरी 2022 को दैनिक जागरण में प्रकाशित :कोरोना की तीसरी लहर दो दिन बाद 19 जनवरी को ही उत्तर प्रदेश में चरम पर होगी। इसके साथ ही देश में 23 जनवरी को यह लहर चरम पर हो सकती है। इसके कुछ दिनों में ही संक्रमण की रफ्तार तेजी से घटनी भी शुरू हो जाएगी और मार्च में खत्म हो सकती है।
22  जनवरी 2022 को ABP न्यूज  में प्रकाशित :प्रोफेसर मणींद्र ने फरवरी में कोरोना का पीक आने का दावा किया था. लेकिन तेजी से फैलते कोरोना के बाद उन्हें अपनी पिछली भविष्यवाणी में सुधार करना पड़ा. पद्मश्री से सम्मानित प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल गणितीय मॉडल के आधार पर भविष्यवाणी करते हैं. अगर ये बात सच साबित होती है तो ये देश के लिए गुड न्यूज साबित होगी. बता दें कि पूरे देश में तीसरी लहर के दौरान 21 जनवरी को रिकार्ड 3.47 लाख नए कोरोना के मामले आए थे. हालांकि 22 जनवरी को ये आंकड़ा घटकर 3.35 लाख ही रहा. 
14फरवरी 2022 को दैनिक जागरण में प्रकाशित :केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि तीसरी लहर मार्च में पूरी तरह समाप्त हो जाएगी | https://www.jagran.com/news/national-will-the-covid-19-pandemic-end-after-march-know-the-opinion-of-experts-on-the-third-wave-figures-22466939.html
8 मार्च  2022 को जी बिजनेस में प्रकाशित :विभिन्न वायरोलॉजिस्ट और अन्य लोगों की भविष्यवाणी  "कोरोना की कोई तीसरी लहर नहीं होगी |" इसके विषय में ICMR के पूर्व डायरेक्टरप्रख्यात वायरोलॉजिस्ट डॉ. टी जैकब जॉन ने  बताया कि कोरोना की तीसरी लहर Omicron वेरिएंट पर आधारित थी. किसी ने भी इसकी भविष्याणी नहीं की थी, और यह धारणा कि कोरोना की कोई तीसरी लहर नहीं होगी, उस समय मौजूदा वेरिएंट पर आधारित थी|21 जनवरी, 2022 के बाद से नए मामलों में गिरावट आनी शुरू हो गई थी. 21 जनवरी को कोरोना के 3,47,245 नए मामले सामने आए थे.

 कोरोना की चौथी  लहर की भविष्यवाणी-
12 फरवरी 2022: को न्यूज 18 में प्रकाशित : 2022 में बेहतर होंगे हालात, लेकिन कोरोना के अंत की भविष्यवाणी सही नहींः WHO विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथनका मानना है कि कोरोनोवायरस की उत्पत्ति का पता लगाने में अभी लंबे समय तक प्रयास करने की जरूरत होगी | 
14फरवरी 2022 को दैनिक जागरण में प्रकाशित :मार्च के बाद भारत में खत्म हो जाएगी कोरोना की महामारी, ,केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि चौथी लहर के आने की आशंका बहुत कम है।https://www.jagran.com/news/national-will-the-covid-19-pandemic-end-after-march-know-the-opinion-of-experts-on-the-third-wave-figures-22466939.html

26 फरवरी 2022 को टीवी 9 में प्रकाशित :डॉ. टी. जैकब जॉन, महामारी विज्ञानी और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी की वैज्ञानिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष: इस वर्ष के दौरान किसी भी समय भारत में चौथी कोविड लहर की भविष्यवाणी करने का कोई वैज्ञानिक या संक्रामक साक्ष्य नहीं है, लेकिन हम ये अनुमान नहीं लगा सकते हैं कि वायरस अब अंतिम स्टेज पर है. ओमिक्रॉन वेरिएंट पूरी तरह से अप्रत्याशित था, क्योंकि ये अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा या कप्पा से नहीं था. ये कहाँ से आया, इसका स्रोत अभी तक ज्ञात नहीं है.https://www.tv9hindi.com/india/will-india-witness-the-fourth-covid-wave-in-2022-know-what-is-the-opinion-of-10-experts-1138305.html 
27 फरवरी 2022 को  हिंदुस्तान में प्रकाशित : आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं ने अगली लहर के समय का कैलकुलेशन लगाया है। MedRxiv में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कोविड की चौथी लहर 22 जून के आसपास आएगी और यह 24 अक्टूबर तक चलेगी।  
28 फरवरी 2022 को दैनिक जागरण में प्रकाशित : कानपुर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानआइआइटी के गणित और सांख्यिकीय विभाग से संबंधित गणित और सांख्यिकीय विभाग के शोधकर्ता वैज्ञानिकों ने गासियन वितरण प्रणाली के आधार पर आंकलन करके चौथी लहर आने का पूर्वानुमान बताया है। डा. शलभ के मुताबिक सांख्यिकीय गणना के आधार पर सामने आया है कि भारत में कोविड 19 की चौथी लहर प्रारंभिक डाटा मिलने की तिथि से 936 दिन बाद आ सकती है। चूंकि प्रारंभिक डाटा 30 जनवरी 2020 को सामने आया था, लिहाजा चौथी लहर 22 जून 2022 से शुरू होने के आसार हैं। यही नहीं चौथी लहर 23 अगस्त को अपने चरम पर पहुँच सकती है और 24 अक्टूबर को समाप्त हो सकती है।

28 फरवरी 2022 को हिंदुस्तान में प्रकाशित :मुंबई के ग्लोबल हॉस्पिटल के पल्नोलॉजी ऐंड क्रिटिकल केयर सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर हरीश चाफले का कहना है कि ओमिक्रॉन के बाद तक कई लोगों में नैचुरल इम्यूनिटी आ चुकी है। साथ ही ज्यादा से ज्यादा लोगों के वैक्सीन भी लग गई है। संभव है चौथी लहर के बाद कोरोना एंडेमिक में बदल जाए और इसके कुछ या न के  बराबर ही केस दिखें।
03 मार्च 2022 को वनइंडिया में  प्रकाशित: लुधियाना के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (सीएमसीएच) ने कोरोना की चौथी लहर को लेकर भविष्यवाणी की है। सीएमसीएच ने उपलब्ध डेटा के आधार पर कहा कि मई के आरंभ में कोरोना की चौथी लहर आने की संभावना है और यह लगभग 6 सप्ताह तक बनी रह सकती है।
 05 मार्च 2022 को इंडिया टीवी पर प्रकाशित:  जून में कोरोना की चौथी लहर आएगी? जानिए विशेषज्ञों ने अध्ययन में क्यों उठाए सवाल !महामारी विशेषज्ञ और वाशिंटन और नयी दिल्ली स्थित सेंटर फॉर डीसीज डायनेमिक्स, इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी के निदेशक रमणन लक्ष्मीनारायण का रुख है कि संभव है कि नई छोटी लहरें आ सकती हैं कि लेकिन आईआईटी कानपुर का पूर्वानुमान स्पष्ट नहीं है।अमेरिका के मिशिगन विश्वविद्यालय में वैश्विक स्वास्थ्य के प्रोफेसर मुखर्जी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा,‘‘मैं पूर्वानुमान पर विश्वास नहीं करता। मेरे अनुभव के मुताबिक पूर्वानुमान मॉडल अल्पकालिक यानी अगले दो-चार हफ्ते के पूर्वानुमान के लिए अच्छा है। लंबे समय के लिए यह भरोसे मंद नहीं है। क्या कोई दिवाली के समय ओमीक्रोन का पूर्वानुमान लगा सकता था? हमें अतीत के आधार पर ज्ञान के प्रति कुछ विनम्रता रखनी चाहिए।’आईआईटी कानपुर के अध्ययन में जून में कोविड-19 महामारी की चौथी लहर आने का पूर्वानुमान ‘‘आंकड़ा ज्योतिष’’ और कयास हो सकता है | चेन्नई स्थित गणितीय विज्ञान संस्थान (आईएमएससी) के प्रोफेसर सिताभरा सिन्हा ने कहा, ‘‘उपचाराधीन मरीजों की संख्या तेजी से कम हो रही है और मौजूदा परिपाटी को देखकर हम निश्चित तौर पर भविष्य में नयी लहर आने के बारे में नहीं कह सकते हैं।’’हरियाणा स्थित अशोका विश्वविद्यालय में भौतिक शास्त्र और जीवविज्ञान विभाग के प्रोफेसर मेनन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मैं ऐसे किसी पूर्वानुमान पर भरोसा नहीं करता, खासतौर पर जब तारीख और समय बताया गया हो।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम भविष्य के बारे में कोई पूर्वानुमान नहीं लगा सकते हैं, क्योंकि संभावित रूप से आने वाला नया स्वरूप अज्ञात है।https://www.indiatv.in/india/national/coronavirus-4th-wave-india-know-what-experts-said-while-questioning-the-forecasting-study-2022-03-05-838456
20 मार्च 2022“को 'पत्रिका' में प्रकाशित : भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के विषाणु विज्ञान में आधुनिक अनुसंधान केंद्र के पूर्व निदेशक डॉ टी जैकब जॉन ने कहा कि कोरोना की चौथी लहर की भविष्यवाणी करने के लिए कोई वैज्ञानिक, महामारी विज्ञान कारण नहीं है, कोई भी भविष्यवाणी नहीं कर सकता कि ऐसा नहीं होगा। मैं कह सकता हूं कि संभावना बहुत कम है।” 
02 अप्रैल 2022 को जनमत न्यूज में प्रकाशित : आईआईटी कानपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका दावा है कि अगर चौथी लहर आती है तो वह भी तीसरी लहर की तरह ही होगी यानि कम समय के लिए और कम घातक होगी।  प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि अभी कोरोना की चौथी लहर कब आएगी, इस बारे में कुछ कहना मुश्किल है। हालांकि जब तक नए वेरिएंट का एक केस भी नहीं आता तब तक चौथी लहर पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता !
 अप्रैल 2022 को दैनिक जागरण में प्रकाशित :गणित और विज्ञान के आईने में कोरोना की चौथी लहर को लेकर बेहद भ्रामक सूचनाएँ आ रही हैं सामने !गणित माडल से भविष्यवाणी करने वालों का कहना है कि कोरोना की चौथी लहर कभी भी आ सकती है | कुछ स्रोत कहते हैं कि लहर अवश्य आएगी, पर जानलेवा नहीं होगी। उधर सरकारें और समाज का एक वर्ग यह बात स्थापित करने पर उतारू है कि कोरोना महामारी खत्म हो गई है, अब कोई लहर नहीं आने वाली।लेकिन दुविधा वाली बात यह है कि चौथी लहर के बारे में विभिन्न स्रोतों से मिलने वाली सूचनाएं तीसरी लहर से पहले आने वाली सूचनाओं जैसी ही विरोधाभाषी हैं। इस कारण भी इनसे भ्रम पैदा हो रहा है। इस मामले में विज्ञान और गणित तक में विभेद है। आइआइटी कानपुर के प्रोफेसरों का गणितीय माडल कहता है कि देश में कोरोना की चौथी लहर अवश्य आएगी। दो महीने बाद जून में इसका असर दिख सकता है, तीन महीने बाद पीक आएगा तथा सितंबर अंत तक यह तेजी से सिमट जाएगी।देश के कई विषाणु विज्ञानी यह दावा कर चुके हैं कि चौथी लहर की कोई आशंका नहीं है।पूर्व प्रोफेसर डा. टी जैकब जान कहते हैं कि कोविड की चौथी लहर की भविष्यवाणी करने के लिए कोई वैज्ञानिक कारण नहीं है। सभी विषाणु विज्ञानी और चिकित्सक एकमत हों ऐसा भी नहीं है।विशेषज्ञ डा. चंद्रकांत लहरिया के अनुसार ओमिक्रान का नया वेरिएंट कोरोना की चौथी लहर लाएगा अवश्य।टीवी पर तर्कातीत होने के आरोप लगते रहते हैं, परंतु तर्क सम्मत बात कहने वाले विज्ञान और गणित ही जब विरोधाभासी दावे कर रहे हों तो राजनीतिक और अधिकारियों के बयानों के बारे में कहना ही क्या।
15 अप्रैल 2022 को आजतक में प्रकाशित : जून में आएगी कोरोना की चौथी लहर ! IIT ने किया था दावा, नए वैरिएंट XE ने बढ़ाया डर !IIT कानपुर के विशेषज्ञों ने कुछ समय पहले एक रिसर्च की थी. उनकी रिसर्च के मुताबिक, भारत में COVID-19 महामारी की संभावित चौथी लहर 22 जून 2022 के आसपास  शुरू हो सकती है. इस लहर का पीक अगस्त के आखिरी पर चरम पर हो सकता है | चौथी लहर का पता लगाने के लिए सांख्यिकीय मॉडल का उपयोग किया गया था, जिसमें पाया गया कि संभावित नई लहर 4 महीने तक चलेगी | 
16 अप्रैल 2022 को नवभारत में प्रकाशित : IIT कानपुर के प्रोफेसर राजेश रंजन ने अपने SIR मॉडल केआधार पर दावा किया है क‍ि देश में चौथी लहर आने की संभावना नहीं है।उन्होंने कहा कि अब तक आई स्टडी से साफ पता चलता है कि ओमीक्रोन के सब-वैरिएंट एक्सई और बीए.2 वैक्सीन और पुराने संक्रमण से पैदा हुई इम्यूनिटी को चकमा देने की क्षमता रखते हैं।https://navbharattimes.indiatimes.com/india/iit-kanpur-prediction-on-coronavirus-fourth-wave-cases-will-increase-locally-then-decrease/articleshow/90871848.cms
18 अप्रैल 2022 को जी न्यूजइंडिया डॉट कॉम पर प्रकाशित : आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मणीन्द्र अग्रवाल ने चौथी लहर को लेकर एक दावा किया है. कि चौथी लहर की आशंका बहुत कम है. अगर चौथी लहर आई भी, तो यह घातक नहीं होगी.
23 अप्रैल 2022 को मनीकंट्रोल में प्रकाशित :सर्दियों में कोरोनावायरस संक्रमण का म्यूटेशन और जानलेवा हो सकता है, WHO की चेतावनी !https://hindi.moneycontrol.com/news/india/coronavirus-omicron-high-risk-of-another-wave-in-winter-who-lists-2-ways-to-end-pandemic-this-year-546031.html
10 मई  2022 को न्यूज़ 24 में प्रकाशित : हो जाएँ सावधान! इजराइल के वैज्ञानिकों ने बताया कि कब तक आएगी कोरोना की चौथी लहर!बीजीयू के प्रोफेसर एरियल कुष्मारो ने एक बयान में कहा, "बेशक, इसमें बहुत सारे कारक शामिल हैं, लेकिन हमारा मॉडल यह दर्शाता है कि इस गर्मी में डेल्टा या किसी अन्य कोरोना वायरस वायरस का एक और प्रकोप हो सकता है।"  
10 मई 2022 को न्यूज 18 डॉट कॉम में प्रकाशित: प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल ने नई स्टडी के बाद दावा किया है कि बहुत मुमकिन है कि भारत को चौथी लहर देखनी ही न पड़े | 

पाँचवीं लहर :

   5 Sept 2022-यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी (EMA) की ओर से कहा गया है कि इस सर्दी , यूरोपीय देशों में नया कोविड -19 वेरिएंट सामने आ सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट की ओर से सरकारों से कहा गया है कि ऐसे मामलों के बढ़ने से पहले इस पर रोक लगाने के लिए जरूरी उपाय किए जाएं।                                                                                                                                        ! अनुसंधानों पर  उठते  सवाल !
28 फरवरी 2022 को दैनिक जागरण में प्रकाशित : कानपुर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानआइआइटी के गणित और सांख्यिकीय विभाग से संबंधित गणित और सांख्यिकीय विभाग के शोधकर्ता वैज्ञानिकों ने गासियन वितरण प्रणाली के आधार पर आंकलन करके चौथी लहर आने का पूर्वानुमान बताया है। डा. शलभ के मुताबिक सांख्यिकीय गणना के आधार पर सामने आया है कि भारत में कोविड 19 की चौथी लहर प्रारंभिक डाटा मिलने की तिथि से 936 दिन बाद आ सकती है। चूंकि प्रारंभिक डाटा 30 जनवरी 2020 को सामने आया था, लिहाजा चौथी लहर 22 जून 2022 से शुरू होने के आसार हैं। यही नहीं चौथी लहर 23 अगस्त को अपने चरम पर पहुंच सकती है और 24 अक्टूबर को समाप्त हो सकती है।

05 मार्च 2022 को इंडिया इंडिया टीवी में  प्रकाशित: जून में कोरोना की चौथी लहर आएगी? जानिए विशेषज्ञों ने अध्ययन में क्यों उठाए सवाल !उल्लेखनीय है कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के नवीनतम मॉडल अध्ययन में कहा गया था कि संभव है कि कोविड-19 महामारी की चौथी लहर 22 जून से शुरू होकर अगस्त के मध्य तक रह सकती है।वैज्ञानिकों का कहना है कि पूर्वानुमान मॉडल अल्पकालीन पूर्वानुमान के लिए ही अच्छा है और आईआईटी कानपुर के अध्ययन में जून में कोविड-19 महामारी की चौथी लहर आने का पूर्वानुमान ‘‘आंकड़ा ज्योतिष’’ और कयास हो सकता है।आईआईटी कानपुर के शोधकर्ता एस.प्रसाद राजेश भाई, शुभ्र शंकर धर और शलभ द्वारा किए अध्ययन में रेखांकित किया गया है कि संभव है कि वायरस के नये स्वरूप का व्यापक असर होगा।भारत में कोविड-19 के मामलों पर महामारी शुरू होने के बाद से ही नजर रख रहे गौतम मेनन ने कहा, ‘‘बताया गया समय ही अपने आप में संदिग्ध है।’’ हरियाणा स्थित अशोका विश्वविद्यालय में भौतिक शास्त्र और जीवविज्ञान विभाग के प्रोफेसर मेनन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मैं ऐसे किसी पूर्वानुमान पर भरोसा नहीं करता, खासतौर पर जब तारीख और समय बताया गया हो।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम भविष्य के बारे में कोई पूर्वानुमान नहीं लगा सकते हैं, क्योंकि संभावित रूप से आने वाला नया स्वरूप अज्ञात है।स्वास्थ्य विशेषज्ञ भ्रमर मुखर्जी ने भी इसपर सहमति जताते हुए कहा कि आईआईटी कानपुर द्वारा लगाया गया पूर्वानुमान आंकड़ा ज्योतिष है न कि आंकड़ा विज्ञान। अमेरिका के मिशिगन विश्वविद्यालय में वैश्विक स्वास्थ्य के प्रोफेसर मुखर्जी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा,‘‘मैं पूर्वानुमान पर विश्वास नहीं करता। मेरे अनुभव के मुताबिक पूर्वानुमान मॉडल अल्पकालिक यानी अगले दो-चार हफ्ते के पूर्वानुमान के लिए अच्छा है। लंबे समय के लिए यह भरोसेमंद नहीं है।महामारी विशेषज्ञ और वाशिंटन और नयी दिल्ली स्थित सेंटर फॉर डीसीज डायनेमिक्स, इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी के निदेशक रमणन लक्ष्मीनारायण का रुख है कि संभव है कि नई छोटी लहरें आ सकती हैं कि लेकिन आईआईटी कानपुर का पूर्वानुमान स्पष्ट नहीं है।  
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2-7-2020-गणितीय मॉडलों से कोविड-19 के मामलों का केवल दो सप्ताह तक का पूर्वानुमान सही हो सकता है |  14 सितंबर 2022 - विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस घेब्रेयसस का कहना है कि भले ही हम अभी महामारी को रोकने को लेकर बेहतर स्थिति में नहीं हैं लेकिन अब कोरोना महामारी का अंत होता दिखाई दे रहा है।पिछले सप्ताह दुनिया भर में कोरोनोवायरस से होने वाली मौतों की संख्या मार्च 2020 के बाद से महामारी में सबसे कम दर्ज की गई। यह पिछले दो साल से अधिक समय से चल रहे वैश्विक प्रकोप में एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है।
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18 दिसंबर 2021 को राष्ट्रीय COVID-19 सुपरमॉडल समिति के प्रमुख विद्यासागर ने कहा है कि देश में तीसरी लहर आने पर बहुत खराब स्थिति हुई  तो प्रतिदिन दो- लाख से अधिक मामले नहीं होंगे. उन्होंने कहा- "मैं इस बात पर जोर दे देता हूं कि ये अनुमान हैं, भविष्यवाणियां नहीं. हम भविष्यवाणियां कर सकते अगर हम जानते हैं कि भारतीय आबादी पर वायरस का बरताव कैसा कर रहा है | 
8 मार्च  2022 को जी बिजनेस में प्रकाशित :विभिन्न वायरोलॉजिस्ट और अन्य लोगों की भविष्यवाणी  "कोरोना की कोई तीसरी लहर नहीं होगी |" इसके विषय में ICMR के पूर्व डायरेक्टरप्रख्यात वायरोलॉजिस्ट डॉ. टी जैकब जॉन ने  बताया कि कोरोना की तीसरी लहर Omicron वेरिएंट पर आधारित थी. किसी ने भी इसकी भविष्याणी नहीं की थी, और यह धारणा कि कोरोना की कोई तीसरी लहर नहीं होगी, उस समय मौजूदा वेरिएंट पर आधारित थी| 
20 मार्च 2022“को 'पत्रिका' में प्रकाशित :भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के विषाणु विज्ञान में आधुनिक अनुसंधान केंद्र के पूर्व निदेशक डॉ टी जैकब जॉन ने कहा कि कोरोना की चौथी लहर की भविष्यवाणी करने के लिए कोई वैज्ञानिक, महामारी विज्ञान कारण नहीं है, कोई भी भविष्यवाणी नहीं कर सकता कि ऐसा नहीं होगा। मैं कह सकता हूं कि संभावना बहुत कम है।” 
07अप्रैल 2022 को दैनिक जागरण में प्रकाशित : गणित और विज्ञान के आईने में कोरोना की चौथी लहर को लेकर बेहद भ्रामक सूचनाएँ आ रही हैं सामने !गणित माडल से भविष्यवाणी करने वालों का कहना है कि कोरोना की चौथी लहर कभी भी आ सकती है?मीडिया के एक हिस्से ने भी ब्रिटेन की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी के हवाले से ओमिक्रोन के सब वेरिएंट के हाइब्रिड स्ट्रेन से बने नए वेरिएंट एक्सई का खौफ इस तरह फैलाया है कि लोग भयग्रस्त हैं। लोगों की चिंता में विश्व स्वास्थ्य संगठन की आशंकाएं, चीन के कई बड़े शहरों की पाबंदियों आदि का भी योगदान है। कुछ स्रोत कहते हैं कि लहर अवश्य आएगी, पर जानलेवा नहीं होगी। उधर सरकारें और समाज का एक वर्ग यह बात स्थापित करने पर उतारू है कि कोरोना महामारी खत्म हो गई है, अब कोई लहर नहीं आने वाली।दुविधा वाली बात यह है कि चौथी लहर के बारे में विभिन्न स्रोतों से मिलने वाली सूचनाएं तीसरी लहर से पहले आने वाली सूचनाओं जैसी ही विरोधाभाषी हैं। इस कारण भी इनसे भ्रम पैदा हो रहा है। इस मामले में विज्ञान और गणित तक में विभेद है। आइआइटी कानपुर के प्रोफेसरों का गणितीय माडल कहता है कि देश में कोरोना की चौथी लहर अवश्य आएगी। दो महीने बाद जून में इसका असर दिख सकता है, तीन महीने बाद पीक आएगा तथा सितंबर अंत तक यह तेजी से सिमट जाएगी।देश के कई विषाणु विज्ञानी यह दावा कर चुके हैं कि चौथी लहर की कोई आशंका नहीं है।विषाणु विज्ञानी और चिकित्सक एकमत हों ऐसा भी नहीं है। राजधानी दिल्ली के एक वरिष्ठ महामारी विज्ञानी का विचार है कि वायरस में हजार से अधिक उत्परिवर्तन हो चुके हैं और आगे भी होंगे। यह तय है कि यह म्यूटेशन चौथी लहर का कारण बनेगा, एक और विशेषज्ञ डा. चंद्रकांत लहरिया के अनुसार ओमिक्रान का नया वेरिएंट कोरोना की चौथी लहर लाएगा अवश्य।कुछ का कहना है कि इतनी आश्वस्ति से कुछ कहना कठिन है। हमें कुछ और समय इंतजार करना चाहिए, आंकड़े बताएंगे कि नया वेरिएंट लहर पैदा कर पाने में सक्षम है| टीवी माध्यम सनसनी फैला रहा है कि चीन और दक्षिण कोरिया में कोरोना संक्रमण के नए मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ये हालात कल भारत के भी हो सकते हैं। टीवी पर तर्कातीत होने के आरोप लगते रहते हैं, परंतु तर्क सम्मत बात कहने वाले विज्ञान और गणित ही जब विरोधाभासी दावे कर रहे हों तो राजनीतिक और अधिकारियों के बयानों के बारे में कहना ही क्या।सवाल यह है कि जब वैक्सीन की प्रतिरोधक क्षमता संबंधी प्रभाविकता के बारे में यह पक्का पता ही नहीं कि इसका असर साल भर टिकता है कि नहीं तो यह बात पुख्ता तौर पर कैसे कही जा सकती है। पहली और दूसरी डोज लगवाने के बावजूद लोगों को कोरोना संक्रमण हुआ। वैक्सीन लगवाने के बाद संक्रमण संभव है, पर यह जानलेवा नहीं होगा, ऐसा कहने के बावजूद जानें गईं। ऐसे में यह तो तय है कि जून तक बहुतों की वैक्सीन जनित सुरक्षा खत्म हो चुकी होगी। संक्रमण से पैदा हुई इम्युनिटी व्यक्ति आधारित है, यह कितनी मजबूत होगी यह भी आंकना जटिल है, क्योंकि यह व्यक्तिगत स्तर पर कोरोना के संक्रमण की गंभीरता, जटिलता, वायरस लोड आदि पर निर्भर है।पाबंदियां हटाने के बाद अब सरकार को जागरूकता बढ़ाने के साथ ही भ्रम दूर करने वाला विज्ञान सम्मत अभियान चलाकर जनता को वस्तुस्थिति से अवगत कराना चाहिए।
2 मई 2022 को दैनिक जागरण में प्रकाशित  : कोरोना से जुड़ी भविष्यवाणी पर लगे रोक : सतीश महाना!कोरोना महामारी को लेकर तरह-तरह की भविष्यवाणी की जा रही हैं। कोरोना बीमारी है, जबकि डाक्टरों से इतर तमाम विशेषज्ञ हो गए हैं। कई ज्योतिष के जानकार तक इसे लेकर तरह-तरह के दावे कर रहे हैं। हद तो यह है कि कोरोना की चौथी व पांचवीं लहर आने तक के दावे अभी से किए जा रहे हैं। कोरोना को लेकर इस तरह की भविष्यवाणी पर पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए। ये बातें रविवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के आठ दिवसीय कालेज आफ जनरल प्रैक्टिसनर्स (सीजीपी) के 39वें रिफ्रेशन कोर्स का उद्घाटन करते हुए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहीं।

14  मई 2020 को आजतक में प्रकाशित: विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर माइकल रेयान ने चेतावनी दी है कि संभव है कोरोना वायरस हमारे साथ ही रहे उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि  COVID-19 हमारे आस-पास लंबे समय तक रह सकता है और यह भी हो सकता है कि कभी न जाए | डॉक्टर रेयान ने कहा, 'हम एक वास्तविक दुनिया में जी रहे हैं और मुझे नहीं लगता कि कोई भी यह भविष्यवाणी कर सकता है कि यह बीमारी कब तक खत्म हो पाएगी.मुझे लगता है कि इस स्थिति में कोई भी वादा करना या वायरस खत्म होने की बात कहना सही नहीं होगा. यह बीमारी लंबी भी चल सकती है  | 


15अप्रैल 2021 को नव भारत में प्रकाशित: नितिन गडकरी बोले- '1 महीने के भीतरकितना खतरनाक हो जाएगा कोरोना, कोई नहीं जानता, तैयार रहें लोग !
2 मई 2021-को एक समाचारपत्र में प्रकाशित "भारत के वैज्ञानिकों के एक समूह ने कहा है कि भारत में आई कोरोना वायरस की दूसरी लहर की प्रकृति कैसी है, इसको लेकर कोई सटीक भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। कोरोना वायरस मामलों की वृद्धि का पूर्वानुमान लगाने के लिए गणितीय मॉडल पर काम कर रहे वैज्ञानिकों के एक समूह ने कहा कि है वे देश में आई विनाशकारी दूसरी लहर के सटीक प्रक्षेपवक्र (ट्रेजेक्ट्री) का अनुमान नहीं लगा सकते है क्योंकि समय के साथ वायरस की गतिशीलता और इसकी संक्रामकता में काफी बदलाव आया है।विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जारी और आइआइटी कानपुर के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल, एकीकृत रक्षा कर्मचारी उप प्रमुख माधुरी कानिटकर और आइआइटी हैदराबाद के प्रोफेसर एम. विद्यासागर द्वारा हस्ताक्षरित एक बयान में कहा गया है कि गणितीय मॉडल ने कोरोना वायरस की दूसरी लहर और अप्रैल के तीसरे हफ्ते में इसकी पीक की भविष्यवाणी की थी जिस दौरान लगभग एक लाख मामले रोज सामने आ रहे थे। उन्होंने उन रिपोर्टो को भी खारिज कर दिया है कि सूत्र मॉडल पर काम करने वाले वैज्ञानिकों ने मार्च में दूसरी लहर के बारे में चेतावनी दी थी, लेकिन उनकी चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया गया था।" 

विशेष बात :
26 May 2022-रिपोर्ट:अमर उजाला में प्रकाशित : 2020 में कोरोना नहीं, इन बीमारियों से गई देश में सबसे अधिक लोगों की जान, चौंका देगी आपको यह रिपोर्ट !देश में मौतों का तीसरा प्रमुख कारण जो कुल चिकित्सकीय प्रमाणित मौतों का 8.9 प्रतिशत है, उसे कोविड-19 के तहत वर्गीकृत किया गया है। 45 साल से ऊपर उम्र वालों की मौत दिल की बीमारी से हुई।वर्ष 2020 में देश में पंजीकृत कुल 81.15 लाख चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित मौतों में हृदय रोग, निमोनिया और अस्थमा ने सबसे अधिक 42 प्रतिशत लोगों की जान ली है। मौत के कारणों पर चिकित्सा प्रमाणन रिपोर्ट 2020 के अनुसार, भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त द्वारा तैयार रिपोर्ट बताती है कि कोविड-19 ने लगभग नौ प्रतिशत लोगों की जान ली। इस बीमारी से कुल 1,60,618 लोगों की मौत हुई। जहाँ संचार प्रणाली के रोगों ने 32.1 प्रतिशत लोगों की जान ली है,वहीं श्वसन प्रणाली से संबंधित बीमारियों से 10 प्रतिशत लोगों की मौत हुई है।
 1 अप्रैल 2020-कोरोना वायरस की कोई दवा नहीं फिर भी देश में कैसे ठीक हो रहे हैं लोग?
3 जून 2020 दैनिक भास्कर में प्रकाशित :पश्चिमी देशों के कोरोना हॉटस्पॉट में टेस्ट के लिए लोग नहीं मिल रहे, चीन के बाद अमेरिका और यूके में ये नई परेशानी !
प्रो. फ्रांसिस कोलिंग्स ,डायरेक्टर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ अमेरिका ने कहा है "अगर अमेरिका में तेजी से मामले गिरते हैं तो ट्रायल के लिए दूसरे  होगा !"
आयफर अली-  ड्रग एक्सपर्ट वारविक विजनेस स्कूल ब्रिटेन ने कहा है -"अगर कोरोना वायरस अस्थाई तौर पर ख़त्म हुआ तो पूरी मेहनत ब्यर्थ हो जाएगी !ट्रायल शिफ्ट करना होगा !"               
एड्रियन हिल -डायरेक्टर जेनर इंस्टीट्यूट ,ऑक्सफोर्ड युनिवर्सिटी ने कहा है -"ब्रिटेन में ट्रायल के लिए दस हजार वालेंटियर की जरूरत है | पर्याप्त लोग न मिलने पर ट्रायल रोकना पड़ सकता है |" -https://www.bhaskar.com/happylife/news/corona-hotspots-not-available-for-vaccine-trials-now-preparing-for-testing-in-mexico-and-brazil-community-infection-centers-127370259.html

26 मई 2022 को अमर उजाला में प्रकाशित:कोरोना नहीं, इन बीमारियों से गई देश में सबसे अधिक लोगों की जान, चौंका देगी आपको यह रिपोर्ट | देश में मौतों का तीसरा प्रमुख कारण जो कुल चिकित्सकीय प्रमाणित मौतों का 8.9 प्रतिशत है, उसे कोविड-19 के तहत वर्गीकृत किया गया है। 45 साल से ऊपर उम्र वालों की मौत दिल की बीमारी से हुई। वर्ष 2020 में देश में पंजीकृत कुल 81.15 लाख चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित मौतों में हृदय रोग, निमोनिया और अस्थमा ने सबसे अधिक 42 प्रतिशत लोगों की जान ली है। मौत के कारणों पर चिकित्सा प्रमाणन रिपोर्ट 2020 के अनुसार, भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त द्वारा तैयार रिपोर्ट बताती है कि कोविड-19 ने लगभग नौ प्रतिशत लोगों की जान ली। इस बीमारी से कुल 1,60,618 लोगों की मौत हुई। जहां संचार प्रणाली के रोगों ने 32.1 प्रतिशत लोगों की जान ली, वहीं श्वसन प्रणाली से संबंधित बीमारियों से 10 प्रतिशत लोगों की मौत हुई।  
  निमोनिया, अस्थमा और संबंधित बीमारियों से होने वाली मौतों को श्वसन तंत्र के रोगों के कारण होने वाली मौतों में दर्ज किया गया। तीसरा प्रमुख कारण जो कुल चिकित्सकीय प्रमाणित मौतों का 8.9 प्रतिशत है, उसे विशेष उद्देश्यों के लिए कोड: कोविड-19 के तहत वर्गीकृत किया गया था। कुछ संक्रामक और परजीवी रोग, जो मृत्यु का चौथा प्रमुख कारण थे, उसमें मुख्य रूप से सेप्टीसीमिया और तपेदिक थे। पांचवां प्रमुख कारण अंतःस्रावी, पोषण और मेटाबोलिक संबंधी रोग था जो कुल चिकित्सकीय प्रमाणित मौतों का 5.8 प्रतिशत रहा। इस श्रेणी के तहत मधुमेह और मेलिटस मौत का प्रमुख कारण थे।देश में मौतों का छठा प्रमुख कारण चोट, जहर, और बाहरी कारण (फ्रैक्चर, दवाओं का जहर और जैविक पदार्थ) रहे। यह कुल मौतों का 5.6 प्रतिशत था। नियोप्लाज्म (कैंसर) सातवां प्रमुख कारण था, जो कुल चिकित्सकीय प्रमाणित मौतों का 4.7 प्रतिशत रहा। कुल चिकित्सकीय प्रमाणित मृत्यु में पुरुष 64 प्रतिशत और महिलाएं 36 प्रतिशत थीं। सबसे अधिक मौतें (कुल चिकित्सकीय प्रमाणित मौतों का 5,17,678 या 28.6 प्रतिशत) 70 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में हुई। 45 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लिए संचार प्रणाली के रोग (हृदय रोग) मौत का पहला प्रमुख कारण था
कुल चिकित्सकीय प्रमाणित मौतों में (1 वर्ष से कम आयु) कुल 5.7 प्रतिशत शिशुओं की मौत हुई। सभी शिशुओं की मृत्यु का लगभग 71.7 प्रतिशत प्रसवकालीन अवधि के दौरान मुश्किलें पैदा होने से हुई। 15-24 वर्ष के आयु वर्ग में संचार प्रणाली से जुड़ी बीमारी से सबसे अधिक 18 प्रतिशत मौतें हुईं। इसके बाद चोट, जहर, और बाहरी कारणों से 15.7 प्रतिशत मौतें हुईं।  


26 मई 2022 को जी न्यूज में प्रकाशित: साल 2020 में मार्च के बाद देश में लंबा लॉकडाउन होने के बावजूद 1 लाख 31 हजार लोगों ने रोड एक्सीडेंट्स में अपनी जां गंवा दी. सरकार ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि 2019 के मुकाबले 2020 में 18 प्रतिशत कम एक्सीडेंट्स हुए. लेकिन 2020 में मार्च के बाद से सड़कों पर गाड़ियों की संख्या भी ना के बराबर थी. कोरोनावायरस महामारी की वजह से भारत में लॉकडाउन लग चुका था. उसके बाद भी देश में सवा लाख से ज्यादा लोगों की जान सड़क हादसों में चली गईhttps://zeenews.india.com/hindi/india/not-only-because-of-corona-in-2020-millions-lost-their-lives-because-of-this-too-in-india-shocking-report/1197721


https://zeenews.india.com/hindi/india/not-only-because-of-corona-in-2020-millions-lost-their-lives-because-of-this-too-in-india-shocking-report/1197721

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