वैज्ञानिकों के द्वारा किए गए पूर्वानुमान 1008
विज्ञान है या अंधविश्वास
दो शब्द
ज्योतिष आयुर्वेद एवं वैदिक विषयों में बीते लाखों वर्षों से अनुसंधान होते आ रहे हैं अनुसंधानों के आधार बीते लाखों वर्षों से महामारी, मौसम, मानसून, तापमान, वर्षा, वायुप्रदूषण,भूकंप आदि विषयों में अनुसंधानों होते रहने के प्रमाण मिलते हैं |इसके बाद सदियों तक देश परतंत्र रहा उस समय प्राचीन ज्ञान विज्ञान के शास्त्रीय अनुसंधान ग्रंथ कुछ नष्ट कर दिए गए कुछ उठा ले जाए गए !जो नष्ट हुए वो तो समाप्त ही हो गए और जो जहाँ उठा ले जाए गए वहाँ उन्हें समझने वाले विद्वान नहीं थे इसलिए उनका विशेष सदुपयोग नहीं हो सका |
आक्रांताओं के उपद्रवों के बाद जो शास्त्रीय वैज्ञानिक ग्रंथ बच भी गए वे या तो खंडित थे या फिर उस दारुण परतंत्रता काल में उनका छिप छिप के पठन पाठन करना पड़ा ,जिनसे सुयोग्य विद्वानों तक या तो उनकी पहुँच नहीं बन सकी इसलिए उन ग्रंथों का उस प्रकार से सदुपयोग नहीं हो सका जैसा कि होना चाहिए था | वैसे अनुसंधान नहीं किए जा सके जैसी कि आवश्यकता थी |
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद ऐसे विषयों को संरक्षित करने एवं उन के विषय में अनुसंधान किए जाने की विशेष आवश्यकता थी !इनसे संबंधित अनुसंधानों को आत्मीयता पूर्वक प्रोत्साहित करने की विशेष आवश्यकता थी ! सरकारी स्तर पर ऐसे अनुसंधानों के संबर्द्धन की विशेष आवश्यकता थी किंतु ऐसा कुछ विशेष किया नहीं जा सका !
वर्तमान समय में ऐसे विषय जिन विश्व विद्यालयों में पढ़ाई भी जा रहे हैं वहाँ केवल पाठ्यक्रम को पढ़ाया जा रहा है उसी से संबंधित अनुसंधान हो रहे हैं |जिनसे ऐसी कुछ आशा नहीं की जानी चाहिए कि महामारी, मौसम, मानसून, तापमान, वर्षा, वायुप्रदूषण,भूकंप आदि विषयों में कोई वैज्ञानिक उपलब्धि प्राप्त कर सकते हैं | यदि ऐसा होना संभव होता तो ऐसी घटनाओं से संबंधित अनुमान पूर्वानुमान आदि लगाने की दृष्टि से उनके द्वारा कुछ किया जाता |वस्तुतः शास्त्रीय दृष्टि से ऐसे विषयों पर या तो अनुसंधान नहीं किए जा रहे हैं या फिर जो अनुसंधान हो भी रहे हैं वे इस उद्देश्य से नहीं किए जा रहे हैं या फिर उनके द्वारा ऐसा किया जाना संभव नहीं होगा | निजी तौर पर जो ऐसे अनुसंधान कर भी रहा है उन्हें वैज्ञानिक क्षेत्रों में तो कोई प्रोत्साहन मिल ही नहीं रहा है प्रत्युत संस्कृत विश्व विद्यालयों से भी उन्हें वो सहयोग नहीं मिल पा रहा है | कई स्थानों पर तो अंधविश्वास बताकर उनका उपहास भी उड़ाया जा रहा है | जो लोग कुछ सहृदय व्यवहार करते हैं वो ये कहते सुने जाते हैं कि ऐसे शास्त्रीय अनुसंधानों से जानकारियाँ तो सही मिलती हैं किंतु ये विषय विज्ञान नहीं हैं इसलिए ऐसे विषयों से संबंधित अनुसंधान को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता है |
वर्तमान समय में अक्सर पढ़े लिखे लोगों के मुख से अंधविश्वास जैसे शब्दों को कहते सुनते देखा जाता है | उनके द्वारा प्रयोग किए जाने वाले अंधविश्वास का मतलब ज्योतिष तंत्रमंत्र जादूटोना एवं परंपराओं से प्राप्त पुरातन धर्मकर्म रीतिरिवाज आदि का अनुपालन होता है | नदियों पहाड़ों बृक्षों तालाबों कुओं के पूजन की पवित्र परंपराओं के पालन को अंधविश्वास बता दिया जाता है |
ऐसे ही प्राचीनकाल में अपनाए जाते रहे धर्म कर्म पुरातन परंपराओं सूर्य चंद्र आदि ग्रहणों के फल को वास्तु विज्ञान जैसे विषयों को अंधविश्वास बता बता कर उनका उपहास उड़ाया जाता है | इन सबके पीछे का आधारभूत कारण यह बताया जाता है कि ऐसी बातों का कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं दिखाई देता है | प्राचीन परंपराओं को अंध विश्वास मानने का कारण यदि यही है तो ऐसा तो वैज्ञानिक अनुसंधानों में भी होता है किंतु उन्हें सरकारी स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा होता है | उस प्रकार का सहयोग यदि शास्त्रीय अनुसंधान को भी मिले तो महामारी, मौसम, मानसून, तापमान, वर्षा, वायुप्रदूषण,भूकंप आदि विषयों में अनुसंधानों के परिणाम बहुत सकारात्मक हो सकते हैं |
भूमिका
महामारी का सामना क्या हम इतने कमजोर विज्ञान के भरोसे कर रहे थे !हमें महामारी, मौसम, मानसून, तापमान, वर्षा वायु प्रदूषण,भूकंप आदि किसी के विषय में न कारण पता हैं न पूर्वानुमान !आखिर क्यों ?
क्या अनुसंधान नहीं किए जा रहे हैं ! ऐसे अनुसंधानों पर क्या धन खर्च नहीं किया जा रहा है|क्या वह धन अतिरिक्त होता है जिसका कोई और उपयोग नहीं हो सकता है !क्या वह धन जनता के पास अतिरिक्त पड़ा हुआ होता है जो अपनी इच्छा से सरकारों को शृद्धा पूर्वक दे दिया करती है सरकारें जहाँ जैसे जितना चाहें खर्च करें !परिणाम स्वरूप उससे समाज को कुछ मिले या न मिले |
समाज का उद्देश्य केवल अनुसंधानों को चलाते रहना और उस पर धन खर्च करते रहना ही नहीं है अपितु us dhan ka उन अनुसंधानों से कुछ ऐसी अपेक्षा रखता है जो उनके जीवन से जुड़ी उन विषयों से संबंधित कठिनाइयों को कुछ कम करे जीवन को सरल बनावे एवं उनकी समस्याओं का कोई आसान समाधान खोजे| ऐसे अनुसंधान जनता की अपेक्षाओं पर सौ प्रतिशत खरे न उतर पावें ऐसा हो सकता है किंतु दस प्रतिशत भी खरे न उतरें और कई कई दशक यूँ ही निरर्थक बीतते चले जा रहे हों किंतु महामारी,मौसम,मानसून,तापमान,वर्षा वायु प्रदूषण,भूकंप आदि विषयों के घटित होने का न निश्चित कारण बताया जा पा रहा हो और न ही पूर्वानुमान !जो बताए जा रहे हों वे घटनाओं के साथ मिलान करने में इतने बड़े पैमाने पर निरंतर गलत निकलते जा रहे हों तो चिंता होनी स्वाभाविक ही है | समाज को सोचना पड़ता है कि उन बातों पर विश्वास किया जाए कि न किया जाए !उनके आधार पर बनाए गए नियमों का पालन किया जाए या न किया जाए !कई बार ऐसे नियमों का पालन न कर पाना जनता की अपनी मज़बूरी होती है तो सरकारें उन्हें मानने के लिए समाज को विवश करती हैं !
महामारी या प्राकृतिकआपदा जैसे बड़े संकटकाल में मध्यमवर्ग के लोग तो किसी प्रकार से अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति कर लिया करते हैं किंतु मजदूर वर्ग या मजबूर वर्ग के लिए धन के अभाव में अपनी आवश्यक आवश्यकताओं की पूर्ति करना अत्यंत कठिन होता है | ऐसी स्थिति में उन्हें ऐसे प्रतिबंधों का सामना करना पड़े जिनसे उनकी दिनचर्या बुरी तरह बाधित होती हो ! उसके विषय में उन्हें बाद में पता लगे कि वे प्रतिबंध उन्हीं वैज्ञानिक अनुसंधानों के आधार पर लगाए गए थे जिनके आधार पर वैज्ञानिकों के द्वारा लगाए गए अनुमान पूर्वानुमान आदि गलत होते जा रहे थे तो यह न अच्छा होगा और न ही लगेगा !
कोविड काल दिल्ली मुंबई सूरत जैसे महानगरों से मजदूरों का पलायन हो या बिहार बंगाल आदि की चुनावी रैलियों में उमड़ी भीड़ या दीवाली धनतेरस की बाजारों में उमड़ी भीड़ या दिल्ली में किसान आंदोलन की भीड़ या हरिद्वार कुंभ में उमड़ी भीड़ या घनीबस्तियों के छोटे छोटे घरों या कार्यक्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों का सामूहिक रहन सहन जहाँ कोविडनियमों का पालन किसी भी रूप में संभव न रहा हो ! वहाँ संक्रमण का अधिक न बढ़ने से यह सोच माननी स्वाभाविक ही है कि ऐसे प्रतिबंधों की आवश्यकता कितनी थी |
प्राकृतिक आपदाएँ कभी कभी घटित होती हैं | इसी प्रकार से महामारियाँ इतने लंबे समय बाद आती हैं तब से अब तक प्राकृतिक आपदाओं या महामारियों के विषय में किए गए अनुसंधानों से प्राप्त अनुभवों का लाभ समाज को क्या हुआ ?
महामारी,मौसम,मानसून,तापमान,वर्षा वायु प्रदूषण,भूकंप आदि ऐसे जिन विषयों में अनुसंधान हमेंशा चला करते हैं | उस वैज्ञानिक अनुसंधान प्रक्रिया से कुछ तो उपयोगी नए नए अनुभव भी मिलते ही होंगे उनका आगे कहीं उपयोग भी होता होगा उनसे आगे और अधिक उपयोगी कुछ नए अनुभव भी मिलते होंगे !ऐसे अनुसंधान जनित विशिष्ट अनुभवों की यह श्रंखला इसी प्रकार से निरंतर चलती रहती है |
इसके द्वारा किसी ऐसे निष्कर्ष पर तो पहुँचा ही जा सकता है ! जो यह कहने लायक हो कि यह अनुसंधानों से प्राप्त हुआ है इससे समाज को इस इस प्रकार से लाभ होगा जो अनुसंधानों के बिना संभव न था |ऐसे अनुसंधान यदि न किए जा रहे होते तो इस इस प्रकार से और अधिक नुक्सान हो सकता था ,तब तो अनुसंधानों की सार्थकता है अन्यथा पुनर्बिचार किया जाना आवश्यक है |
भारत का प्राचीनविज्ञान अंधविश्वास है क्या ?
आधुनिक विज्ञान को आए अभी कुछ सौ वर्ष ही तो हुए हैं उसके पहले जो विज्ञान था जिसके आधार पर हम सभी के जीवन यापन की आवश्यकताओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही थी आज वो अंधविश्वास कैसे हो गया ! अंधविश्वास उस विज्ञान को बताया जा रहा है जो लाखों वर्षों से भारत वर्ष को गौरवान्वित करता रहा है जिसने प्राकृतिक घटनाओं को ठीक ठीक प्रकार से समझने के लिए गणित जैसी वैज्ञानिक विधा को खोजा है !जिसके द्वारा सूर्य चंद्र ग्रहण जैसी प्राकृतिक घटनाओं गणित के द्वारा प्रत्यक्ष कर लिया है हजारों वर्ष पहले से लेकर हजारों वर्ष बाद तक की प्राकृतिक घटनाओं को समझने के लिए उनके घटित होने का कारण खोजने के लिए उन घटनाओं के विषय में अनुमान पूर्वानुमान आदि लगाने के लिए गणितीय विधा विकसित कर ली है | जिसके आधार पर वर्तमान समय में घटित होने वाली घटनाओं के विषय में बहुत कुछ समझा जा सकता है | इसके साथ ही साथ आज के हजारों वर्ष पहले की घटनाओं के विषय में अनुमान पूर्वानुमान आदि लगाया जा सकता है| विशेष बात यह है कि अनुसंधान की इस प्रक्रिया में किसी उपग्रह रडार आदि किसी भी प्रत्यक्ष यंत्र की आवश्यकता नहीं है | केवल गणित के द्वारा ऐसा करके दिखा दिया जाता है |
किसी माला में 108 गुरियाँ होती हैं उस माला में जिस गुरिया में जो चिन्ह होता है वो माला फेरते समय अपने अपने क्रम से आता जाता है बाक़ी माला को रोककर केवल उसी गुरिया को ऊपर नीचे नहीं ले जाया जा सकता है वे सभी अपने अपने क्रम से ही ऊपर नीचे आएँगी जाएँगी | उन गुरियों में से जिस किसी चिन्ह वाली जो गुरिया जिस गुरिया के आगे या पीछे होती है वो उसी क्रम में रहेगी |वो क्रम नहीं टूट सकता है |
इसी प्रकार से प्रकृति में घटित होने वाली प्रत्येक घटना समय रूपी धागे में पिरोई हुई है | इसलिए समय बीतने के साथ वे अपने अपने क्रम से घटित होती रहती हैं | सर्दी गर्मी वर्षा आदि प्रत्येक वर्ष अपने अपने क्रम से ही आते जाते देखी जाती हैं | प्रातः सायं दिन रात्रि शुक्ल पक्ष कृष्ण पक्ष तथा सर्दी गर्मी वर्षा आदि की आवृत्ति का समय हमें पता है इसी लिए हम आगे से आगे यह जान लेते हैं कि किस घटना के बाद में कौन सी घटना घटित होगी |
कुछ घटनाओं का आपसी समयांतराल हमेंशा घटता बढ़ता रहता है | सर्दी गर्मी वर्षा की तरह उन घटनाओं की आवृत्तियाँ अपने अपने निर्धारित समय पर घटित होती हैं किंतु उनका आपसी समयांतराल भिन्न भिन्न होता है | उसके विषय में अनुमान पूर्वानुमान लगाना इतना आसान नहीं होता है इसलिए उसे गणितविज्ञान के द्वारा ही समझा जा सकता है उसे के द्वारा अनुमान पूर्वानुमान आदि लगाया जा सकता है जैसा कि ग्रहणों के समय में होता है | जिस प्रकार से सूर्य चंद्र ग्रहण जैसी प्राकृतिक घटनाओं के आपसी समयांतराल भिन्न भिन्न होने पर भी उनके विषय में अनुमान पूर्वानुमान आदि लगा लिया जाता है , जो एक एक सेकेंड का सही निकलता है| ऐसा गणित विज्ञान के द्वारा ही संभव हो पाया है | उसी गणित विज्ञान के द्वारा अनुसंधान पूर्वक महामारी, मौसम, मानसून, तापमान, वर्षा वायु प्रदूषण,भूकंप आदि घटनाओं के विषय में भी अनुमान पूर्वानुमान आदि लगाए जा सकते हैं | इनका भी आपसी समयांतराल हर बार भिन्न भिन्न निकलता है किंतु गणित के द्वारा ग्रहणों की तरह ही ऐसी प्राकृतिक घटनाओं के विषय में भी शोध पूर्वक अनुमान आदि लगाया जा सकता है |
इसी प्रकार से यदि महामारी और उसकी लहरों के आने जाने के विषय में सही सही अनुमान पूर्वानुमान आगे से आगे लगाया जा सकता है | तो वो अंधविश्वास कैसे हो सकता है |
प्राचीन विज्ञान के आधार पर महामारी के विषय में लगाए गए पूर्वानुमान
आधुनिक विज्ञान के द्वारा महामारी के विषय में लगाए गए अनुमान !
आधुनिक विज्ञान के द्वारा महामारी के विषय में लगाए गए पूर्वानुमान !
2 अप्रैल 2020 को आजतक में प्रकाशित : चीन के वैज्ञानिक का दावा- 4 हफ्तों में कम होंगे कोरोना वायरस के मामले ! चीन के सबसे बड़े कोरोना वायरस एक्सपर्ट ने दावा किया है कि अगले चार हफ्तों में पूरी दुनिया पहले जैसी हो जाएगी. कोरोना वायरस के नए मामलों में कमी आएगी. साथ ही ये भी भविष्यवाणी की है कि चीन में अब कोरोना वायरस का दूसरा हमला नहीं होगा. ये भविष्यवाणी की हैं डॉ. झॉन्ग नैनशैन ने. डॉ.झॉन्ग कोरोना वायरस को लेकर चीन की सरकार द्वार तैनात मुख्य टीम के प्रमुख भी हैं | https://www.aajtak.in/coronavirus/photo/china-top-coronavirus-expert-says-pandemic-will-decline-in-four-weeks-tstr-1046849-2020-04-02
17अप्रैल 2020 को न्यूज 18 में प्रकाशित :गृहमंत्रालय की ओर से किए गए एक आंतरिक सर्वेक्षण में पता चला है कि मई के पहले सप्ताह में कोरोना के मरीजों में काफी तेजी देखने को मिलेगी. हालांकि इसके बाद कोरोना मरीजों की संख्या धीरे-धीरे कम होने लगेगी |
23 अप्रैल 2020 न्यूज 18 में प्रकाशित : विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ट्रेड्रोस ए गेब्रेयेसस ने वर्चुअल प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि, 'कई देशों में महामारी अभी शुरुआती चरण में है और जहां से महामारी की शुरुआत हुई थी वहां दोबारा मामले दिखने लगे हैं. हमें बहुत आगे जाना है और यह सुनिश्चित करें कि कोई गलती न हो. यह वायरस हमारे साथ लंबे समय तक रहेगा |https://hindi.news18.com/news/world/rest-of-world-who-warns-corona-virus-will-be-with-us-for-long-time-3042733.html
25 अप्रैल 2020 को आजतक में प्रकाशित: सिंगापुर यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड डिजाइन के शोधकर्ताओं ने ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ड्रिवेन डाटा एनालिसिस के जरिए कोरोना समाप्त होने की भारत समेत 131 देशों के लिए एक अनुमानित तारीख तय की है उसके अनुशार भारत में कोरोनावायरस का असर 26 जुलाई तक पूरी तरह खत्म होने का अनुमान लगाया है. अनुमान के मुताबिक, भारत में 21 मई तक Covid-19 का संक्रमण करीब 97 फीसदी तक कम हो जाएगा और 1 जून तक 99 फीसदी केस कम हो जाएंगे. इसी तरह 26 जुलाई तक भारत कोरोना मुक्त हो जाएगा |https://www.aajtak.in/coronavirus/positive-news-on-corona-virus/story/india-coronavirus-pandemic-end-soon-predicts-sir-epidemic-model-singapore-university-of-technology-and-design-1058131-2020-04-25
25 अप्रैल 2020 को नवभारत में प्रकाशित:भारत में कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए बने टास्क फोर्स के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने उम्मीद जताई है कि 30 अप्रैल के बाद देश में कोरोना संक्रमण में गिरावट का दौर शुरू हो सकता है। उन्होंने अब तक के आंकड़ों के विश्लेषण के जरिए भविष्य के लिए प्रोजेक्शन ग्राफ पेश कर बताया कि 30 अप्रैल तक देश में कोरोना का संक्रमण अपने चरम पर होगा और उसके बाद इसमें गिरावट का दौर शुरू होगा। https://navbharattimes.indiatimes.com/india/coronavirus-cases-in-india-5-good-and-5-bad-news-in-india-fight-against-covid-19/articleshow/75371683.cms
26 अप्रैल 2020 को हिंदुस्तान में प्रकाशित : कानपुर आईआईटी में फिजिक्स विभाग के प्रोफेसर महेंद्र वर्मा ने अपने सहयोगियों सौम्यदीप चैटर्जी, असद अली, शाश्वत भट्टाचार्या और शादाब आलम की मदद से दुनिया भर के देशों के कोरोना पॉजिटिव मामलों और हुई मौतों के आधार पर गणितीय अध्ययन किया। उन्होंने आकलन के लिए वर्ल्ड मीटर वेबसाइट का सहारा लिया। इससे कई तरह के निष्कर्ष सामने आए हैं। जिसके आधार पर आईआईटी कानपुर ने खुलासा किया है कि भारत जल्द ही कोरोना संकट से उबरेगा |
27 अप्रैल 2020 को ABP न्यूज में प्रकाशित :को इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च ने 21 मई से देश से कोरोना संकट खत्म होने की बात कही है ।
7 मई 2020 को दैनिक जागरण में प्रकाशित: एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि जांच नमूने की डाटा का अध्ययन करने के बाद यह कहा जा सकता है कि भारत में यह बीमारी जून-जुलाई के महीने में अपने चरम पर होगी।
9 मई 2020 को हिंदुस्तान में प्रकाशित :बिहार के सीनियर डॉक्टरों ने कहा, जून-जुलाई में कोरोना के मरीज बढ़ेंगे नहीं, घटने शुरू होंगे !वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. अजय कुमार ने कहा कि डॉ. रणदीप गुलेरिया के इस बयान का आधार क्या है,उन्होंने इसके लिए आंकड़े कहाँ से लाये, इसकी कोई जानकारी नही है।
9 मई 2020 को नवभारत में प्रकाशित: स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि कोरना का ग्राफ जल्द ही न केवल फ्लैट होगा बल्कि रिवर्स भी हो जाएगा। https://navbharattimes.indiatimes.com/india/harsh-vardhan-said-soon-corona-graph-would-be-reverse-too-now-all-test-kits-will-be-made-in-india/articleshow/75646327.cms
14 मई 2020 को आजतक में प्रकाशित: विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर माइकल रेयान ने चेतावनी दी है कि संभव है कोरोना वायरस हमारे साथ ही रहे उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि COVID-19 हमारे आस-पास लंबे समय तक रह सकता है और यह भी हो सकता है कि कभी न जाए |https://www.aajtak.in/lifestyle/photo/who-warns-coronavirus-may-never-go-away-as-new-clusters-emerge-tlif-1067502-2020-05-14-1
1 जून 2020 को ABP न्यूज़ पर प्रकाशित : इटली के टॉप डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना वायरस धीरे-धीरे अपनी क्षमता खो रहा है, इसीलिए अब उतना जानलेवा नहीं रह गया है।जेनोआ के सैन मार्टिनो अस्पताल में संक्रामक रोग प्रमुख डॉक्टर मैट्टेओ बासेट्टी ने ये जानकारी न्यूज एजेंसी ANSA को दी कि बिना वैक्सीन के ही अब कोरोना खत्म हो जाएगा |SEE .. https://www.abplive.com/news/world/italy-top-doctors-claim-amid-corona-crisis-covid-19-virus-is-weakening-1416069